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Chandigarh-Haryana News: अब किसान ई-नीलामी से बेच सकेंगे अपने पेड़
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- एचएफडीसी ने लिया बड़ा फैसला... अब बिचौलियों से मिलेगा छुटकारा, सीधे मिल सकेगी बेहतर कीमत
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश में किसान अब अपने खेतों में खड़े एग्रोफॉरेस्ट्री पेड़ जैसे यूकेलिप्टस और पॉपुलर को हरियाणा फॉरेस्ट डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एचएफडीसी) के ई-नीलामी पोर्टल के जरिए बेच सकेंगे। एचएफडीसी की 146वीं बोर्ड बैठक की अध्यक्षता करते हुए चेयरमैन एंव अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल ने यह जानकारी दी। इस नई व्यवस्था से किसानों को बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और उन्हें अपने पेड़ों का बेहतर दाम मिल सकेगा।
सरकार ने इस पहल से पारदर्शिता बढ़ने और ज्यादा खरीदार मिलने से किसानों की आय में करीब 25 फीसदी तक वृद्धि की उम्मीद जताई है। प्रस्ताव के अनुसार इच्छुक किसान संबंधित जनरल मैनेजर को आवेदन देंगे। इसके बाद एचएफडीसी की टीम खेतों में जाकर पेड़ों का आकलन और मार्किंग करेगी और वॉल्यूम के आधार पर रिजर्व प्राइस तय किया जाएगा। किसान चाहें तो न्यूनतम मूल्य खुद भी तय कर सकते हैं। इसके बाद पेड़ों को ई-नीलामी पोर्टल पर डाल दिया जाएगा। बोली लगने के बाद किसान को जानकारी दी जाएगी और सहमति मिलने पर सौदा पक्का होगा। एचएफडीसी कुल राशि का केवल 5 फीसदी सेवा शुल्क लेकर बाकी पैसा सीधे किसान के खाते में ट्रांसफर करेगा। संस्थानों के लिए यह शुल्क 10 फीसदी रखा गया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश में किसान अब अपने खेतों में खड़े एग्रोफॉरेस्ट्री पेड़ जैसे यूकेलिप्टस और पॉपुलर को हरियाणा फॉरेस्ट डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एचएफडीसी) के ई-नीलामी पोर्टल के जरिए बेच सकेंगे। एचएफडीसी की 146वीं बोर्ड बैठक की अध्यक्षता करते हुए चेयरमैन एंव अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल ने यह जानकारी दी। इस नई व्यवस्था से किसानों को बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और उन्हें अपने पेड़ों का बेहतर दाम मिल सकेगा।
सरकार ने इस पहल से पारदर्शिता बढ़ने और ज्यादा खरीदार मिलने से किसानों की आय में करीब 25 फीसदी तक वृद्धि की उम्मीद जताई है। प्रस्ताव के अनुसार इच्छुक किसान संबंधित जनरल मैनेजर को आवेदन देंगे। इसके बाद एचएफडीसी की टीम खेतों में जाकर पेड़ों का आकलन और मार्किंग करेगी और वॉल्यूम के आधार पर रिजर्व प्राइस तय किया जाएगा। किसान चाहें तो न्यूनतम मूल्य खुद भी तय कर सकते हैं। इसके बाद पेड़ों को ई-नीलामी पोर्टल पर डाल दिया जाएगा। बोली लगने के बाद किसान को जानकारी दी जाएगी और सहमति मिलने पर सौदा पक्का होगा। एचएफडीसी कुल राशि का केवल 5 फीसदी सेवा शुल्क लेकर बाकी पैसा सीधे किसान के खाते में ट्रांसफर करेगा। संस्थानों के लिए यह शुल्क 10 फीसदी रखा गया है।
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