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Chandigarh-Haryana News: हरियाणा सरकार की सीईटी पाॅलिसी हाईकोर्ट में चुनौती
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-याचिका में तकनीकी पदों के लिए अलग परीक्षा की मांग
-हाईकोर्ट ने सरकार को जवाब दाखिल करने का दिया आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। ग्रुप-सी और ग्रुप-डी पदों की भर्ती के लिए हरियाणा में लागू काॅमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (सीईटी) की नीति को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में तकनीकी पदों के लिए अलग सीईटी कराने की मांग की है। याची ने कहा कि परीक्षा में तकनीकी योग्यता और अनुभव रखने वाले अभ्यर्थियों को अन्य विषयों के उम्मीदवारों के साथ शामिल करना अनुचित है।
याची ने दलील दी कि सरकार की मौजूदा सीईटी पॉलिसी मनमानी, अतार्किक और असंगत है। विभिन्न तकनीकी विभागों जैसे स्वास्थ्य, कृषि, इंजीनियरिंग, बिजली, मैकेनिकल, कंप्यूटर व अन्य क्षेत्रों में पदों के लिए विशेषज्ञ ज्ञान और अनुभव की आवश्यकता होती है लेकिन सरकार ने सामान्य सीईटी लागू कर इन पदों पर भी सामान्य अभ्यर्थियों को शामिल कर दिया है। इससे विशेषज्ञ उम्मीदवारों के अवसर प्रभावित हो रहे हैं। याची ने बताया कि 31 दिसंबर 2024 को हरियाणा सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर तकनीकी पदों के लिए भी सामान्य सीईटी को अनिवार्य कर दिया। इसके खिलाफ विभिन्न अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई थी, लेकिन उनकी आपत्तियों पर विचार किए बिना नीति लागू कर दी गई। याचिकाकर्ताओं ने इस नीति को रद्द करने और तकनीकी पदों के लिए अलग पात्रता परीक्षा आयोजित करने की मांग की है।
अगली सुनवाई 21 अगस्त को
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कहा कि इस नीति से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत जवाब तैयार करने के लिए उन्हें समय चाहिए। कोर्ट ने सरकार को समय देते हुए अगली सुनवाई की तारीख 21 अगस्त निर्धारित की है। याची ने कहा कि 26 और 27 जून को हुई सीईटी में तकनीकी पदों के लिए भी वही प्रश्न पूछे गए जो गैर-तकनीकी पदों के लिए होते हैं। इससे तकनीकी विषयों में विशेषज्ञता रखने वाले अभ्यर्थियों को प्रतिस्पर्धा में अनुचित नुकसान हुआ।
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-हाईकोर्ट ने सरकार को जवाब दाखिल करने का दिया आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। ग्रुप-सी और ग्रुप-डी पदों की भर्ती के लिए हरियाणा में लागू काॅमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (सीईटी) की नीति को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में तकनीकी पदों के लिए अलग सीईटी कराने की मांग की है। याची ने कहा कि परीक्षा में तकनीकी योग्यता और अनुभव रखने वाले अभ्यर्थियों को अन्य विषयों के उम्मीदवारों के साथ शामिल करना अनुचित है।
याची ने दलील दी कि सरकार की मौजूदा सीईटी पॉलिसी मनमानी, अतार्किक और असंगत है। विभिन्न तकनीकी विभागों जैसे स्वास्थ्य, कृषि, इंजीनियरिंग, बिजली, मैकेनिकल, कंप्यूटर व अन्य क्षेत्रों में पदों के लिए विशेषज्ञ ज्ञान और अनुभव की आवश्यकता होती है लेकिन सरकार ने सामान्य सीईटी लागू कर इन पदों पर भी सामान्य अभ्यर्थियों को शामिल कर दिया है। इससे विशेषज्ञ उम्मीदवारों के अवसर प्रभावित हो रहे हैं। याची ने बताया कि 31 दिसंबर 2024 को हरियाणा सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर तकनीकी पदों के लिए भी सामान्य सीईटी को अनिवार्य कर दिया। इसके खिलाफ विभिन्न अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई थी, लेकिन उनकी आपत्तियों पर विचार किए बिना नीति लागू कर दी गई। याचिकाकर्ताओं ने इस नीति को रद्द करने और तकनीकी पदों के लिए अलग पात्रता परीक्षा आयोजित करने की मांग की है।
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अगली सुनवाई 21 अगस्त को
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कहा कि इस नीति से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत जवाब तैयार करने के लिए उन्हें समय चाहिए। कोर्ट ने सरकार को समय देते हुए अगली सुनवाई की तारीख 21 अगस्त निर्धारित की है। याची ने कहा कि 26 और 27 जून को हुई सीईटी में तकनीकी पदों के लिए भी वही प्रश्न पूछे गए जो गैर-तकनीकी पदों के लिए होते हैं। इससे तकनीकी विषयों में विशेषज्ञता रखने वाले अभ्यर्थियों को प्रतिस्पर्धा में अनुचित नुकसान हुआ।
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