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Chandigarh-Haryana News: सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी पर हाईकोर्ट सख्त, हरियाणा सरकार से मांगा जवाब
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-आरटीई कानून के प्रावधानों को लागू करने को लेकर जिला-वार ब्योरा किया तलब
-शिक्षकों की कमी को लेकर लिए गए संज्ञान मामले में हाईकोर्ट ने मांगी है जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के प्रावधानों के पालन को लेकर हरियाणा सरकार को जिला-वार सरकारी स्कूलों की जानकारी अतिरिक्त हलफनामे के माध्यम से दाखिल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने अखबार में प्रकाशित खबर का संज्ञान लिया था जिसके अनुसार प्रदेश में शिक्षकों की कमी है और कहीं-कहीं एक शिक्षक को सैकड़ों विद्यार्थियों को संभालना पड़ रहा है।
18 नवंबर 2025 को दाखिल हलफनामे में राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्कूल शिक्षा) विनीत गर्ग ने बताया था कि फरीदाबाद, नूंह और पलवल को छोड़कर राज्य के अन्य सभी जिले निर्धारित छात्र-शिक्षक अनुपात का पालन कर रहे हैं। हालांकि, खंडपीठ ने पाया कि हलफनामे में दिए गए आंकड़े आरटीई अधिनियम की अनुसूची में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक (मिडिल) स्कूलों के लिए तय मानकों के अनुरूप नहीं है। कोर्ट ने कहा कि हलफनामे में बताया जाए कि प्राथमिक और उच्च स्कूलों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए विशेष शिक्षकों की संख्या कितनी है। क्या स्कूल भवन मानकों के अनुरूप है। शिक्षण के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध हैं और वे कार्यशील स्थिति में हैं। क्या अनुसूची के अनुसार पुस्तकालय उपलब्ध हैं और उनमें आवश्यक पत्रिकाएं व कहानी की किताबें मौजूद हैं। क्या खेल सामग्री, खेल-कूद और स्पोर्ट्स उपकरण उपलब्ध हैं और उपयोग योग्य स्थिति में हैं। इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि 9 अगस्त 2024 को जारी भर्ती विज्ञापन के तहत शुरू की गई शिक्षक भर्ती प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति का भी खुलासा अतिरिक्त हलफनामे में किया जाए।
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-शिक्षकों की कमी को लेकर लिए गए संज्ञान मामले में हाईकोर्ट ने मांगी है जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के प्रावधानों के पालन को लेकर हरियाणा सरकार को जिला-वार सरकारी स्कूलों की जानकारी अतिरिक्त हलफनामे के माध्यम से दाखिल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने अखबार में प्रकाशित खबर का संज्ञान लिया था जिसके अनुसार प्रदेश में शिक्षकों की कमी है और कहीं-कहीं एक शिक्षक को सैकड़ों विद्यार्थियों को संभालना पड़ रहा है।
18 नवंबर 2025 को दाखिल हलफनामे में राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्कूल शिक्षा) विनीत गर्ग ने बताया था कि फरीदाबाद, नूंह और पलवल को छोड़कर राज्य के अन्य सभी जिले निर्धारित छात्र-शिक्षक अनुपात का पालन कर रहे हैं। हालांकि, खंडपीठ ने पाया कि हलफनामे में दिए गए आंकड़े आरटीई अधिनियम की अनुसूची में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक (मिडिल) स्कूलों के लिए तय मानकों के अनुरूप नहीं है। कोर्ट ने कहा कि हलफनामे में बताया जाए कि प्राथमिक और उच्च स्कूलों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए विशेष शिक्षकों की संख्या कितनी है। क्या स्कूल भवन मानकों के अनुरूप है। शिक्षण के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध हैं और वे कार्यशील स्थिति में हैं। क्या अनुसूची के अनुसार पुस्तकालय उपलब्ध हैं और उनमें आवश्यक पत्रिकाएं व कहानी की किताबें मौजूद हैं। क्या खेल सामग्री, खेल-कूद और स्पोर्ट्स उपकरण उपलब्ध हैं और उपयोग योग्य स्थिति में हैं। इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि 9 अगस्त 2024 को जारी भर्ती विज्ञापन के तहत शुरू की गई शिक्षक भर्ती प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति का भी खुलासा अतिरिक्त हलफनामे में किया जाए।
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