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Chandigarh-Haryana News: हरियाणा समेत उत्तर पश्चिम भारत में चार डिग्री तक चढ़ेगा पारा, चलेगी लू
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सिरसा में 44 डिग्री पहुंचा तापमान, 10 दिन बारिश के आसार नहीं, 19 के बाद सक्रिय होगा प्री-मानसून
नौ से 11 जून तक लू चलने का आसार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़/हिसार/नई दिल्ली। पश्चिमी हिमालयी राज्यों में बारिश और बर्फबारी के कारण हरियाणा समेत पश्चिम भारत को भीषण गर्मी से मिली राहत का दौर खत्म हो गया है। रविवार से फिर अधिकतम तापमान में तीन से चार डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि हो सकती है और अधिकांश इलाकों में लू चल सकती है। हरियाणा में अगले आठ से नौ दिन बारिश की कोई संभावना नहीं है। मौसम विभाग ने तीन दिन लू चलने का यलो अलर्ट भी जारी किया है।
मौसम विभाग के मुताबिक, नौ से 11 जून के बीच दक्षिण हरियाणा व दक्षिणी पश्चिमी हरियाणा में तापमान 45 डिग्री से ऊपर दर्ज किया जाएगा। इस समयावधि के दौरान लू चलने की पूरी संभावना है। इसे अलावा उत्तर पश्चिम भारत में भी 4 डिग्री तक तापमान बढ़ सकता है। पश्चिमी राजस्थान में 8-10 जून के बीच, पंजाब, चंडीगढ़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 9-11 जून के दौरान और पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तरी मध्य प्रदेश में 9 और 10 जून को भीषण गर्मी पड़ने के साथ ही लू चल सकती है।
शनिवार को सबसे गर्म शहर सिरसा रहा। सिरसा में दिन व रात का सभी जिलों के मुकाबले सबसे ज्यादा दर्ज किया गया। सिरसा में अधिकतम तापमान 44 डिग्री व न्यूनतम 28.4 डिग्री रिकॉर्ड हुआ। दिन में औसत अधिकतम तापमान सामान्य से 1.9 डिग्री रहा, जबकि न्यूनतम 1.4 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं, अंबाला में दिन का तापमान 40.3, हिसार में 41.8, रोहतक में 42.9, भिवानी में 40.9, फरीदाबाद में 39.5, जींद में 39.6, करनाल में 37.3, नूंह में 41.1, पंचकूला में 37.2 डिग्री दर्ज किया गया है। मानसून पहुंचने में अभी कम से कम 15 से 18 दिन लगेंगे।
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दूसरी ओर, दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत और पूर्वोत्तर के राज्यों में 10 जून से फिर भारी बारिश में तेजी आने की संभावना है। पिछले दिनों हुई बारिश के बाद पूर्वोत्तर में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई थी, जिसमें मामूली सुधार हुआ है।
भूस्खलन प्रभावित चातेन से 76 सैन्यकर्मी निकाले गए
उत्तर सिक्किम के भूस्खलन प्रभावित चातेन से 76 सैन्यकर्मियों के सेना के तीन एमआई-17 हेलिकॉप्टर से सुरक्षित निकाला गया है। भारी बारिश और भूस्खलन के चलते जगह-जगह सड़कें टूट जाने से ये सैनिक चातेन में फंस गए थे। इन सभी को पाकयोंग के ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट पर लाया गया, जहां से सड़क मार्ग से उन्हें गंगटोक व अन्य स्थानों पर भेजा जाएगा। खराब मौसम और भूस्खलन की वजह से उत्तरी सिक्किम के लाचेन, लाचुंग और चुंगथांग कस्बे सड़क मार्ग से कट गए थे और जगह-जगह 1,600 से अधिक सैलानी फंस गए थे, जिन्हें कई दिनों तक अभियान चलाकर सुरक्षित निकाला गया। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल उत्तरी सिक्किम में अब कोई सैलानी फंसा नहीं है।
1,300 राहत सामग्री पहुंचाई
उत्तरी सिक्किम से सैन्यकर्मियों को निकालने में लगाए गए सेना के हेलिकॉप्टर से वहां ड्यूटी पर तैनात रहने वाले सैन्यकर्मियों और अन्य नागरिकों के लिए 1,300 किलोग्राम राहत सामग्री भी पहुंचाई गई। अधिकारियों ने बताया कि पाकयोंग एयरपोर्ट से खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के पांच अधिकारियों की टीम राहत सामग्री लेकर एमआई-17 हेलीकॉप्टर से चातेन पहुंची। वहां से वापसी में हेलिकॉप्टर से कुछ सैन्यकर्मियों को वापस लाया गया। 1 जून को भूस्खलन की चपेट में सेना का एक शिविर भी आ गया था, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी और छह लोग लापता हो गए थे। लापता लोगों की तलाश में सेना अभी भी जुटी है।
असम में बाढ़ में सुधार, नदियों का पानी उतरा
