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Chandigarh-Haryana News: सैनिक की मौत पर मां को बैंक व बीमा कंपनी ने लाभ से किया वंचित, मामला पहुंचा हाईकोर्ट
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-हाईकोर्ट ने याचिका पर वित्त और रक्षा मंत्रालयों को नोटिस जारी कर मांगा जवाब
-डिफेंस सैलरी पैकेज के तहत मिलने वाली बीमा राशि से किया गया था इन्कार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सेवा के दौरान मृत्यु के मामले में सैनिक की मां को बीमा राशि से इन्कार करने का मामला पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। कोर्ट ने वित्त और रक्षा मंत्रालयों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
बिमला देवी ने याचिका दाखिल करते हुए बताया कि सेना में तैनात उनके बेटे की ड्यूटी के दौरान करंट लगने से मौत हो गई थी। सेना की ओर से गठित स्टेच्युटरी कोर्ट आफ इन्क्वायरी ने इसे सेवा से संबंधित मृत्यु माना था। इसके बावजूद स्टेट बैंक आफ इंडिया और ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी ने डिफेंस सैलरी पैकेज के तहत मिलने वाली बीमा राशि देने से इन्कार कर दिया। याचिका में कहा गया है कि बैंक और बीमा कंपनी ने अपने पैनल डाॅक्टरों की राय का हवाला देते हुए दावा खारिज किया और कहा कि मृत्यु का कारण करंट नहीं था।
याची ने कहा कि जब सेना जैसी संस्था किसी मृत्यु को सेवा से जोड़ती है तो बैंक या बीमा कंपनी को उस पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं होना चाहिए। बीमा पाॅलिसी की शर्तों और लाभों को लेकर उन्हें कभी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। बार-बार चक्कर लगाने के बावजूद न तो संतोषजनक जवाब मिला और न ही बकाया राशि जारी की गई। मजबूरी में उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। याचिका में हाईकोर्ट से मांग की गई है कि बैंक और बीमा कंपनी को बकाया भुगतान जारी करने के निर्देश दिए जाएं। साथ ही केंद्र सरकार को यह आदेश देने का भी आग्रह किया गया है कि सेना मुख्यालय से परामर्श कर ऐसे स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए जाएं ताकि भविष्य में किसी शहीद के परिवार को इस तरह की परेशानी न झेलनी पड़े।
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-डिफेंस सैलरी पैकेज के तहत मिलने वाली बीमा राशि से किया गया था इन्कार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सेवा के दौरान मृत्यु के मामले में सैनिक की मां को बीमा राशि से इन्कार करने का मामला पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। कोर्ट ने वित्त और रक्षा मंत्रालयों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
बिमला देवी ने याचिका दाखिल करते हुए बताया कि सेना में तैनात उनके बेटे की ड्यूटी के दौरान करंट लगने से मौत हो गई थी। सेना की ओर से गठित स्टेच्युटरी कोर्ट आफ इन्क्वायरी ने इसे सेवा से संबंधित मृत्यु माना था। इसके बावजूद स्टेट बैंक आफ इंडिया और ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी ने डिफेंस सैलरी पैकेज के तहत मिलने वाली बीमा राशि देने से इन्कार कर दिया। याचिका में कहा गया है कि बैंक और बीमा कंपनी ने अपने पैनल डाॅक्टरों की राय का हवाला देते हुए दावा खारिज किया और कहा कि मृत्यु का कारण करंट नहीं था।
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याची ने कहा कि जब सेना जैसी संस्था किसी मृत्यु को सेवा से जोड़ती है तो बैंक या बीमा कंपनी को उस पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं होना चाहिए। बीमा पाॅलिसी की शर्तों और लाभों को लेकर उन्हें कभी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। बार-बार चक्कर लगाने के बावजूद न तो संतोषजनक जवाब मिला और न ही बकाया राशि जारी की गई। मजबूरी में उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। याचिका में हाईकोर्ट से मांग की गई है कि बैंक और बीमा कंपनी को बकाया भुगतान जारी करने के निर्देश दिए जाएं। साथ ही केंद्र सरकार को यह आदेश देने का भी आग्रह किया गया है कि सेना मुख्यालय से परामर्श कर ऐसे स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए जाएं ताकि भविष्य में किसी शहीद के परिवार को इस तरह की परेशानी न झेलनी पड़े।
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