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पटरी पर नहीं चढ़ पा रही भिवानी-लोहारू सिंगल रेललाइन परियोजना
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संजय वर्मा
भिवानी। दक्षिणी हरियाणा के लोगों के लिए राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र तक जाने के लिए सीधी रेल सेवा मुहैया कराने की भिवानी-लोहारू रेल की महत्वाकांक्षी परियोजना पटरी पर नहीं चढ़ पा रही है। 60 किलोमीटर लंबी सिंगल रेललाइन डाले जाने की मांग पिछले ढाई दशक से उठ रही है।
लोहारू जैसे पिछड़े क्षेत्र के लिए यह मांग अति महत्वपूर्ण है। पूर्व सांसद श्रुति चौधरी भी संसद में इसकी पैरवी कर चुकी हैं, जबकि वर्तमान सांसद धर्मबीर का कहना है कि वे भी इस मामले को काफी गंभीरता से उठा रहे हैं। वहीं बीकानेर रेलमंडल के उच्चाधिकारियों का कहना है कि अब तक हरियाणा सरकार की तरफ से रेलवे के समक्ष ऐसा कोई मसौदा ही नहीं आया है।
दरअसल इस मुद्दे पर राजनीतिक पैरवी काफी कमजोर रही है। यही वजह है कि उसी समय मंजूर हुई एक दर्जन से अधिक रेल परियोजनाएं अब तक सिरे चढ़कर पूरी भी हो चुकी हैं, मगर भिवानी-लोहारू सिंगल रेललाइन परियोजना अब तक अधर में लटकी है। भिवानी से लोहारू के लिए सिंगल रेललाइन बिछाने की परियोजना की मांग पिछले 25 साल से उठ रही है। लोहारू क्षेत्र के लोगों के लिए भी यह रेललाइन काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां के पिछड़े क्षेत्र में रेललाइन डाले जाने के बाद व्यापारिक गतिविधियां तेज होगी और हिसार, भिवानी के लोगों के लिए राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के लिए भी सीधी रेल सेवा के द्वार खुल जाएंगे।
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छह से सात जगह होने थे ट्रेनों के ठहराव
भिवानी से लोहारू तक की दूरी करीब 60 किलोमीटर है। इस बीच सिंगल रेललाइन डाले जाने में छह से सात ठहराव भी ट्रेनों के लिए निश्चित किए जाने थे। जिनमें गांव लोहानी, कस्बा जुई, ढिगावा, सिंघानी शामिल हैं। इस परियोजना के सिरे चढ़ जाने के बाद इन कस्बों के लोगों के लिए भी ट्रेनों से आवागमन में आसानी और व्यापारिक गतिविधियों के लिए भी नए आयाम स्थापित होंगे।
कैरू में सीएम मनोहर लाल ने भी की थी घोषणा
फरवरी 2020 में मुख्यमंत्री मनोहर लाल के कैरू दौरे के दौरान भी भिवानी-लोहारू रेलवे लाइन का मुद्दा उठा था। उस समय भी सीएम ने इस परियोजना को सिरे चढ़ाने का आश्वासन दिया था। क्षेत्र के लोगों के साथ साथ दैनिक रेल यात्री जनकल्याण संघ पदाधिकारियों ने भी सीएम को इस मांग से जुड़ा मांगपत्र सौंपा था।
करीब 1200 करोड़ संभावित बजट से तैयार होनी थी परियोजना, अब नहीं बनी डीपीआर
भिवानी-लोहारू रेललाइन बिछाने पर करीब 1200 करोड़ के संभावित बजट की योजना तैयार की जानी थी। जिस पर अब तक डीपीआर भी तैयार नहीं हुई है।
25 साल से मांग
25 साल से भिवानी-लोहारू रेललाइन की मांग उठाई जा रही है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल, सांसद धर्मबीर, कृषि मंत्री जेपी दलाल के समक्ष भी यह मुद्दा काफी बार उठाया जा चुका है। रेल परियोजना के सिरे चढ़ने से लोहारू के पिछड़े इलाके में व्यापार व रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। वहीं राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र तक का सीधा रेल रूट भी मिलेगा। जिससे रेलवे को भी काफी फायदा होगा।