असम में बाढ़ की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है और ब्रह्मपुत्र समेत प्रमुख नदियों के जलस्तर में गिरावट देखी जा रही है। हालांकि, अभी भी ब्रह्मपुत्र नदी धुबरी में और कपिली नदी धरमतुल में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। वहीं, बराक नदी का जल स्तर हैलाकांडी के कटाखल और श्रीभूमि जिले के कुशियारा में खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है। राज्य के 18 जिलों में 1,296 गांव और चार लाख से अधिक लोग अभी भी बाढ़ से प्रभावित हैं। 16,558 हेक्टेयर क्षेत्र में खड़ी फसलें बाढ़ की चपेट में हैं। ब्रह्मपुत्र नदी का पानी काजीरंगा नेशनल पार्क के बड़े हिस्से में भर गया है। पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य का 70 प्रतिशत हिस्सा ब्रह्मपुत्र और कोपिली नदियों के पानी से गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है।
राहत शिविरों में 40 हजार से अधिक लोग
असम में 40,313 से अधिक विस्थापित लोग 328 राहत शिविरों में शरण लिए हैं और 1.19 लाख प्रभावित लोगों को बाढ़ग्रस्त जिलों में स्थापित वितरण केंद्रों पर राहत प्रदान की जा रही है। राज्य के विभिन्न भागों में बारिश में भी कमी आई है, लेकिन मौसम विभाग ने 10 जून से भारी बारिश का दौर फिर शुरू होने की संभावना जताई है, जिससे बाढ़ की स्थिति फिर गंभीर हो सकती है। प्रशासन हालात पर नजर रखे हुए और संभावित बाढ़ के प्रभाव को कम करने के लिए तैयारियां की जा रही हैं।
अरुणाचल में भी सुधर रहे हालात
अरुणाचल प्रदेश में भी बाढ़ की स्थिति में सुधार हो रहा है। हालांकि, राज्य के 24 जिलों के 215 गांवों में अभी भी 33,200 लोग बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित हैं। पिछले 24 घंटों में अधिकांश प्रमुख नदियों और उनकी सहायक नदियों के जलस्तर में कमी देखी गई। बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से कुल 515 घरों को नुकसान पहुंचा है, 12 लोगों की जान गई है और 432 मवेशियों की भी मौत हो गई है। राज्य में 112 सड़कें और 17 पुल क्षतिग्रस्त हुए और बाढ़ से 51 जल आपूर्ति परियोजनाएं, 17 बिजली पारेषण लाइनें और आठ पनबिजली परियोजनाएं भी प्रभावित हुईं।
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नौ से 11 जून तक लू चलने का आसार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़/हिसार/नई दिल्ली। पश्चिमी हिमालयी राज्यों में बारिश और बर्फबारी के कारण हरियाणा समेत पश्चिम भारत को भीषण गर्मी से मिली राहत का दौर खत्म हो गया है। रविवार से फिर अधिकतम तापमान में तीन से चार डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि हो सकती है और अधिकांश इलाकों में लू चल सकती है। हरियाणा में अगले आठ से नौ दिन बारिश की कोई संभावना नहीं है। मौसम विभाग ने तीन दिन लू चलने का यलो अलर्ट भी जारी किया है।
मौसम विभाग के मुताबिक, नौ से 11 जून के बीच दक्षिण हरियाणा व दक्षिणी पश्चिमी हरियाणा में तापमान 45 डिग्री से ऊपर दर्ज किया जाएगा। इस समयावधि के दौरान लू चलने की पूरी संभावना है। इसे अलावा उत्तर पश्चिम भारत में भी 4 डिग्री तक तापमान बढ़ सकता है। पश्चिमी राजस्थान में 8-10 जून के बीच, पंजाब, चंडीगढ़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 9-11 जून के दौरान और पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तरी मध्य प्रदेश में 9 और 10 जून को भीषण गर्मी पड़ने के साथ ही लू चल सकती है।
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शनिवार को सबसे गर्म शहर सिरसा रहा। सिरसा में दिन व रात का सभी जिलों के मुकाबले सबसे ज्यादा दर्ज किया गया। सिरसा में अधिकतम तापमान 44 डिग्री व न्यूनतम 28.4 डिग्री रिकॉर्ड हुआ। दिन में औसत अधिकतम तापमान सामान्य से 1.9 डिग्री रहा, जबकि न्यूनतम 1.4 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं, अंबाला में दिन का तापमान 40.3, हिसार में 41.8, रोहतक में 42.9, भिवानी में 40.9, फरीदाबाद में 39.5, जींद में 39.6, करनाल में 37.3, नूंह में 41.1, पंचकूला में 37.2 डिग्री दर्ज किया गया है। मानसून पहुंचने में अभी कम से कम 15 से 18 दिन लगेंगे।
