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रिश्वत लेने वाले अधिकारी की एसीआर में सर्वोत्तम टिप्पणियां, जांच करें डीजीपी : हाईकोर्ट
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-रिश्वत लेने का वीडियो हुआ था सोशल मीडिया पर वायरल
-इस मामले में एफआईआर दर्ज न होने व मामूली सजा पर कोर्ट ने उठाए सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। एएसआई के 1,000 की रिश्वत लेते हुए वायरल वीडियो के बावजूद एसपी द्वारा उसकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट सर्वोत्तम टिप्पणियां दर्ज करने व इस मामले में कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं करने पर हाईकोर्ट ने एसपी को फटकार लगाई है। कोर्ट ने डीजीपी को एसीआर दर्ज करने वाले अधिकारी के खिलाफ जांच का आदेश दिया है। यह याचिका 20 अगस्त 2025 के उस आदेश को रद्द करने की मांग करते हुए दायर की गई थी जिसके तहत निंदा की सजा के आधार पर 1 अप्रैल 2020 से 18 मार्च 2020 की अवधि के लिए याची की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट को कम कर दिया था। याचिकाकर्ता बिजेंद्र सिंह को हांसी में एक महिला से 1,000 रुपये लेते हुए वीडियो में देखा गया था जो वायरल हो गया था। वीडियो वायरल होने के बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई थी। विभागीय कार्रवाई में यह स्थापित हुआ कि याचिकाकर्ता ने एक महिला से 1,000 रुपये स्वीकार किए थे जो दोपहिया वाहन पर पीछे बैठी थी। उक्त वाहन 10-11 साल का लड़का चला रहा था। उसने हेलमेट नहीं पहना हुआ था। याचिकाकर्ता को कथित कदाचार का दोषी पाया गया। याची ने अपनी गलती स्वीकार की और माफ़ी मांगते हुए कहा कि उन्होंने चेतावनी देकर गाड़ी छोड़ दी थी और थाना प्रभारी के कहने पर 1,000 रुपये वापस कर दिए थे। अनुशासनात्मक प्राधिकारी ने आदेश में, याचिकाकर्ता को कथित अपराध का दोषी ठहराते हुए, आनुपातिक दंड नहीं दिया और निंदा की सज़ा देकर कार्यवाही का निपटारा कर दिया। कोर्ट ने पाया कि जिस अधिकारी ने उसके कृत्य के लिए निंदा का आदेश जारी किया था उसी ने अप्रैल 2020 से दिसंबर 2020 तक की अवधि के लिए याचिकाकर्ता की एसीआर में उसे ईमानदार और विश्वसनीय अधिकारी घोषित किया।
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-इस मामले में एफआईआर दर्ज न होने व मामूली सजा पर कोर्ट ने उठाए सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। एएसआई के 1,000 की रिश्वत लेते हुए वायरल वीडियो के बावजूद एसपी द्वारा उसकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट सर्वोत्तम टिप्पणियां दर्ज करने व इस मामले में कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं करने पर हाईकोर्ट ने एसपी को फटकार लगाई है। कोर्ट ने डीजीपी को एसीआर दर्ज करने वाले अधिकारी के खिलाफ जांच का आदेश दिया है। यह याचिका 20 अगस्त 2025 के उस आदेश को रद्द करने की मांग करते हुए दायर की गई थी जिसके तहत निंदा की सजा के आधार पर 1 अप्रैल 2020 से 18 मार्च 2020 की अवधि के लिए याची की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट को कम कर दिया था। याचिकाकर्ता बिजेंद्र सिंह को हांसी में एक महिला से 1,000 रुपये लेते हुए वीडियो में देखा गया था जो वायरल हो गया था। वीडियो वायरल होने के बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई थी। विभागीय कार्रवाई में यह स्थापित हुआ कि याचिकाकर्ता ने एक महिला से 1,000 रुपये स्वीकार किए थे जो दोपहिया वाहन पर पीछे बैठी थी। उक्त वाहन 10-11 साल का लड़का चला रहा था। उसने हेलमेट नहीं पहना हुआ था। याचिकाकर्ता को कथित कदाचार का दोषी पाया गया। याची ने अपनी गलती स्वीकार की और माफ़ी मांगते हुए कहा कि उन्होंने चेतावनी देकर गाड़ी छोड़ दी थी और थाना प्रभारी के कहने पर 1,000 रुपये वापस कर दिए थे। अनुशासनात्मक प्राधिकारी ने आदेश में, याचिकाकर्ता को कथित अपराध का दोषी ठहराते हुए, आनुपातिक दंड नहीं दिया और निंदा की सज़ा देकर कार्यवाही का निपटारा कर दिया। कोर्ट ने पाया कि जिस अधिकारी ने उसके कृत्य के लिए निंदा का आदेश जारी किया था उसी ने अप्रैल 2020 से दिसंबर 2020 तक की अवधि के लिए याचिकाकर्ता की एसीआर में उसे ईमानदार और विश्वसनीय अधिकारी घोषित किया।