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कर्मचारियों को यूपीएस या एनपीएस नहीं बल्कि ओपीएस दे सरकार : हुड्डा
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि प्रदेश सरकार जबरदस्ती कर्मचारियों पर यूपीएस थोप रही है। जबकि, कर्मचारी न ही यूपीएस और न ही एनपीएस (नेशनल पेंशन स्कीम) से सहमत हैं, बल्कि उनकी मांग सिर्फ ओपीएस (ओल्ड पेंशन स्कीम) की है। हुड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार की तर्ज पर राज्य कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए हरियाणा कैबिनेट ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) लागू करने की घोषणा की गई। यह स्कीम पेंशन स्कीम न होकर एक पेआउट स्कीम है। पे-आउट का अर्थ है, एकमुश्त राशि जमा करवाने या निवेश करने पर प्राप्त लाभ का भुगतान करना। हुड्डा ने कहा कि केंद्र पहले ही 1 अप्रैल से 30 जून 2025 तक केंद्रीय कर्मचारियों को यूपीएस चुनने का विकल्प दे चुकी है लेकिन, अभी तक 30 लाख केंद्रीय कर्मचारियों में से केवल 20 हजार कर्मचारियों द्वारा ही यूपीएस का विकल्प चुनने के मतलब साफ हैं कि कर्मचारियों की मांग ओपीएस है। हुड्डा ने कहा कि ओपीएस स्वचालित डीए संशोधन, वेतन आयोगों के लागू करने के साथ पेंशन के रूप में अंतिम मूल वेतन का 50 फीसदी गारंटी देता है, इसमें कोई अंशदान नहीं देना होता। जबकि, यूपीएस केवल तभी 50 फीसदी पेंशन प्रदान करता है, वह भी जब कई शर्तें व सेवा कम से कम 25 वर्ष हो और इसमें कर्मचारी को पूरे सेवाकाल के दौरान अपने वेतन और डीए का दस फीसदी अंशदान देने सहित अन्य नियम है।
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चंडीगढ़। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि प्रदेश सरकार जबरदस्ती कर्मचारियों पर यूपीएस थोप रही है। जबकि, कर्मचारी न ही यूपीएस और न ही एनपीएस (नेशनल पेंशन स्कीम) से सहमत हैं, बल्कि उनकी मांग सिर्फ ओपीएस (ओल्ड पेंशन स्कीम) की है। हुड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार की तर्ज पर राज्य कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए हरियाणा कैबिनेट ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) लागू करने की घोषणा की गई। यह स्कीम पेंशन स्कीम न होकर एक पेआउट स्कीम है। पे-आउट का अर्थ है, एकमुश्त राशि जमा करवाने या निवेश करने पर प्राप्त लाभ का भुगतान करना। हुड्डा ने कहा कि केंद्र पहले ही 1 अप्रैल से 30 जून 2025 तक केंद्रीय कर्मचारियों को यूपीएस चुनने का विकल्प दे चुकी है लेकिन, अभी तक 30 लाख केंद्रीय कर्मचारियों में से केवल 20 हजार कर्मचारियों द्वारा ही यूपीएस का विकल्प चुनने के मतलब साफ हैं कि कर्मचारियों की मांग ओपीएस है। हुड्डा ने कहा कि ओपीएस स्वचालित डीए संशोधन, वेतन आयोगों के लागू करने के साथ पेंशन के रूप में अंतिम मूल वेतन का 50 फीसदी गारंटी देता है, इसमें कोई अंशदान नहीं देना होता। जबकि, यूपीएस केवल तभी 50 फीसदी पेंशन प्रदान करता है, वह भी जब कई शर्तें व सेवा कम से कम 25 वर्ष हो और इसमें कर्मचारी को पूरे सेवाकाल के दौरान अपने वेतन और डीए का दस फीसदी अंशदान देने सहित अन्य नियम है।