हरियाणा में भीषण जाड़ा: कोल्ड डे के ऑरेंज अलर्ट के बीच कोहरे से कम हुई विजिबिलिटी, ठंड से अभी राहत नहीं
मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो-तीन दिन राहत के आसार भी नहीं हैं। विभाग ने अति शीत लहर को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
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अगले दो से तीन दिन तक ठंड की ऐसी ही स्थिति बनी रहेगी। उसके बाद 5 और 6 जनवरी के बीच प्रदेश में माैसम बदलेगा। पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के बाद ठंड बढ़ेगी।
मौसम विभाग की तरफ से आज अति शीत लहर को लेकर ऑरेंज अलर्ट और तीन जनवरी को यलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विछोभ की सक्रियता के चलते उत्तरी पर्वतीय क्षेत्र पर बर्फबारी और मैदानी इलाकों में मौसम में बदलाव होगा।
हरियाणा में बुधवार को 3.6 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ सिरसा सबसे ठंडा रहा है। मौसम विज्ञान विभाग के डायरेक्टर सुरेंद्र पॉल ने बताया कि आगामी दो-तीन दिनों तक सुबह-शाम कोहरा रहेगा।
अंबाला में पिछले चार दिन से नहीं निकली धूप तो धुंध से यातायात प्रभावित
अंबाला में पिछले चार दिन से धूप नही निकली है। इसके कारण लोगों को सर्दी का अधिक अहसास हो रहा है। धूप न निकलने से रोजमर्रा के कार्यों में भी लाेगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं वीरवार को धुंध की चादर बिछी दिखाई दी। पारा इतना नीचे था कि गाड़ियों पर हलकी ओस की चादर भी तापमान कम होने के कारण जम गई थी। वहीं धुंध के कारण यातायात भी प्रभावित रहा।
एक तरफ तो सुबह से करीब 10 ट्रेनों का संचालन देरी से रहा। इसके साथ ही विभिन्न राजमार्गों पर भी धुंध के कारण वाहनों की रफ्तार कम देखने को मिली। धूप न निकलने से दिन के तापमान में लगातार कमी देखने को मिल रही है। इस मौसम में अति शीत दिवस की परिस्थितियों को बना दिया है। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो तीन जनवरी तक इसी प्रकार का मौसम रहने का अनुमान है।
शीत लहर से ठिठुरन बढ़ी, धुंध से फसलों में मिल रहा फायदा
भिवानी में शीत लहर से ठिठुरन बढ़ी है वही धुंध से फसलों में फायदा मिल रहा है। वीरवार को भी न्यूनतम तापमान चार डिग्री तक नीचे गिरा। जिसकी वजह से दृश्यता भी 30 मीटर तक बनी रही वहीं सरसों और गेहूं की फसल में भी फायदा मिलेगा।
लगातार चौथे दिन भी दिन के समय कुछ क्षणों के लिए ही धूप निकली। ठंडी हवाओं की वजह से शहर की सड़कों पर भी सन्नाटा छाया रहा। कृषि वैज्ञानिक डॉ देवीलाल ने बताया कि इस समय मौसम फसलों के लिए फायदेमंद है। गेहूं की बढ़वार के लिए तापमान नीचे जाना जरूरी है। भिवानी में ओलावृष्टि से ही ठिठुरन का असर देखा जा रहा है।