{"_id":"68cf188dd408e0037a0aeceb","slug":"haryana-ranks-third-in-the-country-in-linking-aadhaar-with-school-students-chandigarh-haryana-news-c-16-1-pkl1089-824009-2025-09-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh-Haryana News: स्कूली छात्रों के आधार लिंक करने में हरियाणा देश में तीसरे नंबर पर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh-Haryana News: स्कूली छात्रों के आधार लिंक करने में हरियाणा देश में तीसरे नंबर पर
विज्ञापन
कुलदीप शुक्ला
चंडीगढ़। स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में हरियाणा ने एक बार फिर अपनी अलग पहचान बनाई है।
स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के आधार लिंक (सीडिंग) अभियान में बेहतर प्रदर्शन करते हुए राज्य के 98.5 फीसदी छात्रों का आधार नंबर शिक्षा पोर्टल से जोड़ा गया है। यह राष्ट्रीय औसत (89.4 फीसदी) से काफी अधिक है। देशभर में स्कूली बच्चों की पहचान और उनकी शैक्षिक प्रगति के सटीक रिकॉर्ड के मामले में हरियाणा ने तीसरे स्थान हासिल किया है। राष्ट्रीय स्तर पर स्कूली बच्चों के आधार लिंक के मामले में आंध्र प्रदेश (99.6 फीसदी) और अंडमान-निकोबार (99.5 फीसदी) सबसे आगे हैं।
इसके बाद हरियाणा का नंबर आता है। पूर्वोत्तर राज्य मेघालय (31.9 फीसदी), मणिपुर (61 फीसदी) और नागालैंड (62.6 फीसदी) इस मामले में काफी पीछे हैं। स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) विनीत गर्ग के मुताबिक आधार लिंकिंग के चलते अब बच्चों की शैक्षणिक यात्रा को कक्षा एक से लेकर माध्यमिक स्तर तक डिजिटल रूप से ट्रैक किया जा सकेगा। इससे कोई बच्चा बीच में पढ़ाई न छोड़े और अगर छोड़ता भी है तो उसे दोबारा मुख्यधारा में लाने में आसानी होगी। एमआईएस पोर्टल पर स्कूलों को आधार सीडिंग का विकल्प दिया गया है। पंचायत भवनों और स्कूलों में आधार कार्ड बनाने के लिए कैंप आयोजित किए जा रहे हैं। साथ ही शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि अभिभावकों से व्यक्तिगत स्तर पर संपर्क करें। स्कूल स्तर पर आईटी सहायकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
विज्ञापन
चंडीगढ़। स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में हरियाणा ने एक बार फिर अपनी अलग पहचान बनाई है।
स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के आधार लिंक (सीडिंग) अभियान में बेहतर प्रदर्शन करते हुए राज्य के 98.5 फीसदी छात्रों का आधार नंबर शिक्षा पोर्टल से जोड़ा गया है। यह राष्ट्रीय औसत (89.4 फीसदी) से काफी अधिक है। देशभर में स्कूली बच्चों की पहचान और उनकी शैक्षिक प्रगति के सटीक रिकॉर्ड के मामले में हरियाणा ने तीसरे स्थान हासिल किया है। राष्ट्रीय स्तर पर स्कूली बच्चों के आधार लिंक के मामले में आंध्र प्रदेश (99.6 फीसदी) और अंडमान-निकोबार (99.5 फीसदी) सबसे आगे हैं।
इसके बाद हरियाणा का नंबर आता है। पूर्वोत्तर राज्य मेघालय (31.9 फीसदी), मणिपुर (61 फीसदी) और नागालैंड (62.6 फीसदी) इस मामले में काफी पीछे हैं। स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) विनीत गर्ग के मुताबिक आधार लिंकिंग के चलते अब बच्चों की शैक्षणिक यात्रा को कक्षा एक से लेकर माध्यमिक स्तर तक डिजिटल रूप से ट्रैक किया जा सकेगा। इससे कोई बच्चा बीच में पढ़ाई न छोड़े और अगर छोड़ता भी है तो उसे दोबारा मुख्यधारा में लाने में आसानी होगी। एमआईएस पोर्टल पर स्कूलों को आधार सीडिंग का विकल्प दिया गया है। पंचायत भवनों और स्कूलों में आधार कार्ड बनाने के लिए कैंप आयोजित किए जा रहे हैं। साथ ही शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि अभिभावकों से व्यक्तिगत स्तर पर संपर्क करें। स्कूल स्तर पर आईटी सहायकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
विज्ञापन