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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Female dog goes missing for 30 days, police officer fights for 25 years to get justice, Haryana News, Court News

Chandigarh-Haryana News: मादा डॉग 30 दिन के लिए हुई लापता, सिपाही को 25 साल लड़नी पड़ी कानूनी लड़ाई

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-कथित कदाचार के लिए हाईकोर्ट ने सजा को असंगत व अत्यधिक माना
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-हरियाणा पुलिस के कांस्टेबल की स्थायी वेतनवृद्धि रोकने की सजा घटाई
अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। डॉग स्क्वायड के 30 दिनों तक गायब रहने के चलते मिली सजा के खिलाफ 25 साल की कानूनी लड़ाई के बाद पुलिस कांस्टेबल को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से इंसाफ मिला है। कोर्ट ने कथित कदाचार के लिए कांस्टेबल को दी गई कठोर विभागीय सजा को असंगत और अत्यधिक माना है। कोर्ट ने सजा में संशोधन करते हुए स्थायी प्रभाव से वेतनवृद्धि रोकने के आदेश को अस्थायी प्रभाव तक सीमित कर दिया है।

मामला हरियाणा पुलिस के कांस्टेबल जगमाल सिंह से जुड़ा है जो जून 2000 में सीआईडी यूनिट हिसार के डाॅग स्क्वायड में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात थे। 19 जून 2000 की रात डाॅग स्क्वायड की मादा डाॅग ‘लाइका’ लापता हो गई थी जिसे 20 जुलाई को बरामद कर लिया गया। विभागीय जांच में स्पष्ट हुआ कि जगमाल सिंह मादा डाॅग के गुम होने के लिए जिम्मेदार नहीं थे लेकिन उन्हें अपने वरिष्ठ अधिकारियों को समय पर सूचना न देने का दोष सिद्ध माना गया। अनुशासनात्मक प्राधिकरण ने इस आधार पर कांस्टेबल पर पांच वार्षिक वेतन वृद्धि स्थायी रूप से रोकने की सजा सुनाई थी। बाद में अपीलीय प्राधिकरण ने इसे घटाकर दो वेतन वृद्धियां स्थायी प्रभाव से रोकने तक सीमित कर दिया। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि घटना के बाद डीडीआर दर्ज कराई गई थी और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी थी। लाइका के लापता होने का कारण बताया गया कि पड़ोस में विवाह समारोह चल रहा था जिसके दौरान वह स्वयं को मुक्त कर भाग गई। सुनवाई के दौरान यह तथ्य यह भी सामने आया कि उस व्यक्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई जिसकी प्रत्यक्ष कस्टडी में लाइका थी। कोर्ट ने कहा कि केवल सूचना में कथित देरी के लिए इतनी कठोर और स्थायी सजा देना न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता ने न केवल डीडीआर दर्ज करवाई, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों को भी सूचना दी थी, ऐसे में उस पर लगाया गया दंड अनुपातहीन है।
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