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जटिल प्रक्रिया के चलते फसल बेचना मुश्किल : सुरजेवाला
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश में सरकार चोर दरवाजे से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं-सरसों न खरीदने की साजिश कर रही है। फसलों की खरीद प्रक्रिया को इतना जटिल बना दिया है कि किसान के लिए फसल बेचना मुश्किल हो जाए। ट्रैक्टर-ट्रॉली पर नंबर लिखना, मंडी गेट पर फोटो खिंचवाना और पोर्टल पर अपलोड के बाद ही गेटपास मिलने की शर्त लागू की गई है। राज्यसभा सदस्य रणदीप सुरजेवाला ने चंडीगढ़ सेक्टर-9 स्थित कांग्रेस दफ्तर में प्रेसवार्ता के दौरान सरकार पर सवाल उठाए।
सुरजेवाला ने कहा कि जिन किसानों के पास खुद का ट्रैक्टर नहीं है या जो किराये के साधनों से फसल लाते हैं, वे इस प्रक्रिया में फंस जाएंगे। इससे मंडियों में देरी और अतिरिक्त खर्च बढ़ने की आशंका है। ट्रैक्टर-ट्रॉली, समयसीमा और बायोमीट्रिक अड़चन बनेंगे। सुबह 6 बजे से शाम 8 बजे तक ही फसल लाने की पाबंदी भी अव्यवहारिक है। कटाई के समय फसल दिन-रात आती है, ऐसे में मंडियों के बाहर लंबी लाइनें लग सकती हैं। इंटरनेट समस्या और अंगूठे की पहचान में दिक्कत से भी प्रक्रिया रुक सकती है।
भूमिहीन किसानों के लिए यह व्यवस्था और कठिन है क्योंकि जमीन मालिक की मौजूदगी जरूरी हो सकती है। वहीं, मंडी से फसल उठान के लिए तीन अधिकारियों के हस्ताक्षर की शर्त से भी देरी बढ़ेगी और स्टोरेज पर दबाव पड़ेगा।
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चंडीगढ़। प्रदेश में सरकार चोर दरवाजे से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं-सरसों न खरीदने की साजिश कर रही है। फसलों की खरीद प्रक्रिया को इतना जटिल बना दिया है कि किसान के लिए फसल बेचना मुश्किल हो जाए। ट्रैक्टर-ट्रॉली पर नंबर लिखना, मंडी गेट पर फोटो खिंचवाना और पोर्टल पर अपलोड के बाद ही गेटपास मिलने की शर्त लागू की गई है। राज्यसभा सदस्य रणदीप सुरजेवाला ने चंडीगढ़ सेक्टर-9 स्थित कांग्रेस दफ्तर में प्रेसवार्ता के दौरान सरकार पर सवाल उठाए।
सुरजेवाला ने कहा कि जिन किसानों के पास खुद का ट्रैक्टर नहीं है या जो किराये के साधनों से फसल लाते हैं, वे इस प्रक्रिया में फंस जाएंगे। इससे मंडियों में देरी और अतिरिक्त खर्च बढ़ने की आशंका है। ट्रैक्टर-ट्रॉली, समयसीमा और बायोमीट्रिक अड़चन बनेंगे। सुबह 6 बजे से शाम 8 बजे तक ही फसल लाने की पाबंदी भी अव्यवहारिक है। कटाई के समय फसल दिन-रात आती है, ऐसे में मंडियों के बाहर लंबी लाइनें लग सकती हैं। इंटरनेट समस्या और अंगूठे की पहचान में दिक्कत से भी प्रक्रिया रुक सकती है।
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भूमिहीन किसानों के लिए यह व्यवस्था और कठिन है क्योंकि जमीन मालिक की मौजूदगी जरूरी हो सकती है। वहीं, मंडी से फसल उठान के लिए तीन अधिकारियों के हस्ताक्षर की शर्त से भी देरी बढ़ेगी और स्टोरेज पर दबाव पड़ेगा।
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