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Chandigarh-Haryana News: ऑनलाइन आरटीआई आवेदन की अनदेखी सूचना देने से इन्कार मानी जाएगी
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- राज्य सूचना आयोग ने विभागों को दी चेतावनी, निगरानी तंत्र मजबूत करने के निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने ऑनलाइन आरटीआई आवेदनों की अनदेखी को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि किसी आवेदन को लंबे समय तक बिना कार्रवाई के छोड़ना सूचना के अधिकार का उल्लंघन है। आयोग ने चेतावनी दी है कि भविष्य में ऐसे मामलों को डीम्ड रिफ्यूजल यानी सूचना देने से इन्कार माना जाएगा।
यह टिप्पणी उस मामले की सुनवाई के दौरान की गई जिसमें एक आवेदक को मांगी गई सूचना करीब छह महीने की देरी से उपलब्ध कराई गई। सुनवाई में विभागीय अधिकारी ने कहा कि आवेदन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दाखिल हुआ था लेकिन संबंधित कार्यालय तक इसकी जानकारी नहीं पहुंची। आयोग ने इस दलील को गंभीर प्रशासनिक कमी माना और कहा कि आरटीआई अधिनियम के तहत सामान्य मामलों में 30 दिन और जीवन एवं स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में 48 घंटे के भीतर सूचना उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
सूचना आयुक्त डॉ. अजय सूरा ने कहा कि उनके सामने लगातार ऐसे मामले आ रहे हैं जिनमें विभाग ऑनलाइन दाखिल आरटीआई आवेदनों पर कार्रवाई नहीं करते और अधिकारियों को आवेदन की जानकारी तब मिलती है जब दूसरी अपील पर आयोग का नोटिस पहुंचता है। राज्य सरकार ने जनवरी 2022 में ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल शुरू किया था।
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संबंधित मामले में आवेदक को सूचना मिल चुकी थी इसलिए आयोग ने दंडात्मक कार्रवाई नहीं की। फिर भी संबंधित लोक सूचना अधिकारी को भविष्य के लिए चेतावनी दी गई। साथ ही मुख्य सचिव को आदेश की प्रति भेजकर सभी विभागों के एसपीआईओ को ऑनलाइन आवेदनों की नियमित निगरानी और समयबद्ध निपटान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने ऑनलाइन आरटीआई आवेदनों की अनदेखी को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि किसी आवेदन को लंबे समय तक बिना कार्रवाई के छोड़ना सूचना के अधिकार का उल्लंघन है। आयोग ने चेतावनी दी है कि भविष्य में ऐसे मामलों को डीम्ड रिफ्यूजल यानी सूचना देने से इन्कार माना जाएगा।
यह टिप्पणी उस मामले की सुनवाई के दौरान की गई जिसमें एक आवेदक को मांगी गई सूचना करीब छह महीने की देरी से उपलब्ध कराई गई। सुनवाई में विभागीय अधिकारी ने कहा कि आवेदन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दाखिल हुआ था लेकिन संबंधित कार्यालय तक इसकी जानकारी नहीं पहुंची। आयोग ने इस दलील को गंभीर प्रशासनिक कमी माना और कहा कि आरटीआई अधिनियम के तहत सामान्य मामलों में 30 दिन और जीवन एवं स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में 48 घंटे के भीतर सूचना उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
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सूचना आयुक्त डॉ. अजय सूरा ने कहा कि उनके सामने लगातार ऐसे मामले आ रहे हैं जिनमें विभाग ऑनलाइन दाखिल आरटीआई आवेदनों पर कार्रवाई नहीं करते और अधिकारियों को आवेदन की जानकारी तब मिलती है जब दूसरी अपील पर आयोग का नोटिस पहुंचता है। राज्य सरकार ने जनवरी 2022 में ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल शुरू किया था।
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संबंधित मामले में आवेदक को सूचना मिल चुकी थी इसलिए आयोग ने दंडात्मक कार्रवाई नहीं की। फिर भी संबंधित लोक सूचना अधिकारी को भविष्य के लिए चेतावनी दी गई। साथ ही मुख्य सचिव को आदेश की प्रति भेजकर सभी विभागों के एसपीआईओ को ऑनलाइन आवेदनों की नियमित निगरानी और समयबद्ध निपटान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।