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दूसरी ओर, दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत और पूर्वोत्तर के राज्यों में 10 जून से फिर भारी बारिश में तेजी आने की संभावना है। पिछले दिनों हुई बारिश के बाद पूर्वोत्तर में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई थी, जिसमें मामूली सुधार हुआ है।
भूस्खलन प्रभावित चातेन से 76 सैन्यकर्मी निकाले गए
उत्तर सिक्किम के भूस्खलन प्रभावित चातेन से 76 सैन्यकर्मियों के सेना के तीन एमआई-17 हेलिकॉप्टर से सुरक्षित निकाला गया है। भारी बारिश और भूस्खलन के चलते जगह-जगह सड़कें टूट जाने से ये सैनिक चातेन में फंस गए थे। इन सभी को पाकयोंग के ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट पर लाया गया, जहां से सड़क मार्ग से उन्हें गंगटोक व अन्य स्थानों पर भेजा जाएगा। खराब मौसम और भूस्खलन की वजह से उत्तरी सिक्किम के लाचेन, लाचुंग और चुंगथांग कस्बे सड़क मार्ग से कट गए थे और जगह-जगह 1,600 से अधिक सैलानी फंस गए थे, जिन्हें कई दिनों तक अभियान चलाकर सुरक्षित निकाला गया। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल उत्तरी सिक्किम में अब कोई सैलानी फंसा नहीं है।
1,300 राहत सामग्री पहुंचाई
उत्तरी सिक्किम से सैन्यकर्मियों को निकालने में लगाए गए सेना के हेलिकॉप्टर से वहां ड्यूटी पर तैनात रहने वाले सैन्यकर्मियों और अन्य नागरिकों के लिए 1,300 किलोग्राम राहत सामग्री भी पहुंचाई गई। अधिकारियों ने बताया कि पाकयोंग एयरपोर्ट से खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के पांच अधिकारियों की टीम राहत सामग्री लेकर एमआई-17 हेलीकॉप्टर से चातेन पहुंची। वहां से वापसी में हेलिकॉप्टर से कुछ सैन्यकर्मियों को वापस लाया गया। 1 जून को भूस्खलन की चपेट में सेना का एक शिविर भी आ गया था, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी और छह लोग लापता हो गए थे। लापता लोगों की तलाश में सेना अभी भी जुटी है।
असम में बाढ़ में सुधार, नदियों का पानी उतरा
असम में बाढ़ की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है और ब्रह्मपुत्र समेत प्रमुख नदियों के जलस्तर में गिरावट देखी जा रही है। हालांकि, अभी भी ब्रह्मपुत्र नदी धुबरी में और कपिली नदी धरमतुल में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। वहीं, बराक नदी का जल स्तर हैलाकांडी के कटाखल और श्रीभूमि जिले के कुशियारा में खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है। राज्य के 18 जिलों में 1,296 गांव और चार लाख से अधिक लोग अभी भी बाढ़ से प्रभावित हैं। 16,558 हेक्टेयर क्षेत्र में खड़ी फसलें बाढ़ की चपेट में हैं। ब्रह्मपुत्र नदी का पानी काजीरंगा नेशनल पार्क के बड़े हिस्से में भर गया है। पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य का 70 प्रतिशत हिस्सा ब्रह्मपुत्र और कोपिली नदियों के पानी से गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है।
राहत शिविरों में 40 हजार से अधिक लोग
असम में 40,313 से अधिक विस्थापित लोग 328 राहत शिविरों में शरण लिए हैं और 1.19 लाख प्रभावित लोगों को बाढ़ग्रस्त जिलों में स्थापित वितरण केंद्रों पर राहत प्रदान की जा रही है। राज्य के विभिन्न भागों में बारिश में भी कमी आई है, लेकिन मौसम विभाग ने 10 जून से भारी बारिश का दौर फिर शुरू होने की संभावना जताई है, जिससे बाढ़ की स्थिति फिर गंभीर हो सकती है। प्रशासन हालात पर नजर रखे हुए और संभावित बाढ़ के प्रभाव को कम करने के लिए तैयारियां की जा रही हैं।
अरुणाचल में भी सुधर रहे हालात
अरुणाचल प्रदेश में भी बाढ़ की स्थिति में सुधार हो रहा है। हालांकि, राज्य के 24 जिलों के 215 गांवों में अभी भी 33,200 लोग बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित हैं। पिछले 24 घंटों में अधिकांश प्रमुख नदियों और उनकी सहायक नदियों के जलस्तर में कमी देखी गई। बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से कुल 515 घरों को नुकसान पहुंचा है, 12 लोगों की जान गई है और 432 मवेशियों की भी मौत हो गई है। राज्य में 112 सड़कें और 17 पुल क्षतिग्रस्त हुए और बाढ़ से 51 जल आपूर्ति परियोजनाएं, 17 बिजली पारेषण लाइनें और आठ पनबिजली परियोजनाएं भी प्रभावित हुईं।