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Chandigarh-Haryana News: पराली प्रबंधन की प्रोत्साहन राशि से किसान संतुष्ट नहीं
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अरुण शर्मा
चंडीगढ़। हरियाणा में पराली प्रबंधन के लिए सरकार मोटा बजट खर्च कर रही है। किसानों को जागरूकता के लिए भी अभियान चलाए जा रहे हैं। पराली न जलाने के लिए प्रोत्साहित करने को अनुदान दिया जा रहा है लेकिन किसान पराली प्रबंधन के लिए दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि से पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हैं। किसानों की ओर से प्रोत्साहन राशि को कम से कम 3000 रुपये प्रति एकड़ करने की मांग उठने लगी है।
प्रदेश में कृषि एवं कल्याण विभाग दो तरह से पराली प्रबंधन के लिए अनुदान देता है। पहला तरीका तो यह है कि खेत के अंदर ही पराली का प्रबंधन करें यानी पराली के टुकड़े करके मिट्टी में ही मिला दें। दूसरा तरीका पराली की गांठें बनाकर बिक्री करें। पराली का उपयोग कंपनियों से लेकर गोशालाओं आदि में होता है। 2024-2025 तक नियम था कि प्रति एकड़ किसानों को 1000 रुपये का अनुदान सरकार देती थी।
बड़ी शर्त यही थी कि अनिवार्य रूप से किसानों को पराली का प्रबंधन करना होता था। अब वर्ष 2025-2026 के लिए सरकार ने अनुदान की राशि को बढ़ाकर 1200 रुपये प्रति एकड़ कर दिया है। इस बार राहत की बात यह है कि किसान पराली का प्रबंधन करें या न करें लेकिन पराली न जलाने वालों को अनिवार्य रूप से
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चंडीगढ़। हरियाणा में पराली प्रबंधन के लिए सरकार मोटा बजट खर्च कर रही है। किसानों को जागरूकता के लिए भी अभियान चलाए जा रहे हैं। पराली न जलाने के लिए प्रोत्साहित करने को अनुदान दिया जा रहा है लेकिन किसान पराली प्रबंधन के लिए दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि से पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हैं। किसानों की ओर से प्रोत्साहन राशि को कम से कम 3000 रुपये प्रति एकड़ करने की मांग उठने लगी है।
प्रदेश में कृषि एवं कल्याण विभाग दो तरह से पराली प्रबंधन के लिए अनुदान देता है। पहला तरीका तो यह है कि खेत के अंदर ही पराली का प्रबंधन करें यानी पराली के टुकड़े करके मिट्टी में ही मिला दें। दूसरा तरीका पराली की गांठें बनाकर बिक्री करें। पराली का उपयोग कंपनियों से लेकर गोशालाओं आदि में होता है। 2024-2025 तक नियम था कि प्रति एकड़ किसानों को 1000 रुपये का अनुदान सरकार देती थी।
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बड़ी शर्त यही थी कि अनिवार्य रूप से किसानों को पराली का प्रबंधन करना होता था। अब वर्ष 2025-2026 के लिए सरकार ने अनुदान की राशि को बढ़ाकर 1200 रुपये प्रति एकड़ कर दिया है। इस बार राहत की बात यह है कि किसान पराली का प्रबंधन करें या न करें लेकिन पराली न जलाने वालों को अनिवार्य रूप से
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