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Chandigarh-Haryana News: चीनी मिलों के घाटे को कम करने के लिए बनेगी समन्वय समिति
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फोटो -
सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने विशेष कार्ययोजना तैयार करने के दिए निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश की सहकारी चीनी मिलों को लगातार हो रहे घाटे से उबारने के लिए सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने सहकारी चीनी मिल संघ को विशेष कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही जल्द ही एक समन्वय समिति गठित की जाएगी जो प्रदेश की सभी सहकारी चीनी मिलों का निरीक्षण कर उनकी स्थिति का आकलन करेगी और घाटा कम करने के उपायों पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करेगी। सहकारिता मंत्री ने चंडीगढ़ में विभाग से जुड़ी मुख्यमंत्री की घोषणाओं और बजट घोषणाओं की समीक्षा बैठक की।
सहकारिता मंत्री ने कहा कि चीनी मिलों के घाटे का सीधा असर गन्ना उत्पादक किसानों और श्रमिकों पर पड़ता है। ऐसे में मिलों को आर्थिक रूप से मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि समन्वय समिति तकनीकी, प्रबंधन और लागत से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा कर व्यवहारिक समाधान सुझाए। डॉ. शर्मा ने गन्ना किसानों के सामने आ रही श्रमिक समस्या पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग के साथ समन्वय कर गन्ना कटाई के लिए हार्वेस्टिंग मशीनें सब्सिडी पर उपलब्ध कराई जाएं ताकि किसानों की निर्भरता श्रमिकों पर कम हो और लागत भी घटे।
बैठक में पानीपत में 200 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित एथेनॉल संयंत्र के काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही अन्य सहकारी चीनी मिलों में भी एथेनॉल संयंत्र स्थापित करने की संभावनाओं पर रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया। मंत्री का कहना था कि एथेनॉल उत्पादन से चीनी मिलों की आय बढ़ेगी और घाटा कम करने में मदद मिलेगी। मंत्री ने अनाज भंडारण क्षेत्र में सहकारी समितियों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय की नई सहकारिता नीति के तहत प्रदेश गंभीरता से काम कर रहा है। मुख्यमंत्री पैक्सों से शुरुआत करते हुए इच्छुक सहकारी समितियों को अनाज भंडारण के क्षेत्र में आगे आने का अवसर दिया जाएगा।
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उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने हैफेड को नोडल एजेंसी बनाकर 10 लाख मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम निर्माण के लिए अधिकृत किया है। अब तक 3.35 लाख मीट्रिक टन क्षमता के गोदामों को मंजूरी दी जा चुकी है जबकि 1.38 लाख मीट्रिक टन के प्रस्ताव राज्यस्तरीय समिति को भेजे गए हैं।
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सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने विशेष कार्ययोजना तैयार करने के दिए निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश की सहकारी चीनी मिलों को लगातार हो रहे घाटे से उबारने के लिए सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने सहकारी चीनी मिल संघ को विशेष कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही जल्द ही एक समन्वय समिति गठित की जाएगी जो प्रदेश की सभी सहकारी चीनी मिलों का निरीक्षण कर उनकी स्थिति का आकलन करेगी और घाटा कम करने के उपायों पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करेगी। सहकारिता मंत्री ने चंडीगढ़ में विभाग से जुड़ी मुख्यमंत्री की घोषणाओं और बजट घोषणाओं की समीक्षा बैठक की।
सहकारिता मंत्री ने कहा कि चीनी मिलों के घाटे का सीधा असर गन्ना उत्पादक किसानों और श्रमिकों पर पड़ता है। ऐसे में मिलों को आर्थिक रूप से मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि समन्वय समिति तकनीकी, प्रबंधन और लागत से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा कर व्यवहारिक समाधान सुझाए। डॉ. शर्मा ने गन्ना किसानों के सामने आ रही श्रमिक समस्या पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग के साथ समन्वय कर गन्ना कटाई के लिए हार्वेस्टिंग मशीनें सब्सिडी पर उपलब्ध कराई जाएं ताकि किसानों की निर्भरता श्रमिकों पर कम हो और लागत भी घटे।
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बैठक में पानीपत में 200 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित एथेनॉल संयंत्र के काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही अन्य सहकारी चीनी मिलों में भी एथेनॉल संयंत्र स्थापित करने की संभावनाओं पर रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया। मंत्री का कहना था कि एथेनॉल उत्पादन से चीनी मिलों की आय बढ़ेगी और घाटा कम करने में मदद मिलेगी। मंत्री ने अनाज भंडारण क्षेत्र में सहकारी समितियों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय की नई सहकारिता नीति के तहत प्रदेश गंभीरता से काम कर रहा है। मुख्यमंत्री पैक्सों से शुरुआत करते हुए इच्छुक सहकारी समितियों को अनाज भंडारण के क्षेत्र में आगे आने का अवसर दिया जाएगा।
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उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने हैफेड को नोडल एजेंसी बनाकर 10 लाख मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम निर्माण के लिए अधिकृत किया है। अब तक 3.35 लाख मीट्रिक टन क्षमता के गोदामों को मंजूरी दी जा चुकी है जबकि 1.38 लाख मीट्रिक टन के प्रस्ताव राज्यस्तरीय समिति को भेजे गए हैं।