{"_id":"67d2a211c68a0f0fe00b6efc","slug":"haryana-nikay-chunav-result-bjp-massive-victory-raises-public-expectations-news-in-hindi-2025-03-13","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Haryana Nikay Chunav: प्रचंड विजय के आगे अब जनाकांक्षाओं का पहाड़, भाजपा ने सधी रणनीति व गंभीरता से लड़ा चुनाव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Haryana Nikay Chunav: प्रचंड विजय के आगे अब जनाकांक्षाओं का पहाड़, भाजपा ने सधी रणनीति व गंभीरता से लड़ा चुनाव
Thu, 13 Mar 2025 03:14 PM IST
शाहरुख खान
विजय गुप्ता, अमर उजाला, चंडीगढ़
विजय गुप्ता, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 13 Mar 2025 03:14 PM IST
सार
हरियाणा में निकाय चुनाव में प्रचंड विजय के आगे अब जनाकांक्षाओं का पहाड़ है। भाजपा ने सधी हुई रणनीति और गंभीरता से चुनाव लड़ा। कांग्रेस अनमने से चुनाव लड़ी, कांग्रेस को बिखराव ले डूबा। पहली अग्निपरीक्षा में सैनी सफल हो गए।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी (फाइल फोटो)
- फोटो : संवाद
विस्तार
हरियाणा में स्थानीय निकायों के नतीजे अप्रत्याशित या बहुत चौंकाने वाले नहीं हैं। जिसकी सरकार, उसी के निकाय... भाजपा इसी रवायत के कारण विश्वस्त थी और विजयी भी हुई। कांग्रेस भी यही मानकर चली कि जिसकी प्रदेश में सरकार है निकाय उसी के होंगे।
वह अनमने से लड़ी, ऊपर से पार्टी का बिखराव...नतीजा शून्य। लोकसभा व विधानसभा चुनाव में जीत के बाद उत्साहित भाजपा के लिए यह जीत एक साल में तीसरी बार जश्न का सबब है। साथ ही मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मजबूत नेतृत्व क्षमता पर मुहर भी।
लोकसभा चुनाव में दस में से पांच सीटें गंवाने के बाद भाजपा ने अपनी मजबूत रणनीति और माइक्रोमैनेजमेंट के जरिए विधानसभा चुनाव में सबको हैरान करने
वाली विजय हासिल की। उसके बाद से ही पार्टी ने निकाय चुनावों की तैयारी शुरू कर दी थी।
हर चुनाव की अति गंभीरता से लेने और पूरी जान लगा देने के जज्बे और जोश ने भाजपा को आसानी से यह जीत दिला दी। वैसे नगर निगमों, नगर परिषदों व नगर पालिकाओं वाले शहरी क्षेत्रों में भाजपा पहले भी मजबूत रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
वह अनमने से लड़ी, ऊपर से पार्टी का बिखराव...नतीजा शून्य। लोकसभा व विधानसभा चुनाव में जीत के बाद उत्साहित भाजपा के लिए यह जीत एक साल में तीसरी बार जश्न का सबब है। साथ ही मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मजबूत नेतृत्व क्षमता पर मुहर भी।
विज्ञापन
लोकसभा चुनाव में दस में से पांच सीटें गंवाने के बाद भाजपा ने अपनी मजबूत रणनीति और माइक्रोमैनेजमेंट के जरिए विधानसभा चुनाव में सबको हैरान करने
वाली विजय हासिल की। उसके बाद से ही पार्टी ने निकाय चुनावों की तैयारी शुरू कर दी थी।
हर चुनाव की अति गंभीरता से लेने और पूरी जान लगा देने के जज्बे और जोश ने भाजपा को आसानी से यह जीत दिला दी। वैसे नगर निगमों, नगर परिषदों व नगर पालिकाओं वाले शहरी क्षेत्रों में भाजपा पहले भी मजबूत रही है।
