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हरियाणा का हाल: नया सत्र दो हफ्ते पहले शुरू, बच्चों को अब भी किताबों का इंतजार; सीएम के आदेश भी हवा

Wed, 16 Apr 2025 10:19 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, करनाल/रोहतक/हिसार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, करनाल/रोहतक/हिसार Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 16 Apr 2025 10:19 AM IST
सार

सरकारी स्कूलों में बच्चों को दी जाने वाली इन किताबों की अनुपलब्धता से अभिभावक चिंतित हैं।  रोहतक में अभिभावक संघ के प्रधान यशवंत मलिक ने कहा कि सत्र के 15 दिन गुजर चुके हैं। किताबें नहीं आने से बच्चों की पढ़ाई पर प्रभाव पड़ रहा है।

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New session started two weeks ago in haryana children still waiting for books
books - फोटो : adobe stock

विस्तार

हरियाणा के स्कूलों में नया सत्र शुरू हुए दो सप्ताह हो चुके हैं लेकिन अभी तक कई जिलों में पहली से आठवीं कक्षा तक के अनेक विद्यार्थियों को किताबें नहीं मिल पाई। 

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मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पाठ्यपुस्तकों की अनुपलब्धता पर गंभीरता दिखाते हुए 15 अप्रैल तक सभी स्कूलों में किताबें पहुंचाने के शिक्षा विभाग को सख्त निर्देश दिए थे। इसके बावजूद छह जिले अब भी ऐसे हैं जहां किसी भी कक्षा की पुस्तकें नहीं पहुंची हैं। 11 जिलों में कुछ कक्षाओं व विषयों की ही किताबें पहुंची हैं। 

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अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया सच

अमर उजाला की ओर से करवाई गई पड़ताल में पाया गया कि रेवाड़ी, रोहतक, महेंद्रगढ़, झज्जर, अंबाला और यमुनानगर में एक भी कक्षा की किताब नहीं आई। करनाल, कैथल, पानीपत, हिसार, कुरुक्षेत्र, जींद, भिवानी चरखीदादरी, सिरसा, फतेहाबाद और सोनीपत जिले में आधी-अधूरी पहुंची हैं। कहीं स्कूलों में पहली से तीसरी तक की किताबें पहुंची तो कहीं आधे विषयों की ही। मजबूरी में अध्यापक पुरानी किताबों या बिना किताबों के ही पढ़ाने के लिए मजबूर हैं। 

यह भी पढ़ें: हरियाणा में गिरता लिंगानुपात: सैनी सरकार का सख्त एक्शन, तीन जिलों में 18 आईवीएफ सेंटर होंगे बंद

किसी को नहीं पता, कब आएंगी किताबें

किताबें कब तक स्कूलों में आएंगी, इसकी जानकारी स्कूल के प्रधानाचार्यों  तक को नहीं है। अधिकतर जिलों में शिक्षा अधिकारियों को भी इसकी जानकारी नहीं। कुछ का कहना है कि बुधवार को पहुंच जाएंगी जबकि कुछ जल्द आने का दावा करते हैं। कुछ ने यह भी कहा कि मंगलवार रात तक ही पहुंच रही हैं।

जिलों का हाल

अंबाला व यमुनानगर : निदेशालय के सबसे करीब पर किताब एक भी नहीं भेजी
पंचकूला में स्थित शिक्षा निदेशालय के सबसे नजदीकी जिले अंबाला व यमुनानगर का हाल ही सबसे खराब है। यहां मंगलवार को भी किसी भी स्कूल में एक भी किताब नहीं आई। अध्यापक पुरानी किताबों से पढ़ाई करवाने को मजबूर हैं। अंबाला के जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सुधीर कालड़ा को भी स्पष्ट जानकारी नहीं है कि कब तक किताबें आएंगी। उनका कहना है कि बुधवार शाम सात बजे तक किताबें पहुंच सकती हैं। वहीं, यमुनानगर के मौलिक शिक्षा अधिकारी धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि किताबों की आपूर्ति शुरू हो गई है। एक-दो दिन में पहुंच जाएंगी। किताबें नहीं मिलने के कारण यमुनानगर के 55 हजार विद्यार्थी प्रभावित हैं। 

