कांग्रेस के विधायक दल के नेता पर पेंच फंसा: हाईकमान पर छोड़ा है फैसला; चार केंद्रीय पर्यवेक्षकों ने ली है राय
विधायक दल का नेता चुनने को लेकर हरियाणा कांग्रेस की 18 अक्तूबर को चंडीगढ़ स्थित कांग्रेस मुख्यालय में बैठक हुई थी। अब फैसला हाईकमान पर छोड़ दिया गया था। लेकिन बैठक हुए सप्ताह बीत चुका है और अभी तक कांग्रेस इसको लेकर कोई फैसला नहीं कर पाई है।
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हरियाणा विधानसभा का सत्र शुक्रवार को है, लेकिन सप्ताह बाद भी कांग्रेस हाईकमान हरियाणा कांग्रेस के विधायक दल के नेता का चुनाव नहीं कर पाया है। हालांकि, विधायकों की संख्या की बात करें तो पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा खेमा भारी है, लेकिन विधानसभा चुनाव में हार के चलते कांग्रेस हाईकमान नाराज है और बदलाव के मूड में है। पिछली बार खुद हुड्डा विधायक दल के नेता थे। इस बार भी हुड्डा, गीता भुक्कल के साथ-साथ अशोक अरोड़ा का नाम चल रहा है। कांग्रेस में जो भी नेता विधायक दल का नेता चुना जाएगा, वह सदन में नेता प्रतिपक्ष होगा, क्योंकि भाजपा के बाद सबसे अधिक सीटें कांग्रेस के पास हैं।
विधायक दल का नेता चुनने को लेकर हरियाणा कांग्रेस की 18 अक्तूबर को चंडीगढ़ स्थित कांग्रेस मुख्यालय में बैठक हुई थी। इसमें केंद्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर अशोक गहलोत, अजय माकन, प्रताप सिंह बाजपा और टीएस सिंहदेव पहुंचे थे। पर्यवेक्षकों ने एक-एक विधायक से विधायक दल के नेता के चुनाव को लेकर राय मांगी थी। बाद में किसी नेता का नाम तय नहीं होने के चलते विधायक दल की बैठक में एक लाइन का प्रस्ताव पारित किया गया था और फैसला हाईकमान पर छोड़ दिया गया था। लेकिन बैठक हुए सप्ताह बीत चुका है और अभी तक कांग्रेस इसको लेकर कोई फैसला नहीं कर पाई है।
अधिकतर विधायक हुड्डा के पक्ष में
अगर विधायकों की संख्या के हिसाब से बात करें तो हुड्डा का विधायक दल का नेता बनना तय है। कुल 37 विधायकों में से 33 विधायक हुड्डा के समर्थक हैं। पर्यवेक्षकों के सामने भी 33 विधायकों ने हुड्डा का नाम रखा था। अगर संख्या बल के हिसाब से फैसला हुआ तो हुड्डा या इनके समर्थक को नेता चुना जाएगा। अगर, कुमारी सैलजा गुट की चली तो नए चेहरे को मौका मिल सकता है। सैलजा की ओर से चंद्रमोहन बिश्नोई का नाम आगे बढ़ाया जा रहा है। हुड्डा गुट की रणनीति है कि अगर हाईकमान हुड्डा के नाम पर सहमत नहीं हुई तो गीता भुक्कल का नाम आगे बढ़ाया जा सकता है।