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सरकार की तानाशाही के विरोध में 2 को राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन : ऋषि नैन
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-विजेंद्र धारीवाल पर एफआईआर से कर्मचारियों में उबाल
चंडीगढ़। पुरानी पेंशन बहाली (ओपीएस) की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बाद एनएमओपीएस के राष्ट्रीय मुख्य संगठन सचिव और पेंशन बहाली संघर्ष समिति हरियाणा के अध्यक्ष विजेंद्र धारीवाल पर दर्ज एफआईआर ने देशभर के कर्मचारियों में भारी रोष पैदा कर दिया है। संघर्ष समिति के प्रदेश महासचिव ने बताया कि प्रदर्शन की अनुमति विधिवत ली गई थी और निर्धारित समय में शांतिपूर्वक समाप्त भी हो गया था। इसके बावजूद अधिक संख्या का हवाला देकर एफआईआर दर्ज की गई जो कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। इसी के विरोध में 2 दिसंबर को हरियाणा सहित देश के सभी जिलों में राष्ट्रव्यापी रोष प्रदर्शन किए जाएंगे। ऋषि नैन ने चेतावनी देते हुए कहा कि कर्मचारी किसी भी दबाव या तानाशाही से डरने वाले नहीं हैं। पहले भी सरकार द्वारा वाटर कैनन, लाठीचार्ज और आंसूगैस का इस्तेमाल कर आंदोलन दबाने की कोशिश की जा चुकी है, लेकिन कर्मचारी पीछे हटने वाले नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार एफआईआर और दमनात्मक कार्रवाइयों के बजाय संघर्ष समिति से वार्ता शुरू करे और पूर्व में गठित कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ओपीएस बहाली का रास्ता निकाले। ब्यूरो
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चंडीगढ़। पुरानी पेंशन बहाली (ओपीएस) की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बाद एनएमओपीएस के राष्ट्रीय मुख्य संगठन सचिव और पेंशन बहाली संघर्ष समिति हरियाणा के अध्यक्ष विजेंद्र धारीवाल पर दर्ज एफआईआर ने देशभर के कर्मचारियों में भारी रोष पैदा कर दिया है। संघर्ष समिति के प्रदेश महासचिव ने बताया कि प्रदर्शन की अनुमति विधिवत ली गई थी और निर्धारित समय में शांतिपूर्वक समाप्त भी हो गया था। इसके बावजूद अधिक संख्या का हवाला देकर एफआईआर दर्ज की गई जो कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। इसी के विरोध में 2 दिसंबर को हरियाणा सहित देश के सभी जिलों में राष्ट्रव्यापी रोष प्रदर्शन किए जाएंगे। ऋषि नैन ने चेतावनी देते हुए कहा कि कर्मचारी किसी भी दबाव या तानाशाही से डरने वाले नहीं हैं। पहले भी सरकार द्वारा वाटर कैनन, लाठीचार्ज और आंसूगैस का इस्तेमाल कर आंदोलन दबाने की कोशिश की जा चुकी है, लेकिन कर्मचारी पीछे हटने वाले नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार एफआईआर और दमनात्मक कार्रवाइयों के बजाय संघर्ष समिति से वार्ता शुरू करे और पूर्व में गठित कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ओपीएस बहाली का रास्ता निकाले। ब्यूरो