रोहतक, महेंद्रगढ़ और झज्जरः यहां भी एक भी कक्षा की पुस्तक नहीं भेजी गई।

पानीपत, भिवानी व कुरुक्षेत्र : स्थिति कुछ बेहतर
भिवानी, पानीपत व कुरुक्षेत्र की स्थिति कई जिलों के मुकाबले बेहतर है। भिवानी में केवल छठी कक्षा की किताबें बाकी हैं। पानीपत में पांचवीं तक व कुरुक्षेत्र में कक्षा एक से पांंच और आठवीं तक किताबें मिली हैं। कुरुक्षेत्र के जिला शिक्षा अधिकारी विनोद ने बताया कि आपूर्ति शुरू हो चुकी है, जल्द विद्यार्थियों को पुस्तकें वितरित कर दी जाएंगी। पानीपत के अधिकारी भी बुधवार तक आने की संभावना जता रहे हैं।

करनाल: दो कक्षाओं की ही आईं
करनाल में तीसरी से पांचवीं तक की पुस्तकें आनी शुरू हो गई हैं। छठी से आठवीं तक की तो एक भी पुस्तक नहीं आई। यहां भी जिला शिक्षा अधिकारी रोहताश वर्मा को स्पष्ट जानकारी नहीं कि पुस्तकें कब आएंगी। कहते हैं-पुस्तकें शीघ्र पहुंच जाएंगी।

कैथल : केवल तीन कक्षाओं की किताबें भेजीं
पहली से तीसरी कक्षा तक की किताबें पहुंच चुकी है। चौथी से आठवीं तक की बाकी हैं। पुरानी किताबों से ही पढ़ाई कराई जा रही है। इस पर कार्यवाहक जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी रामदिया गागट का कहना है कि 30 हजार से अधिक पुस्तकों की मांग की गई है। एक से दो दिन में पहुंच सकती है।

सोनीपत व रेवाड़ी : आज से बंटेंगी किताबें
सोनीपत के मुरथल अड्डा स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में शाम पौने चार बजे पुस्तकें पहुंचीं। यहां सभी कक्षाओं की किताबें आना का दावा है। बुधवार से इनको बांटा जाएगी। वहीं, रेवाड़ी में  जिला मुख्यालय पर पुस्तकों की सप्लाई का दावा किया जा रहा है। जिला एफएलएन समन्वयक चरण सिंह ने बताया कि 15 अप्रैल तक पुस्तकें पहुंचाने की योजना थी।

जींद: पांचवीं और आठवीं की किताबें आना बाकी
जींद में पांचवीं और आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए किताबें आना बाकी हैं, जबकि अन्य कक्षा के विद्यार्थियों के लिए किताबें पहुंच गई हैं।

हिसार: केवल दो कक्षाओं की सभी किताबें आईं, बाकी की आधी-अधूरी 
जिले के प्राइमरी स्कूलों में पहली व दूसरी कक्षा की पुस्तकें पहुंच चुकी है। 3, 4, 5 व 6 कक्षा की 50 फीसदी विषयों की पुस्तकें ही आई हैं। कक्षा 7 व 8वीं की पाठ्यक्रम से संबंधित एक भी पुस्तक नहीं आई।

चरखी दादरी : केवल बाढड़ा में पहुंचीं, बाकी जगह का पता नहीं
कार्यकारी डीईओ वीरेंद्र नारा ने बताया कि बाढड़ा खंड के 88 विद्यालयों में किताबें पहुंच चुकी हैं। बुधवार से दादरी खंड में किताबें पहुंचाने का काम शुरू होगा। पाठ्यक्रम बदलने के कारण किताबें पहुंचने में देरी हुई है। विभाग ने पुरानी किताबों से पढ़ाई जारी रखी है।

सिरसा में चाैथी व फतेहाबाद में पांचवीं तक, महीने के अंत तक आएंगी
सिरसा के एपीसी बलबीर ने बताया कि पहले से चौथी कक्षा तक की किताबें आ गई हैं। कुछ किताबें आठवीं कक्षा की आई हैं। अप्रैल माह के अंत तक किताबें आने की उम्मीद है। वहीं, फतेहाबाद में छठी से आठवीं तक की किताबें नहीं आई हैं।
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