विज्ञापन
दस में से नौ नगर निगमों में भाजपा फिर रिपीट
इसे शहरों की ही पार्टी माना जाता रहा है। दस में से नौ नगर निगमों में वह फिर रिपीट हुई है। मानेसर नगर निगम में भाजपा का प्रत्याशी हारा है लेकिन विजयी रहे निर्दलीय उम्मीदवार भी भाजपा के ही समर्थक माने जाते हैं। इसलिए भाजपा इस नगर निगम को भी अपने ही कब्जे में मान रही है।
पांचों नगर परिषदों और 23 की 23 नगर पालिकाओं के अध्यक्ष भाजपा के ही चुने जाना यह बताता है कि भाजपा ने जनता को यह मन बनाने पर मजबूर किया कि जिसकी प्रदेश में सत्ता है उसी के साथ जाने में हित है।
इसे शहरों की ही पार्टी माना जाता रहा है। दस में से नौ नगर निगमों में वह फिर रिपीट हुई है। मानेसर नगर निगम में भाजपा का प्रत्याशी हारा है लेकिन विजयी रहे निर्दलीय उम्मीदवार भी भाजपा के ही समर्थक माने जाते हैं। इसलिए भाजपा इस नगर निगम को भी अपने ही कब्जे में मान रही है।
पांचों नगर परिषदों और 23 की 23 नगर पालिकाओं के अध्यक्ष भाजपा के ही चुने जाना यह बताता है कि भाजपा ने जनता को यह मन बनाने पर मजबूर किया कि जिसकी प्रदेश में सत्ता है उसी के साथ जाने में हित है।
मुख्यमंत्री ने एक माह तक ताबड़तोड़ रैलियों-सभाओं के जरिए यह आश्वस्त किया कि भाजपा को जिताने से ही विकास होगा। भाजपा ने इस चुनाव को कितनी गंभीरता से लिया, यह इसी से पता चलता है कि मुख्यमंत्री के अलावा सभी मंत्री, विधायक, केंद्रीय मंत्री और सांसदों को अपने-अपने इलाकों में जीत का जिम्मा दिया गया।
मजबूत नेतृत्व क्षमता पर मुहर
पूरी टीम जुटी और भीतर ही भीतर संघ का सहयोग तो रहा ही, जिसने जीत को पक्का कर दिया। यह इत्तेफाक है कि नायब सिंह सैनी के मुख्यमंत्री पद की कमान संभालने के ठीक एक साल बाद यानी 12 मार्च को यह नतीजे घोषित हुए और उनके सियासी करियर में सफलता का एक अध्याय और जुड़ गया। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनकी पहली अग्निपरीक्षा थी जिसमें वह सफल रहे हैं। यह चुनाव पूरी तरह उनके ही नेतृत्व में लड़ा गया।
पूरी टीम जुटी और भीतर ही भीतर संघ का सहयोग तो रहा ही, जिसने जीत को पक्का कर दिया। यह इत्तेफाक है कि नायब सिंह सैनी के मुख्यमंत्री पद की कमान संभालने के ठीक एक साल बाद यानी 12 मार्च को यह नतीजे घोषित हुए और उनके सियासी करियर में सफलता का एक अध्याय और जुड़ गया। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनकी पहली अग्निपरीक्षा थी जिसमें वह सफल रहे हैं। यह चुनाव पूरी तरह उनके ही नेतृत्व में लड़ा गया।
अनमने से लड़ी कांग्रेस को फिर ले डूबा बिखराव
दूसरी ओर मुख्य प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस तो चुनाव लड़ने से पहले ही हार मान चुकी प्रतीत हुई। कहने को सभी नगर निगमों व परिषदों में उसने प्रत्याशी उतारे लेकिन शीर्ष नेतृत्व में एका व संगठन न होने और विधानसभा चुनाव में हार के बाद कार्यकर्ताओं में छाई निराशा के कारण पूरे चुनाव के दौरान ऐसा लगा ही नहीं कि कांग्रेस जीतने के लिए लड़ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि मैं तो कभी निकाय चुनाव के प्रचार के लिए गया ही नहीं।
