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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   The right to personal liberty given in the Constitution applies to foreigners as well: High Court

संविधान में दिया व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार विदेशियों पर भी लागू: हाईकोर्ट

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मुकदमे से पहले लंबे समय तक हिरासत में रखना उनके साथ होगा अन्याय
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बांग्लादेशी महिला को नियमित जमानत देते हुए हाईकोर्ट ने की बेहद अहम टिप्पणी


चंडीगढ़। जालसाजी, धोखाधड़ी और बिना वैध दस्तावेजों के भारत में रहने वाली आरोपी बांग्लादेशी महिला को नियमित जमानत देते हुए पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार विदेशियों पर भी लागू होता है। काेर्ट ने कहा कि मुकदमे से पहले लंबे समय तक हिरासत में रखना, खासकर बिना दस्तावेज वाले किसी प्रवासी के लिए जो जमानत का इंतजाम नहीं कर पा रहा हो उसके साथ अन्याय होगा।



फरीदा प्रवीण उर्फ शिखा गौड़ के खिलाफ पांच फरवरी को विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया था और तभी से वह हिरासत में है। उनके खिलाफ मामला संतोष शर्मा नाम की महिला की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था याची ने उसके बेटे को संबंध बनाने के लिए प्रेरित किया और नकदी व सोने के आभूषण हड़प लिये।
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हरियाणा सरकार के वकील ने दलील दी कि वह एक विदेशी नागरिक है और बिना किसी कानूनी दस्तावेज के भारत में रह रही है। उसने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अपना आधार, मतदाता पहचान पत्र और पैन कार्ड बनवाया है और अपना नाम बदलकर शिखा गौड़ रख लिया। हिरासत के दौरान उसने अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने की बात कबूल की है। मामले में अप्रैल में आरोपपत्र दाखिल किया गया था और मामला अब फरीदाबाद के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष है। याची के वकील ने कहा कि उसे और ज्यादा कैद रखना अन्यायपूर्ण होगा।
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कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने छह महीने से ज्यादा समय तक हिरासत में बिताया है और उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि विदेशी अनुच्छेद 21 के तहत सुरक्षा के हकदार हैं। अनुच्छेद 21 में व्यक्ति शब्द इतना व्यापक है कि इसमें न केवल नागरिक, बल्कि विदेश के लोग भी शामिल हैं।


बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों के लिए जमानत जमा करना मुश्किल है और जमानत की शर्तें इतनी कठोर नहीं हो सकतीं कि वे प्रभावी रूप से स्वतंत्रता से वंचित कर दें। कोर्ट ने कहा कि यदि इस आदेश के सात दिनों के भीतर याचिकाकर्ता कोई जमानत या मुचलका राशि जमा करने में असमर्थ है तो संबंधित मजिस्ट्रेट को याचिकाकर्ता को उसके निजी मुचलके पर रिहा करने की अनुमति होगी।
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