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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Demand for Haryana's Basmati rice will increase due to the breakdown of the Indus Water Treaty.

Chandigarh-Haryana News: सिंधु जल संधि टूटने से हरियाणा के बासमती चावल की बढ़ेगी मांग

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सिंधु का पानी बंद होने से पाकिस्तान में बासमती चावल की पैदावार पर पड़ेगा असर
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पाकिस्तान में बासमती का उत्पादन घटने का फायदा भारत के कारोबारियों को मिलने की उम्मीद
3.67 मिलियन मीट्रिक टन बासमती चावल का उत्पादन पिछली बार हरियाणा में हुआ था, इसमें से 2.5 मिलियन मीट्रिक टन का निर्यात हुआ
चंडीगढ़। पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर हर तरफ से करारा प्रहार किया है। इसी कड़ी में भारत के पाकिस्तान से सिंधु जल संधि को तोड़ने पर हरियाणा के बासमती चावल कारोबारी काफी खुश हैं। उन्हें उम्मीद है कि सिंधु नदी का पानी बंद होने से पाकिस्तान में बासमती चावल की पैदावार घटने की उम्मीद है। इससे भारत के बासमती चावल की मांग बढ़ेगी।
हरियाणा राइस मिल एक्सपोर्ट्स एसोसिएशन के प्रधान सुशील जैन ने बताया कि बासमती चावल उत्पादन में भारत पहले और पाकिस्तान दूसरा बड़ा देश है। पाकिस्तान में सालाना करीब 2 से 4 मिलियन मीट्रिक टन बासमती चावल उत्पादन होता है। पाकिस्तान का 90 फीसदी बासमती चावल पंजाब प्रांत में होता है। यहां के ज्यादातर किसान सिंचाई के लिए सिंधु नदी के पानी पर निर्भर हैं। सिंधु नदी का पानी बंद होने से इन किसानों को को बासमती चावल से मुंह मोड़ना होगा।
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सुशील जैन ने बताया कि पाकिस्तान में पानी की कमी से बासमती चावल की पैदावार कम होना स्वाभाविक है। इससे भारता के बासमती के दाम बढ़ेंगे। उन्होंने बताया कि हरियाणा बासमती चावल के उत्पादन और निर्यात में सबसे अहम राज्य है। भारत में 2023-24 में 11 मिलियन मीट्रिक टन बासमती चावल का उत्पादन हुआ था, जिसमें 5.24 मिलियन मीट्रिक टन बासमती चावल का निर्यात किया गया। इसकी कीमत 5.84 बिलियन अमेरिकी डॉलर थी। इसमें से हरियाणा में 3.67 मिलियन मीट्रिक टन बासमती चावल का उत्पादन हुआ, जोकि कुल उत्पादन का तकरीबन 40 फीसदी है। प्रदेश से कुल 2.5 मिलियन मीट्रिक टन बासमती चावल का निर्यात हुआ था।
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160 देशों में बासमती चावल का निर्यात

हरियाणा में पैदा होने बासमती चावल की दुनिया भर में अत्यधिक मांग है। लगभग 160 देशों में यहां से बासमती चावल निर्यात किया जा रहा है। इनमें खाड़ी देशों के अलावा श्रीलंका, नेपाल, इटली, थाईलैंड, स्पेन, चीन, अफ्रीका, संयुक्त राज्य अमेरिका और कई यूरोपीय देश शामिल हैं। हरियाणा में पैदा होने वाले बासमती चावल की मांग हर साल लगातार बढ़ रही है।




787 हजार हेक्टेयर में 10 किस्मों की पैदावार

प्रदेश में बासमती चावल की 10 किस्में होती हैं, इनका रकबा 787 हजार हेक्टेयर है। इसमें पंचकूला से लेकर पानीपत तक का क्षेत्र शामिल है। करनाल, अंबाला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, कैथल और पानीपत प्रमुख जिले हैं। करनाल क्षेत्र को बेहतरीन गुणवत्ता वाले बासमती चावल के लिए जाना जाता है।
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