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Chandigarh-Haryana News: मेडिकल उपकरणों की महंगे दामों पर खरीद, अधिकारियों को क्लीन चिट
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-भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने 9 जिलों में दर्ज की शिकायत, विपक्ष में रहते हुए दुष्यंत ने उठाया था मुद्दा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। स्वास्थ्य विभाग में दवाओं और मेडिकल उपकरणों की ऊंचे दामों पर खरीद के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत जांच पूरी कर ली गई है। हाईकोर्ट को बताया गया कि विजिलेंस को किसी भी सरकारी अधिकारी की इस मामले में कोई भूमिका नहीं मिली है। याची ने इस पर आपत्ति जताई, जिस पर हाईकोर्ट ने कहा कि आप यदि चाहे तो इसे चुनौती दे सकते हैं।
जगविंदर सिंह कुल्हरिया ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया है कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में दवा खरीद के दौरान घोटाला हुआ था। इसकी जानकारी 2018 में आरटीआई से मिली थी। तब दुष्यंत चौटाला ने सीबीआई जांच और कैग से आडिट कराने की मांग की थी। याची का आरोप है कि यह उपकरण और दवाएं बाजार के भाव से कहीं अधिक दाम पर खरीदे गए थे। चौटाला ने तब यह मुद्दा जोर शोर से उठाया था लेकिन उपमुख्यमंत्री बनने के बाद वह भूल गए। याची ने बताया कि हिसार की एक दवा कंपनी जिस पते पर दर्ज है वहां कोई कंपनी नहीं बल्कि धोबी बैठा है। हिसार और फतेहाबाद के सामान्य अस्पतालों में चिकित्सा उपकरणों सप्लाई करने वाली फर्म का मालिक नकली सिक्के बनाने के आरोप में तिहाड़ जेल में था। उसने जेल से ही टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया और स्वास्थ्य विभाग के कर्मी ने उसके झूठे हस्ताक्षर किए। याचिकाकर्ता ने पहले इसी मांग को लेकर हाईकोर्ट में सामान्य याचिका दायर की थी। तब जस्टिस ऋतु बाहरी की खंडपीठ ने इस मामले को गंभीर और व्यापक जनहित का मामला मानते हुए इस याचिका पर सुनवाई का आदेश देते हुए इसे मुख्य न्यायाधीश बेंच के समक्ष भेज दिया था।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। स्वास्थ्य विभाग में दवाओं और मेडिकल उपकरणों की ऊंचे दामों पर खरीद के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत जांच पूरी कर ली गई है। हाईकोर्ट को बताया गया कि विजिलेंस को किसी भी सरकारी अधिकारी की इस मामले में कोई भूमिका नहीं मिली है। याची ने इस पर आपत्ति जताई, जिस पर हाईकोर्ट ने कहा कि आप यदि चाहे तो इसे चुनौती दे सकते हैं।
जगविंदर सिंह कुल्हरिया ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया है कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में दवा खरीद के दौरान घोटाला हुआ था। इसकी जानकारी 2018 में आरटीआई से मिली थी। तब दुष्यंत चौटाला ने सीबीआई जांच और कैग से आडिट कराने की मांग की थी। याची का आरोप है कि यह उपकरण और दवाएं बाजार के भाव से कहीं अधिक दाम पर खरीदे गए थे। चौटाला ने तब यह मुद्दा जोर शोर से उठाया था लेकिन उपमुख्यमंत्री बनने के बाद वह भूल गए। याची ने बताया कि हिसार की एक दवा कंपनी जिस पते पर दर्ज है वहां कोई कंपनी नहीं बल्कि धोबी बैठा है। हिसार और फतेहाबाद के सामान्य अस्पतालों में चिकित्सा उपकरणों सप्लाई करने वाली फर्म का मालिक नकली सिक्के बनाने के आरोप में तिहाड़ जेल में था। उसने जेल से ही टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया और स्वास्थ्य विभाग के कर्मी ने उसके झूठे हस्ताक्षर किए। याचिकाकर्ता ने पहले इसी मांग को लेकर हाईकोर्ट में सामान्य याचिका दायर की थी। तब जस्टिस ऋतु बाहरी की खंडपीठ ने इस मामले को गंभीर और व्यापक जनहित का मामला मानते हुए इस याचिका पर सुनवाई का आदेश देते हुए इसे मुख्य न्यायाधीश बेंच के समक्ष भेज दिया था।
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