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Chandigarh-Haryana News: उत्तराखंड में बंदर पूंछ ग्लेशियर से खोदाई से जुटाए सरस्वती उद्गम के साक्ष्य

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Evidence of Saraswati's origin collected from excavations at Bandar Poonch glacier in Uttarakhand.
पंचकूला ​में सरस्वती बोर्ड के बोर्ड के डिप्टी चेयरमैन धूमन सिंह किरमच के साथ बैठक में शामिल वाड - फोटो : पंचकूला ​में सरस्वती बोर्ड के बोर्ड के डिप्टी चेयरमैन धूमन सिंह किरमच के साथ बैठक में शामिल वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी और सर्वे ऑफ़ इंडिया के अ​धिकारी। स्रोत बोर्ड कार्यालय
सरस्वती बोर्ड के साथ सर्वे ऑफ इंडिया और वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी ने की बैठक
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चंडीगढ़। सरस्वती नदी के उद्गम स्थल के साक्ष्य जुटाने के लिए नए सिरे से तैयारी है। अब जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई), वाडिया इंस्टीट्यूट देहरादून और सर्वे ऑफ इंडिया मिलकर कुछ नए तथ्यों पर काम करेंगे। खास बात यह है कि उत्तराखंड के पूंछ ग्लेशियर पर 50-60 फीट गहराई तक खोदाई होगी। यहां जल स्रोतों का विश्लेषण होगा। सर्वे आफ इंडिया के पास पिछले 150-200 वर्षों का जल स्तर का ब्योरा है, इसलिए उन जल स्रोतों का मिलान किया जाएगा।
सरस्वती बोर्ड के डिप्टी चेयरमैन धूमन सिंह किरमच ने बताया कि उत्तराखंड के बंदर पूंछ ग्लेशियर से टोंस नदी का उद्गम स्थल है, दूसरी भी कुछ नदियों का यहीं से उद्गम है। ऐसे में सरस्वती नदी का उद्गम स्थल ही नहीं बल्कि दूसरी भी नदियों की निकासी सरस्वती नदी से हो सकती है, ऐसी भी प्रबल संभावनाएं हैं। सरस्वती नदी में 12 माह जलस्रोत रहे, इसके लिए उत्तराखंड ग्लेशियर को लेकर आदिबद्री तक का क्षेत्र शोध से वंचित था। अब यह सभी संस्थाएं इसी शोध पर मिलकर काम करेंगी। वीरवार को पंचकूला कार्यालय पर महत्वपूर्ण बैठक में नए शोध की तैयारियों पर आधारित बैठक हुई।
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जीएसआई की ओर से डॉ. संजीव कुमार, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी (डब्ल्यूआईएचजी) के प्रतिनिधि के अलावा सर्वे आफ इंडिया के निदेशक संजय कुमार व एचएसएचडीबी (हरियाणा स्टेट हेरिटेज डेवलपमेंट बोर्ड), जोगेंदर चाैहान मुख्य अभियंता (सेवा निवृत्त) हिमाचल प्रदेश आदि शामिल रहे।
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पांच वर्षों के आंकड़ों का होगा विश्लेषण
धूमन सिंह ने बताया कि उत्तराखंड, हिमाचल, हरियाणा, राजस्थान के अलावा इन क्षेत्रों में आने वाले ग्लेशियर के अलावा रण आफ कच्छ तक सरस्वती के साथ-साथ कोई चैनल हैं तो उन्हें लेकर भी काम होगा। जीएसआई लखनऊ के डिप्टी डायरेक्टर संजीव कुमार व दूसरे अधिकारियों ने पांच वर्षों के अध्ययन के निष्कर्ष प्रस्तुत किए। जीएसआई टीम ने 150 किलोमीटर लंबे यमुनानगर-कुरुक्षेत्र शुत्राना चैनल और यमुना नदी से इसकी अपस्ट्रीम कनेक्टिविटी का भी भू-भौतिकीय सर्वेक्षण के माध्यम से वर्णन किया। इस दाैरान यह भी सुझाव दिया गया कि पांच वर्षों के आंकड़ों की विस्तृत जांच और शोध भी किए जाएं।
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