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Haryana: मस्जिद से तिरंगा हटाकर लगाया भगवा झंडा, आरोपी को जमानत देने से हाईकोर्ट का इन्कार
Sun, 03 Aug 2025 02:27 PM IST
अंकेश ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Sun, 03 Aug 2025 02:27 PM IST
सार
7 जुलाई को गुरुग्राम के बिलासपुर में शिकायत प्राप्त हुई थी कि असामाजिक तत्वों ने एक मस्जिद से राष्ट्रीय ध्वज हटाकर वहां भगवा झंडा लगा दिया है। शिकायतकर्ता ने पुलिस को ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध कराई।
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high court
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गुरुग्राम के उटोन गांव में एक मस्जिद से तिरंगा ध्वज हटाकर उसकी जगह भगवा झंडा लगाने के आरोपी को अग्रिम जमानत देने से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया। जस्टिस मनीषा बत्रा ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी विकास तोमर के खिलाफ आरोप अस्पष्ट या सामान्य नहीं थे, बल्कि विशिष्ट थे और उसके और अन्य आरोपियों के बीच बातचीत से इसकी पुष्टि होती है।
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जस्टिस बत्रा ने सार्वजनिक व्यवस्था और सांप्रदायिक शांति की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इस मामले में गहन जांच की आवश्यकता है। सार्वजनिक व्यवस्था व सांप्रदायिक शांति पर इसके संभावित प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता द्वारा कोई असाधारण या अपवादात्मक परिस्थिति दर्ज नहीं की गई है जिसके आधार पर गिरफ्तारी-पूर्व जमानत दी जाए। अभियोजन पक्ष के अनुसार 7 जुलाई को गुरुग्राम के बिलासपुर में शिकायत प्राप्त हुई थी कि असामाजिक तत्वों ने एक मस्जिद से राष्ट्रीय ध्वज हटाकर वहां भगवा झंडा लगा दिया है। शिकायतकर्ता ने पुलिस को ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध कराई।
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पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया था। सत्र न्यायालय ने 15 जुलाई को वर्तमान याचिकाकर्ता तोमर को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप चौहान ने अपने आदेश में कहा था कि भारत जैसे महान देश में कुछ असामाजिक तत्व ऐसे भी हैं जो अपने तुच्छ लक्ष्यों और गलत विचारधाराओं के कारण समाज के सामाजिक ताने-बाने को कलंकित करने का प्रयास करते हैं।
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उन्होंने कहा था कि कोई भी सामान्य विवेकशील व्यक्ति, जिसके दिल में थोड़ी सी भी देशभक्ति हो, ऐसा अपराध करने की हिम्मत नहीं कर सकता। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंच गया। याची के वकील ने तर्क दिया कि पूरे मामले में उनकी कोई भूमिका नहीं है और उनका नाम एफआईआर में भी नहीं था। हरियाणा सरकार ने तर्क दिया कि आरोपी क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव पैदा करना चाहते थे। अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है और अग्रिम जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता है।