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Chandigarh-Haryana News: गैर एनसीआर जिलों में ईंट भट्टों ने शुरू की 20 फीसदी बायोमास को-फायरिंग
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- फोटो
वायु प्रदूषण नियंत्रण के उपायों की समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव बोले-राज्य सरकार ठोस रणनीति के साथ आगे बढ़ रही
- ई-बसों और धूल नियंत्रण पर बड़ा फोकस, दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण पर सख्ती
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश के गैर एनसीआर जिलों में भी ईंट भट्टों ने अनिवार्य 20 फीसदी बायोमास को-फायरिंग शुरू कर दी है। इससे पराली के वैकल्पिक उपयोग को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम होगी। साथ ही एक्स-सीटू पराली प्रबंधन को गति मिली है जहां पराली का उपयोग पेलेटाइजेशन यूनिट्स, थर्मल पावर प्लांट, ईंट भट्टों और विभिन्न उद्योगों में किया जा रहा है। झज्जर, कुरुक्षेत्र, अंबाला, फतेहाबाद और पानीपत में स्थापित कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट बड़ी मात्रा में कृषि अवशेषों को स्वच्छ ऊर्जा में परिवर्तित कर रहे हैं।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए चल रहे उपायों की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार बहुस्तरीय और ठोस रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है। खेतों में पराली प्रबंधन से लेकर स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, औद्योगिक अनुपालन और शहरी धूल नियंत्रण तक हर मोर्चे पर एक्शन तेज किया गया है।
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी कार्यक्रम में प्रगति के तहत विभिन्न खरीद मॉडल्स के तहत 800 से अधिक नई इलेक्ट्रिक बसों को स्वीकृति दी जा चुकी है। साथ ही एनसीआर जिलों से पुरानी बीएस-तीन और बीएस-चार डीजल बसों को बाहर स्थानांतरित किया गया है जिससे शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण कम होने की उम्मीद है।
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शहरों में धूल नियंत्रण के लिए एनसीआर के चिह्नित हॉटस्पॉट्स पर मैकेनिकल रोड स्वीपर, वाटर स्प्रिंकलर और एंटी-स्मॉग गन की तैनाती की गई है। प्रमुख सड़कों को पक्का करने, कच्चे रास्तों को खत्म करने और हरित आवरण बढ़ाने के लिए विस्तृत कार्य योजनाएं वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को भेजी गई हैं।
बैठक में बताया गया कि दिसंबर 2025 तक 14 लाख मीट्रिक टन से अधिक पुराने कचरे के निस्तारण का लक्ष्य रखा गया है। गुरुग्राम और फरीदाबाद में नए वेस्ट टू फ्यूल संयंत्र प्रस्तावित हैं जिससे प्रसंस्करण क्षमता बढ़ेगी। औद्योगिक अनुपालन के तहत ऑनलाइन निरंतर उत्सर्जन निगरानी प्रणाली, डीजी सेट के रेट्रोफिटमेंट और थर्मल पावर प्लांटों द्वारा उत्सर्जन मानकों के पालन पर भी सख्ती की जा रही है।
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वायु प्रदूषण नियंत्रण के उपायों की समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव बोले-राज्य सरकार ठोस रणनीति के साथ आगे बढ़ रही
- ई-बसों और धूल नियंत्रण पर बड़ा फोकस, दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण पर सख्ती
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश के गैर एनसीआर जिलों में भी ईंट भट्टों ने अनिवार्य 20 फीसदी बायोमास को-फायरिंग शुरू कर दी है। इससे पराली के वैकल्पिक उपयोग को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम होगी। साथ ही एक्स-सीटू पराली प्रबंधन को गति मिली है जहां पराली का उपयोग पेलेटाइजेशन यूनिट्स, थर्मल पावर प्लांट, ईंट भट्टों और विभिन्न उद्योगों में किया जा रहा है। झज्जर, कुरुक्षेत्र, अंबाला, फतेहाबाद और पानीपत में स्थापित कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट बड़ी मात्रा में कृषि अवशेषों को स्वच्छ ऊर्जा में परिवर्तित कर रहे हैं।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए चल रहे उपायों की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार बहुस्तरीय और ठोस रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है। खेतों में पराली प्रबंधन से लेकर स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, औद्योगिक अनुपालन और शहरी धूल नियंत्रण तक हर मोर्चे पर एक्शन तेज किया गया है।
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इलेक्ट्रिक मोबिलिटी कार्यक्रम में प्रगति के तहत विभिन्न खरीद मॉडल्स के तहत 800 से अधिक नई इलेक्ट्रिक बसों को स्वीकृति दी जा चुकी है। साथ ही एनसीआर जिलों से पुरानी बीएस-तीन और बीएस-चार डीजल बसों को बाहर स्थानांतरित किया गया है जिससे शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण कम होने की उम्मीद है।
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शहरों में धूल नियंत्रण के लिए एनसीआर के चिह्नित हॉटस्पॉट्स पर मैकेनिकल रोड स्वीपर, वाटर स्प्रिंकलर और एंटी-स्मॉग गन की तैनाती की गई है। प्रमुख सड़कों को पक्का करने, कच्चे रास्तों को खत्म करने और हरित आवरण बढ़ाने के लिए विस्तृत कार्य योजनाएं वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को भेजी गई हैं।
बैठक में बताया गया कि दिसंबर 2025 तक 14 लाख मीट्रिक टन से अधिक पुराने कचरे के निस्तारण का लक्ष्य रखा गया है। गुरुग्राम और फरीदाबाद में नए वेस्ट टू फ्यूल संयंत्र प्रस्तावित हैं जिससे प्रसंस्करण क्षमता बढ़ेगी। औद्योगिक अनुपालन के तहत ऑनलाइन निरंतर उत्सर्जन निगरानी प्रणाली, डीजी सेट के रेट्रोफिटमेंट और थर्मल पावर प्लांटों द्वारा उत्सर्जन मानकों के पालन पर भी सख्ती की जा रही है।