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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Delay in payment of statutory retirement benefits is unacceptable under any circumstances: High Court, Court News, Haryana News

वैधानिक सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान में देरी किसी सूरत में स्वीकार नहीं : हाईकोर्ट

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-राशि समय पर न देना प्रशासनिक लापरवाही के साथ ही कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों का हनन
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-सेवानिवृत्त कर्मचारियों की रोकी गई छुट्टी नकदीकरण राशि पर ब्याज का आदेश
अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि वैधानिक सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान में देरी को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने आदेश में कहा कि स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले कर्मचारियों की प्रिविलेज लीव नकदीकरण समय पर न करना न केवल प्रशासनिक लापरवाही है बल्कि कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन है।
अजीत सिंह व अन्य ने अदालत को बताया कि उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी लेकिन इसके बावजूद बैंक/प्राधिकरण द्वारा उनकी छुट्टी नकदीकरण की वैध राशि रोक ली गई। कर्मचारियों का कहना था कि समान परिस्थितियों में अन्य कर्मचारियों को यह लाभ दे दिया गया जबकि उन्हें बिना किसी ठोस और न्यायोचित कारण के वंचित रखा गया। बैंक की ओर से 13 दिसंबर 2024 के एक पूर्व आदेश का हवाला देते हुए बताया गया कि एक याचिकाकर्ता को भुगतान कर दिया गया है और शेष को जल्द भुगतान कर दिया जाएगा। हालांकि, बाद में यह तथ्य सामने आया कि मूल राशि तो दी गई लेकिन लंबे समय तक रोके रखने के बावजूद उस पर कोई ब्याज अदा नहीं किया गया। इस पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि देरी की भरपाई केवल ब्याज देकर ही की जा सकती है।
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कोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान में दो महीने से अधिक की देरी होती है, तो कर्मचारी ब्याज पाने का पूर्ण अधिकारी है। अदालत ने टिप्पणी की कि सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारी को अपने पैसों पर पहला और वैधानिक अधिकार होता है। हाईकोर्ट ने याचिकाओं को स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से भुगतान किया जाए। यह ब्याज उनकी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की तारीख से दो महीने बाद से लेकर वास्तविक भुगतान की तारीख तक देय होगा। साथ ही अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया कि पूरी राशि तीन सप्ताह के भीतर अदा की जाए। हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वैध अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार की प्रशासनिक मनमानी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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