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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Former judge's demand for written defence rejected after the stipulated period of 45 days, Court News

Chandigarh-Haryana News: पूर्व जज की 45 दिन की तय सीमा बाद लिखित बचाव की मांग खारिज

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-हाईकोर्ट ने माना इस अवधि के बाद लिखित बचाव का नहीं है कोई अधिकार
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-निलंबित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुधीर परमार की याचिका खारिज
अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि किसी आरोपी न्यायिक अधिकारी को 45 दिन की सीमा के बाद लिखित बचाव बयान य जवाब प्रस्तुत करने का कोई अधिकार नहीं है। इस टिप्पणी के साथ ही खंडपीठ ने पंचकूला के निलंबित तत्कालीन सीबीआई विशेष अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुधीर परमार की याचिका को खारिज कर दिया।

परमार की याचिका को खारिज करते हुए चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस एचएस ग्रेवाल की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को 45 दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद लिखित बचाव बयान दाखिल करने के लिए और समय मांगने का कोई अधिकार नहीं है। खासकर तब जब नियोक्ता ने लिखित बचाव बयान दाखिल करने के लिए समय बढ़ाने से इनकार कर दिया हो। कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी को कार्यवाही को बार-बार स्थगित करने के बजाय, निर्धारित अवधि के भीतर बचाव का लिखित बयान प्रस्तुत करने में विफल रहने पर परमार के खिलाफ एक पक्षीय कार्यवाही करनी चाहिए थी। बचाव पक्ष के लिखित बयान में देरी पर उदारतापूर्वक स्थगन देने में जांच अधिकारी का कार्य सराहनीय नहीं है। अदालत ने जांच अधिकारी को जल्द जांच रिपोर्ट पेश करके अनुशासनात्मक कार्यवाही पूरी करने का भी निर्देश दिया है। प्रशासनिक पक्ष से उच्च न्यायालय को भी अपनी सिफारिशें शीघ्रता से प्रस्तुत करने को कहा गया। पीठ ने स्पष्ट किया कि सभी वर्तमान और भविष्य की अनुशासनात्मक कार्यवाहियों के लिए छह महीने और 25 दिन की समय सीमा है। साथ ही चेतावनी दी कि समय-सीमा का पालन न करने की स्थिति में जांच अधिकारी या उच्च न्यायालय के किसी अन्य दोषी कर्मचारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। हरियाणा सुपीरियर ज्यूडिशियल सर्विसेज के सदस्य परमार को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज होने के बाद 27 अप्रैल 2023 को निलंबित कर दिया गया था।
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