फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   High Court said Retired BSF personnel not covered under the definition of exservicemen in Haryana

बीएसएफ से रिटायर कर्मी हरियाणा में पूर्व सैनिक की परिभाषा में नहीं: हाईकोर्ट

विज्ञापन
-एक्स सर्विसमैन श्रेणी में कांस्टेबल नियुक्त करने की मांग हाईकोर्ट ने की खारिज
विज्ञापन

-बीएसएफ से रिटायर सूरजभान ने पूर्व सैनिक कोटा में किया था हरियाणा पुलिस में आवेदन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि बीएसएफ के रिटायर कर्मी हरियाणा में पूर्व सैनिक की परिभाषा के अंतर्गत नहीं आते हैं क्योंकि राज्य ने केंद्र सरकार की उस नीति को नहीं अपनाया है जो केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के सेवानिवृत्त कर्मियों को समान लाभ प्रदान करती है। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के सेवानिवृत्त कांस्टेबल सूरज भान ने याचिका दाखिल करते हुए हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल के पद के लिए ईएसएम श्रेणी के तहत नियुक्ति पत्र जारी करने के लिए हरियाणा सरकार को निर्देश देने की मांग की थी।

याचिकाकर्ता ने 21 वर्षों तक बीएसएफ में सेवा की और 31 जुलाई, 2014 को सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने जुलाई 2015 में हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) द्वारा ईएसएम श्रेणी के तहत विज्ञापित पुलिस कांस्टेबल पद के लिए आवेदन किया था। उन्होंने शारीरिक परीक्षा और साक्षात्कार सफलतापूर्वक उत्तीर्ण किया और उनका नाम 29 अक्तूबर, 2016 को जारी अंतिम मेरिट सूची में शामिल हुआ। हालांकि उन्हें कभी नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया गया। जब 2019 में इस मामले की पहली सुनवाई हुई थी तो न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह इस बारे में अपना रुख स्पष्ट करे कि क्या वह गृह मंत्रालय (एमएचए) के 23 नवंबर, 2012 के कार्यालय ज्ञापन के आलोक में बीएसएफ सेवानिवृत्त कर्मियों को पूर्व सैनिक मानती है। हरियाणा के पुलिस महानिदेशक ने दायर हलफनामों में स्पष्ट किया है कि हरियाणा ने 2012 के केंद्रीय ज्ञापन को नहीं अपनाया है। मामले की सुनवाई और रिकॉर्ड की जांच के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि अर्धसैनिक बलों के सेवानिवृत्त सैनिकों को पूर्व सैनिक की परिभाषा में शामिल करने के राज्य सरकार के किसी विशिष्ट निर्णय के अभाव में न्यायालय सरकार को ऐसे लाभ प्रदान करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। उपरोक्त चर्चा और निष्कर्षों के मद्देनजर हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed