फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Online transfer of constable and head constable started, asking for caste also.

Chandigarh-Haryana News: कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल के ऑनलाइन तबादले शुरू, जाति भी पूछ रहे

विज्ञापन
यह अभियान 28 अगस्त 2025 से 25 सितंबर 2025 तक चलेगा
विज्ञापन

चंडीगढ़। हरियाणा पुलिस विभाग में वीरवार से कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल के लिए ऑनलाइन तबादले शुरू हो गए। लेकिन तबादले के इच्छुक जवानों के फॉर्म में जाति भरने का कॉलम भी दिया गया है। यह अभियान 28 अगस्त से 25 सितंबर तक चलेगा।
ऑनलाइन तबादला अभियान के लिए पुलिस महानिदेशक, हरियाणा की ओर से जारी आदेश के अनुसार सभी जिला पुलिस अधीक्षक और पुलिस आयुक्तों को निर्देश दिए गए है कि इच्छुक कर्मियों को समय पर सूचना दें। इच्छुक उम्मीदवार पुलिस विभाग की ऑनलाइन साइट पर जाकर अपने मोबाइल नंबर और वन टाइम पासवर्ड से लॉग इन कर आवेदन कर सकते हैं।
विज्ञापन


आवेदन फॉर्म में आवेदक को यूनिट, यूनिक आईडी, नाम, बेल्ट नंबर, जन्म तिथि, पोस्टिंग तिथि, जाति सहित अधिकतम 10 जिलों की पसंद दर्ज करनी होगी। सभी विकल्प भरना अनिवार्य नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन



तबादला अभियान में इस विंग के जवान नहीं शामिल
जारी पत्र के अनुसार जो पुलिसकर्मी स्टेट क्राइम ब्रांच, सीआईडी, एंटी करप्शन ब्यूरो, हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, हरियाणा राज्य प्रवर्तन ब्यूरो और पुलिस हेडक्वॉर्टर में प्रतिनियुक्ति या अस्थायी ड्यूटी पर हैं वे इस ऑनलाइन तबादला प्रक्रिया में शामिल नहीं होंगे। हालांकि, प्रशिक्षण संस्थानों में तैनात कर्मी इसमें भाग ले सकते हैं। आवेदन भरने के बाद साइक्लिक रिडंडेंसी चेक (सीआरसी) लॉग इन से जानकारी सत्यापित की जाएगी। गलत जानकारी मिलने पर संशोधन कर दोबारा से आवेदन करना होगा।



संत कबीर ने कहा था जाति न पूछो साधु की,
लेकिन भाजपा कह रही है जाति पूछो सिपाही की: दीपेंद्र हुड्डा
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने तबादला अभियान में जाति पूछना शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि संत कबीर ने कहा था जाति न पूछो साधु की, लेकिन भाजपा कह रही है जाति पूछो सिपाही की। हुड्डा ने सरकार के इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि किसी भी अधिकारी की कोई जाति या धर्म नहीं होता बल्कि इंसानियत और जनसेवा ही हर अधिकारी, कर्मचारी का धर्म होता है। यह डीजीपी के स्तर पर हुआ है तो उन्हें इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से त्यागपत्र देना चाहिए और अगर सत्ता शीर्ष से हुआ है तो मुख्यमंत्री इसका जवाब दें। इस प्रकार के विभाजनकारी फैसले को लागू नहीं होने देंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed