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गाय का वध सार्वजनिक शांति के लिए खतरा: हाईकोर्ट ने खारिज की आसिफ की जमानत याचिका, आरोपी पर तीन एफआईआर
Tue, 26 Aug 2025 02:58 PM IST
अंकेश ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Tue, 26 Aug 2025 02:58 PM IST
सार
गोहत्या के एक मामले में पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए टिप्पणी की कि गाय को भारत की धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक धरोहर माना जाता है। इसका वध केवल एक अपराध नहीं बल्कि सामाजिक सौहार्दपूर्ण और सार्वजनिक शांति के लिए गंभीर खतरा है।
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high court
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने गोहत्या के आरोपी आसिफ की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि गाय को भारत की धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक धरोहर माना जाता है। इसका वध केवल एक अपराध नहीं बल्कि सामाजिक सौहार्दपूर्ण और सार्वजनिक शांति के लिए गंभीर खतरा है। कोर्ट ने आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड और आदतन अपराध की प्रवृत्ति को याचिका खारिज करने का आधार बनाया।
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हरियाणा पुलिस के अनुसार नूंह के रहने वाले आसिफ पर आरोप है कि वह दो गायों को हरियाणा से राजस्थान ले जाकर उनकी हत्या करने की योजना बना रहा था। यह कार्य हरियाणा गोवंश संरक्षण एवं गो संवर्धन अधिनियम, 2015 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 का उल्लंघन है। पुलिस ने बताया कि आसिफ का आपराधिक इतिहास रहा है और उसके खिलाफ पहले भी गोहत्या से संबंधित तीन एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। इनमें उसे जमानत मिली थी।
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हाईकोर्ट ने कहा कि गाय भारत की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है। संविधान का अनुच्छेद 51(ए)(जी) सभी नागरिकों को जीव-जंतुओं के प्रति करुणा का भाव रखने को बाध्य करता है। कोर्ट ने पाया कि आसिफ ने पहले जमानत का दुरुपयोग किया और बार-बार गोहत्या जैसे अपराधों में शामिल रहा।
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अदालत ने कहा कि अग्रिम जमानत निर्दोष लोगों को अन्यायपूर्ण गिरफ्तारी से बचाने के लिए है, न कि आदतन अपराधियों को कानून से बचाने का उपकरण। कोर्ट ने माना कि जमानत देने से आसिफ जांच में हस्तक्षेप या साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकता है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर देते हुए कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में सख्ती जरूरी है। व्यक्तिगत स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है लेकिन बार-बार अपराध की प्रवृत्ति दिखाने वाले व्यक्ति को इसका लाभ नहीं दिया जा सकता।