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पहली बार कांग्रेस का एक भी स्थगन, कार्य स्थगन या अल्पकालिक चर्चा स्वीकार नहीं : हुड्डा
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कहा, विधानसभा में जनहित से भागी भाजपा सरकार, विपक्ष की एक भी बात सुनने को तैयार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा ने विधानसभा के हालिया सत्र को हरियाणा की संसदीय परंपराओं के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि भाजपा सरकार का रवैया पूरी तरह जन-विरोधी और जवाबदेही से बचने वाला रहा है। आरोप लगाया कि विधानसभा के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि कांग्रेस का एक भी स्थगन प्रस्ताव, कार्य स्थगन प्रस्ताव या अल्पकालिक चर्चा का प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया।
हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस ने चंडीगढ़ के स्टेटस, अरावली में खनन, किसानों की समस्याएं, बेरोजगार युवा, भर्ती घोटाले, एमएसपी, धान घोटाला, मनरेगा, भ्रष्टाचार, शिक्षा-स्वास्थ्य व्यवस्था, खिलाड़ियों की मौतें, एसवाईएल जल विवाद और भाजपा नेताओं की हेट स्पीच जैसे मुद्दों पर चर्चा के लिए प्रस्ताव दिए।
चंडीगढ़ में अपने आवास पर विधायकों के साथ पत्रकार वार्ता में हुड्डा ने कहा कि वोट चोरी जैसे गंभीर खुलासों के बाद भाजपा में घबराहट दिख रही है। इसी घबराहट में विधानसभा का ध्यान भटकाने के लिए सरकार चुनाव सुधार पर चर्चा का प्रस्ताव लाई जबकि यह विषय विधानसभा के अधिकार क्षेत्र में ही नहीं आता। इसी कारण कांग्रेस को सदन से वॉकआउट करना पड़ा। कांग्रेस अगले सत्र में वोट चोरी पर विशेष प्रस्ताव लेकर आएगी।
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अरावली के मुद्दे पर हुड्डा ने सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट साफ बताती है कि अरावली का विनाश सबसे ज्यादा हरियाणा को प्रभावित करेगा। प्रदूषण बढ़ेगा और प्रदेश के फेफड़े खत्म हो जाएंगे। क्या सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अरावली को बचाने के लिए मजबूत पक्ष क्यों नहीं रखा और अब रिव्यू पिटीशन क्यों नहीं दाखिल कर रही। मनरेगा की स्थिति पर हुड्डा ने कहा कि 8 लाख पंजीकृत मजदूरों में से केवल 2100 को ही 100 दिन का रोजगार मिला जबकि पिछले पांच वर्षों में नियमों के बावजूद किसी को मुआवजा तक नहीं दिया गया। आर्थिक स्थिति पर हुड्डा ने नीति आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक में 18 राज्यों में 14वें और डेब्ट इंडेक्स में 15वें स्थान पर है। प्रदेश पर कुल 5 लाख 16 हजार करोड़ रुपये का कर्ज हो चुका है, जो लगातार बढ़ रहा है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा ने विधानसभा के हालिया सत्र को हरियाणा की संसदीय परंपराओं के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि भाजपा सरकार का रवैया पूरी तरह जन-विरोधी और जवाबदेही से बचने वाला रहा है। आरोप लगाया कि विधानसभा के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि कांग्रेस का एक भी स्थगन प्रस्ताव, कार्य स्थगन प्रस्ताव या अल्पकालिक चर्चा का प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया।
हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस ने चंडीगढ़ के स्टेटस, अरावली में खनन, किसानों की समस्याएं, बेरोजगार युवा, भर्ती घोटाले, एमएसपी, धान घोटाला, मनरेगा, भ्रष्टाचार, शिक्षा-स्वास्थ्य व्यवस्था, खिलाड़ियों की मौतें, एसवाईएल जल विवाद और भाजपा नेताओं की हेट स्पीच जैसे मुद्दों पर चर्चा के लिए प्रस्ताव दिए।
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चंडीगढ़ में अपने आवास पर विधायकों के साथ पत्रकार वार्ता में हुड्डा ने कहा कि वोट चोरी जैसे गंभीर खुलासों के बाद भाजपा में घबराहट दिख रही है। इसी घबराहट में विधानसभा का ध्यान भटकाने के लिए सरकार चुनाव सुधार पर चर्चा का प्रस्ताव लाई जबकि यह विषय विधानसभा के अधिकार क्षेत्र में ही नहीं आता। इसी कारण कांग्रेस को सदन से वॉकआउट करना पड़ा। कांग्रेस अगले सत्र में वोट चोरी पर विशेष प्रस्ताव लेकर आएगी।
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अरावली के मुद्दे पर हुड्डा ने सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट साफ बताती है कि अरावली का विनाश सबसे ज्यादा हरियाणा को प्रभावित करेगा। प्रदूषण बढ़ेगा और प्रदेश के फेफड़े खत्म हो जाएंगे। क्या सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अरावली को बचाने के लिए मजबूत पक्ष क्यों नहीं रखा और अब रिव्यू पिटीशन क्यों नहीं दाखिल कर रही। मनरेगा की स्थिति पर हुड्डा ने कहा कि 8 लाख पंजीकृत मजदूरों में से केवल 2100 को ही 100 दिन का रोजगार मिला जबकि पिछले पांच वर्षों में नियमों के बावजूद किसी को मुआवजा तक नहीं दिया गया। आर्थिक स्थिति पर हुड्डा ने नीति आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक में 18 राज्यों में 14वें और डेब्ट इंडेक्स में 15वें स्थान पर है। प्रदेश पर कुल 5 लाख 16 हजार करोड़ रुपये का कर्ज हो चुका है, जो लगातार बढ़ रहा है।