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फसल बीमा योजना की आड़ में कंपनियों को फायदा पहुंचा रही सरकार : दीपेंद्र
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। रोहतक लोकसभा क्षेत्र से सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने संसद में सरकार से पूछा कि हरियाणा में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत मुआवजा भुगतान में 90 फीसदी की भारी गिरावट क्यों हुई है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से दीपेंद्र के प्रश्न के लिखित उत्तर में कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि 2022-23 में हरियाणा में फसल बीमा के तहत 2,518.66 करोड़ का भुगतान किया गया था जो 2023-24 में घटकर 265.23 करोड़ रह गया। 2023-24 में किसानों से 154.9 करोड़ रुपये, केंद्र सरकार से 246.6 करोड़ रुपये और इतना ही राज्य का हिस्सा माना जाए।
हुड्डा ने कहा कि यह बीमा कंपनी की तिजोरी में 648.1 करोड़ रुपये की धनराशि गई। यानी बीमा कंपनी को 382.9 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ। इसी तरह 2024-25 में यह राशि और भी कम होकर 262.6 करोड़ रह गई जबकि, 2024-25 में किसानों से 280.3 करोड़ रुपये, केंद्र सरकार से 388.2 करोड़ रुपये और 50 फीसदी के आधार पर राज्य का हिस्सा 388.2 करोड़ रुपये प्रीमियम माना जाए तो बीमा कंपनी की तिजोरी में 1056.7 करोड़ रुपये पहुंचे लेकिन किसानों को सिर्फ 262.6 करोड़ रुपये का ही भुगतान हुआ। यानी बीमा कंपनी को 794.1 करोड़ का मुनाफा हुआ। इससे यह स्पष्ट हो गया कि बीमा कंपनियां इस योजना की आड़ में किसानों और सरकारी खजाने दोनों को लूट रही हैं।
अखिल भारतीय पॉइंट्समेन संघ ने ज्ञापन सौंपा
अखिल भारतीय पॉइंट्समेन संघ का एक प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों को लेकर सांसद दीपेंद्र हुड्डा के दिल्ली निवास पर मिलकर एक ज्ञापन सौंपा। हुड्डा ने उनकी मांगों को जायज बताते हुए सरकार से तुरंत उनका समाधान करने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल की मांग है कि पॉइंट्समेन के लिए 12 घंटे के रोस्टर को समाप्त कर 60 घंटे साप्ताहिक ड्यूटी लागू की जाए। जोखिम और कठिनाई भत्ता शीघ्र लागू किया जाए। पॉइंट्समेन कैडर का पुनर्गठन कर प्रमोशन के उचित अवसर तय किए जाएँ।
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चंडीगढ़। रोहतक लोकसभा क्षेत्र से सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने संसद में सरकार से पूछा कि हरियाणा में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत मुआवजा भुगतान में 90 फीसदी की भारी गिरावट क्यों हुई है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से दीपेंद्र के प्रश्न के लिखित उत्तर में कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि 2022-23 में हरियाणा में फसल बीमा के तहत 2,518.66 करोड़ का भुगतान किया गया था जो 2023-24 में घटकर 265.23 करोड़ रह गया। 2023-24 में किसानों से 154.9 करोड़ रुपये, केंद्र सरकार से 246.6 करोड़ रुपये और इतना ही राज्य का हिस्सा माना जाए।
हुड्डा ने कहा कि यह बीमा कंपनी की तिजोरी में 648.1 करोड़ रुपये की धनराशि गई। यानी बीमा कंपनी को 382.9 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ। इसी तरह 2024-25 में यह राशि और भी कम होकर 262.6 करोड़ रह गई जबकि, 2024-25 में किसानों से 280.3 करोड़ रुपये, केंद्र सरकार से 388.2 करोड़ रुपये और 50 फीसदी के आधार पर राज्य का हिस्सा 388.2 करोड़ रुपये प्रीमियम माना जाए तो बीमा कंपनी की तिजोरी में 1056.7 करोड़ रुपये पहुंचे लेकिन किसानों को सिर्फ 262.6 करोड़ रुपये का ही भुगतान हुआ। यानी बीमा कंपनी को 794.1 करोड़ का मुनाफा हुआ। इससे यह स्पष्ट हो गया कि बीमा कंपनियां इस योजना की आड़ में किसानों और सरकारी खजाने दोनों को लूट रही हैं।
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अखिल भारतीय पॉइंट्समेन संघ ने ज्ञापन सौंपा
अखिल भारतीय पॉइंट्समेन संघ का एक प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों को लेकर सांसद दीपेंद्र हुड्डा के दिल्ली निवास पर मिलकर एक ज्ञापन सौंपा। हुड्डा ने उनकी मांगों को जायज बताते हुए सरकार से तुरंत उनका समाधान करने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल की मांग है कि पॉइंट्समेन के लिए 12 घंटे के रोस्टर को समाप्त कर 60 घंटे साप्ताहिक ड्यूटी लागू की जाए। जोखिम और कठिनाई भत्ता शीघ्र लागू किया जाए। पॉइंट्समेन कैडर का पुनर्गठन कर प्रमोशन के उचित अवसर तय किए जाएँ।
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