दूसरी ओर मुख्य प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस तो चुनाव लड़ने से पहले ही हार मान चुकी प्रतीत हुई। कहने को सभी नगर निगमों व परिषदों में उसने प्रत्याशी उतारे लेकिन शीर्ष नेतृत्व में एका व संगठन न होने और विधानसभा चुनाव में हार के बाद कार्यकर्ताओं में छाई निराशा के कारण पूरे चुनाव के दौरान ऐसा लगा ही नहीं कि कांग्रेस जीतने के लिए लड़ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि मैं तो कभी निकाय चुनाव के प्रचार के लिए गया ही नहीं।
अब यह दलील दी कि भाजपा जिन सीटों पर जीती है वह तो पहले से ही उसके पास थीं। यह कथन बताते हैं कि पार्टी ने एक तरह से मान ही लिया था कि उसके प्रयास बेमानी हैं। दूसरी ओर सांसद कुमारी सैलजा व रणदीप सुरजेवाला भी प्रचार में दमखम दिखाते नजर नहीं आए। इसलिए कांग्रेस का सफाया तय ही था।
इस जीत से भाजपा का उत्साह से लबरेज होना लाजिमी है। विधानसभा चुनाव से लेकर इन निकाय चुनावों तक बड़े-बड़े संकल्प उसने जनता से किए हैं। इसलिए जनता की आकांक्षाएं बहुत हैं। नगरों की समस्याएं व मुद्दे सीधे जनता को प्रभावित करते है। चाहे स्वच्छता का हो, शहरों की भीतरी सड़कों का हो या पार्कों-स्ट्रीट लाइटों जैसी सुविधाओं का...बहुत से शहरों में इनसे संबंधित अनेक दिक्कते हैं। सात नगर निगमों में तो पदाधिकारियों का कार्यकाल पूरा होने के एक साल बाद चुनाव हुए हैं।
यह भी पढ़ें: Haryana Nikay Chunav: शहर की सरकार भी भाजपा की हो ली रे... पढ़ें कमल खिलने की वजह और कांग्रेस के हार के कारण
यह भी पढ़ें: Haryana Nikay Chunav: शहर की सरकार भी भाजपा की हो ली रे... पढ़ें कमल खिलने की वजह और कांग्रेस के हार के कारण
ट्रिपल इंजन की सरकार बनी
इनमें रुके हुए विकास को रफ्तार देनी होगी। आम तौर पर निकाय बजट की कमी से जूझते हैं और विकास ठिठकता है। मुख्यमंत्री ने यही नारा पूरे चुनाव में बुलंद किया कि ट्रिपल इंजन की सरकार बनेगी और विकास होगा। ट्रिपल इंजन की सरकार बन गई है। विकास की पटरी पर अब इस तीन इंजनी सरकार की रफ्तार पर जनता की नजरें रहेंगी।
यह भी पढ़ें: हरियाणा में बजा भाजपा का डंका: 10 में से नौ निगमों में BJP, मानेसर में निर्दलीय ने मारी बाजी; कांग्रेस पिछड़ी
इनमें रुके हुए विकास को रफ्तार देनी होगी। आम तौर पर निकाय बजट की कमी से जूझते हैं और विकास ठिठकता है। मुख्यमंत्री ने यही नारा पूरे चुनाव में बुलंद किया कि ट्रिपल इंजन की सरकार बनेगी और विकास होगा। ट्रिपल इंजन की सरकार बन गई है। विकास की पटरी पर अब इस तीन इंजनी सरकार की रफ्तार पर जनता की नजरें रहेंगी।
यह भी पढ़ें: हरियाणा में बजा भाजपा का डंका: 10 में से नौ निगमों में BJP, मानेसर में निर्दलीय ने मारी बाजी; कांग्रेस पिछड़ी