फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   No further action will be taken against Khemka-Verma, government did not approve the investigation.

Chandigarh-Haryana News: खेमका-वर्मा के खिलाफ आगे नहीं बढ़ेगी कार्रवाई, सरकार ने जांच को नहीं दी मंजूरी

विज्ञापन
हरियाणा सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए की नहीं दी स्वीकृति
विज्ञापन


साल 2022 में दोनों ने एक दूसरे के खिलाफ दर्ज करवाई थी एफआईआर
चंडीगढ़। रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अशोक खेमका और आईएएस संजीव वर्मा के बीच तीन साल से चला आ रहा विवाद थम गया है। हरियाणा सरकार ने अशोक खेमका और संजीव वर्मा दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत जांच की अनुमति देने से इंकार कर दिया है। अब दोनों के खिलाफ कोई भी पुलिस कार्रवाई आगे नहीं बढ़ेगी। पीसी एक्ट की धारा 17ए के मुताबिक कोई भी पुलिस अधिकारी किसी अधिकारी के कथित अपराध की जांच या उससे पूछताछ सरकार से पूर्व अनुमति लिए बिना नहीं करेगा। हालांकि एफआईआर रद्द करने के लिए खेमका व वर्मा अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। खेमका इसी हफ्ते 30 अप्रैल को ही रिटायर हुए थे।
दोनों ने एक दूसरे के खिलाफ वर्ष 2022 में एफआईआर दर्ज करवाईं थीं। उस दौरान संजीव वर्मा हरियाणा स्टेट वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन (एचएसडब्ल्यूसी) के एमडी थे। उन्होंने अपने विभाग की जांच में पाया कि 2009 में की गईं कुछ नियुक्तियों में भ्रष्टाचार हुआ है। नियुक्तियां अवैध थीं। नियुक्तियां के समय अशोक खेमका एचएसडब्ल्यूसी में तैनात थे। वर्मा ने इस मामले की शिकायत मुख्य सचिव से की और खेमका के खिलाफ 26 अप्रैल को पंचकूला के सेक्टर 5 पुलिस स्टेशन में विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज करवाईं। उसी दिन अशोक खेमका ने दस्तावेजों के साथ कथित छेड़छाड़ के आरोप में संजीव वर्मा के खिलाफ सेक्टर पांच थाने में एफआईआर दर्ज करवाई। वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण की धारा 13 भी जोड़ दी गई।
विज्ञापन


खेमका ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

खेमका ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर के मामले में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कहा कि पीसी एक्ट की धारा 17ए के तहत मंजूरी नहीं ली गई है। इस पर अदालत ने कहा कि यदि इस मामले में कोई भी कार्रवाई होती है तो खेमका को दस दिन पहले नोटिस दिया जाए। इसके साथ ही अदालत ने मामले का निपटारा कर दिया। हालांकि इस मामले की जांच लंबित थी। हाल ही में उन्होंने हरियाणा मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


वर्मा ने मानवाधिकार आयोग की ली शरण

वर्मा ने आयोग को बताया कि तत्कालीन गृहमंत्री अनिल विज ने पक्षपातपूर्ण तरीके से काम किया था और खेमका के खिलाफ एफआईआर संख्या 170 में पीसी एक्ट की धारा 17ए के तहत अनुमति देने से इंकार करने की सिफारिश की जबकि उनके खिलाफ 171 में मंजूरी देने की सिफारिश की थी। हालांकि गृहमंत्री ने अपने नोट में यह खुलासा नहीं किया कि वे कैसे इस निष्कर्ष पर पहुंचे। उन्होंने कहा यदि पुलिस को इसमें कोई तथ्य नहीं लगते हैं तो एफआईआर दर्ज की जाए। आयोग ने 22 अप्रैल को टिप्पणी करते हुए कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि न्याय में देरी से निश्चित रूप से किसी व्यक्ति के बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन होता है। आयोग ने इस मामले में हरियाणा के पुलिस महानिदेशक से एक रिपोर्ट भी मांगी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed