फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Caste and subcaste are being asked in the application for Congress district presidents

Chandigarh-Haryana News: कांग्रेस जिलाध्यक्षों के आवेदन में पूछी जा रही जाति व उपजाति, प्रभारी बोले-सबको मौका देंगे

विज्ञापन
कांग्रेस का संगठन विस्तार :
विज्ञापन


- प्रदेश में पहली बार केंद्रीय पर्यवेक्षकों के नेतृत्व में कांग्रेस के संगठन विस्तार की नई प्रक्रिया लागू

कुलदीप शुक्ला
चंडीगढ़। 11 साल बाद प्रदेश कांग्रेस के संगठन विस्तार के लिए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष व सांसद राहुल गांधी के निर्देशानुसार पहली बार नई प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इस बार जिलाध्यक्ष पद के आवेदकों से उनकी जाति-उपजाति पूछी जा रही है। जिला अध्यक्ष बनने के इच्छुक नेताओं को फॉर्म में अपना राजनैतिक करियर, वर्तमान पद सहित अन्य विकल्पों के अतिरिक्त अपनी जाति और उपजाति भी बतानी होगी।
प्रदेश कांग्रेस प्रभारी बीके हरिप्रसाद ने कहा कि पार्टी में सभी वर्ग के नेताओं को मौका देने के लिए उनकी जाति व उपजाति पूछी जा रहा है। आवेदन फॉर्म में जाति-उपजाति पूछने का मतलब साफ है कि अगर आप ब्राह्मण हैं तो उसमें भी आपका क्या सरनेम है। इसी तरह आप ठाकुर, जाट, बनिया, एससी-बीसी, ओबीसी की जाति से हैं तो उसमें भी आपका सरनेम क्या है। हरिप्रसाद ने कहा कि पार्टी से सभी वर्ग के नेता जुड़े हुए हैं। कई बार कई नेताओं को पार्टी के प्रति अथाह समर्पण, त्याग और मेहनत के बावजूद मौका नहीं मिलता है। इन्हीं लोगों को पार्टी में मौका देने के लिए फॉर्म में जाति और उपजाति पूछी जा रही है।
विज्ञापन


जातिगत कार्ड खेलने की तैयारी
प्रदेश में कांग्रेस जातिगत कार्ड खेलने की तैयारी में है। संगठन विस्तार में पहले मौका नहीं पाने वाले विशेष लोगों को वरियता भी मिलेगी। 22 केंद्रीय पर्यवेक्षकों के नेतृत्व में एक-एक जिले और कस्बे में पुराने कांग्रेसियों, पूर्व मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और अन्य नेताओं से फीडबैक लिया जा रहा है। शीर्ष स्तर पर तैयार होने वाली नियुक्तियों की सूची में वरियता वाले नेताओं के नाम को नकारा नहीं जा सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन


नेताओं की एफबी, एक्स हैंडल पर एआईसीसी की नजर
सिर्फ जमीनी स्तर पर आवेदकों के बारे में पर्यवेक्षक जानकारी नहीं जुटा रहे हैं, बल्कि उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स को भी ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के आईटी सेल की टीम खंगाल रही है। साथ ही फॉर्म में आवेदक से उनके नाम के फेसबुक, एक्स हैंडल और अन्य सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी मांगी गई है।



केंद्रीय पर्यवेक्षकों के लिए सिरदर्द बन रहे कई स्थानीय नेता
संगठन विस्तार की प्रक्रिया की शुरुआत से ही केंद्रीय पर्यवेक्षकों के सामने स्थानीय नेताओं के बीच गुटबाजी और अनबन खुलेआम उजागर हो रही है। केंद्रीय पर्यवेक्षकों के लिए पूरी तरह से अनजान स्थानीय नेता उनके लिए जगह-जगह सिरदर्द बन रहे हैं। जबकि, किसी भी वरिष्ठ नेता को दूसरे जिलों में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं है। पर्यवेक्षकों को प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के सहयोग के लिए शीर्ष नेताओं से अनुमति पास करवानी होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed