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Chandigarh-Haryana News: वैवाहिक विवाद हो सकता है फंसाने का कारण, पॉक्सो मामले में आरोपी बरी
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-आरोपी को बरी करने के फैसले के खिलाफ राज्य की अपील खारिज
-फरीदाबाद की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी को किया था बरी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के गंभीर आरोपों से बरी किए गए एक आरोपी के खिलाफ हरियाणा सरकार को अपील दाखिल करने की अनुमति देने से इन्कार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि बच्ची की गवाही में विरोधाभास और गंभीर वैवाहिक विवाद की पृष्ठभूमि में झूठे आरोप की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।
फरीदाबाद की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 30 अगस्त 2019 को आरोपी को बरी कर दिया था। अभियोजन के अनुसार आरोपी ने अपनी 8 वर्षीय भतीजी के साथ यौन शोषण किया। ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में पीड़िता के बयानों में भारी अंतर, चिकित्सकीय प्रमाणों की कमी और परिवार में लंबे समय से चल रहे वैवाहिक कलह को ध्यान में रखते हुए आरोपी को संदेह का लाभ दिया था। हाईकोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 378(3) के तहत राज्य की अपील याचिका खारिज करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट ने सबूतों का उचित और कानूनी आकलन किया है।
कोर्ट ने बच्ची द्वारा तीन बयानों जो कानूनी सहायता अधिवक्ता के समक्ष, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सामने और धारा 164 के बयान— का विश्लेषण किया। सभी बयानों में घटना का स्थान, समय और परिस्थितियां अलग-अलग थीं। कोर्ट ने कहा कि हर बयान में घटनाक्रम, रोशनी की स्थिति, बच्चे को दबोचने की बात और घर में कौन मौजूद था इन सबमें विरोधाभास है। इससे गवाही की विश्वसनीयता पर गंभीर संदेह उत्पन्न होता है। एम्स द्वारा की गई चिकित्सकीय जांच में केवल झिल्ली फटी हुई पाई गई थी लेकिन किसी चोट, सूजन या ताज़ा चोट के संकेत नहीं मिले कोर्ट ने माना यह दुष्कर्म का प्रमाण नहीं है। कोर्ट ने पाया कि बच्चे की मां और पिता के बीच विवाद चल रहा था और बच्ची की कस्टडी पिता से मांग के पास बदलने के तुरंत एफआईआर दर्ज हुई। बच्ची को मां के पास लाने के एक हफ्ते बाद मामला दर्ज किया गया जिसे कोर्ट ने संदेहास्पद बताया। मां द्वारा पांच वर्षों तक बच्ची को ससुराल में छोड़कर अचानक शिकायत करना यह संकेत देता है कि मामला वैवाहिक दुश्मनी से प्रेरित हो सकता है।
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-फरीदाबाद की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी को किया था बरी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के गंभीर आरोपों से बरी किए गए एक आरोपी के खिलाफ हरियाणा सरकार को अपील दाखिल करने की अनुमति देने से इन्कार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि बच्ची की गवाही में विरोधाभास और गंभीर वैवाहिक विवाद की पृष्ठभूमि में झूठे आरोप की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।
फरीदाबाद की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 30 अगस्त 2019 को आरोपी को बरी कर दिया था। अभियोजन के अनुसार आरोपी ने अपनी 8 वर्षीय भतीजी के साथ यौन शोषण किया। ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में पीड़िता के बयानों में भारी अंतर, चिकित्सकीय प्रमाणों की कमी और परिवार में लंबे समय से चल रहे वैवाहिक कलह को ध्यान में रखते हुए आरोपी को संदेह का लाभ दिया था। हाईकोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 378(3) के तहत राज्य की अपील याचिका खारिज करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट ने सबूतों का उचित और कानूनी आकलन किया है।
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कोर्ट ने बच्ची द्वारा तीन बयानों जो कानूनी सहायता अधिवक्ता के समक्ष, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सामने और धारा 164 के बयान— का विश्लेषण किया। सभी बयानों में घटना का स्थान, समय और परिस्थितियां अलग-अलग थीं। कोर्ट ने कहा कि हर बयान में घटनाक्रम, रोशनी की स्थिति, बच्चे को दबोचने की बात और घर में कौन मौजूद था इन सबमें विरोधाभास है। इससे गवाही की विश्वसनीयता पर गंभीर संदेह उत्पन्न होता है। एम्स द्वारा की गई चिकित्सकीय जांच में केवल झिल्ली फटी हुई पाई गई थी लेकिन किसी चोट, सूजन या ताज़ा चोट के संकेत नहीं मिले कोर्ट ने माना यह दुष्कर्म का प्रमाण नहीं है। कोर्ट ने पाया कि बच्चे की मां और पिता के बीच विवाद चल रहा था और बच्ची की कस्टडी पिता से मांग के पास बदलने के तुरंत एफआईआर दर्ज हुई। बच्ची को मां के पास लाने के एक हफ्ते बाद मामला दर्ज किया गया जिसे कोर्ट ने संदेहास्पद बताया। मां द्वारा पांच वर्षों तक बच्ची को ससुराल में छोड़कर अचानक शिकायत करना यह संकेत देता है कि मामला वैवाहिक दुश्मनी से प्रेरित हो सकता है।
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