-महाबीर डालमिया, अध्यक्ष, दैनिक रेल यात्री एवं जनकल्याण संघ भिवानी।
मैं मामले को लेकर गंभीर हूं
भिवानी-लोहारू रेल लाइन का मामला मेरे संज्ञान में हैं और मैं काफी गंभीरता से इस मामले को संसद के साथ-साथ हरियाणा सरकार के समक्ष भी उठाता आ रहा हूं।
-धर्मबीर सिंह, सांसद, भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र।
सरकार ने आश्वासन के अलावा कुछ नहीं किया
भिवानी-लोहारू रेललाइन का मामला मैंने संसद में भी उठाया था और इसके बाद हरियाणा सरकार ने स्वीकृति देकर निर्माण की योजना तैयार की थी, लेकिन पिछले साल सात से सरकार ने इस मामले में केवल कोरे आश्वासनों के अलावा कुछ नहीं किया। यही वजह है कि क्षेत्र के लोगों की मांग अधूरी रह गई।
-श्रुति चौधरी, पूर्व सांसद, भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र।
हरियाणा सरकार ने नहीं भेजा मसौदा
भिवानी-लोहारू रेललाइन को लेकर हरियाणा सरकार की तरफ से अब तक कोई मसौदा नहीं आया है। रेलवे के समक्ष हरियाणा सरकार से इस तरह का कोई भी प्रस्ताव आता है तो उस पर आगे गंभीरता से संज्ञान लिया जाएगा।
-अनिल कुमार रैना, सीनियर डीसीएम, बीकानेर रेल मंडल।
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भिवानी। दक्षिणी हरियाणा के लोगों के लिए राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र तक जाने के लिए सीधी रेल सेवा मुहैया कराने की भिवानी-लोहारू रेल की महत्वाकांक्षी परियोजना पटरी पर नहीं चढ़ पा रही है। 60 किलोमीटर लंबी सिंगल रेललाइन डाले जाने की मांग पिछले ढाई दशक से उठ रही है।
लोहारू जैसे पिछड़े क्षेत्र के लिए यह मांग अति महत्वपूर्ण है। पूर्व सांसद श्रुति चौधरी भी संसद में इसकी पैरवी कर चुकी हैं, जबकि वर्तमान सांसद धर्मबीर का कहना है कि वे भी इस मामले को काफी गंभीरता से उठा रहे हैं। वहीं बीकानेर रेलमंडल के उच्चाधिकारियों का कहना है कि अब तक हरियाणा सरकार की तरफ से रेलवे के समक्ष ऐसा कोई मसौदा ही नहीं आया है।
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दरअसल इस मुद्दे पर राजनीतिक पैरवी काफी कमजोर रही है। यही वजह है कि उसी समय मंजूर हुई एक दर्जन से अधिक रेल परियोजनाएं अब तक सिरे चढ़कर पूरी भी हो चुकी हैं, मगर भिवानी-लोहारू सिंगल रेललाइन परियोजना अब तक अधर में लटकी है। भिवानी से लोहारू के लिए सिंगल रेललाइन बिछाने की परियोजना की मांग पिछले 25 साल से उठ रही है। लोहारू क्षेत्र के लोगों के लिए भी यह रेललाइन काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां के पिछड़े क्षेत्र में रेललाइन डाले जाने के बाद व्यापारिक गतिविधियां तेज होगी और हिसार, भिवानी के लोगों के लिए राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के लिए भी सीधी रेल सेवा के द्वार खुल जाएंगे।
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छह से सात जगह होने थे ट्रेनों के ठहराव
भिवानी से लोहारू तक की दूरी करीब 60 किलोमीटर है। इस बीच सिंगल रेललाइन डाले जाने में छह से सात ठहराव भी ट्रेनों के लिए निश्चित किए जाने थे। जिनमें गांव लोहानी, कस्बा जुई, ढिगावा, सिंघानी शामिल हैं। इस परियोजना के सिरे चढ़ जाने के बाद इन कस्बों के लोगों के लिए भी ट्रेनों से आवागमन में आसानी और व्यापारिक गतिविधियों के लिए भी नए आयाम स्थापित होंगे।
कैरू में सीएम मनोहर लाल ने भी की थी घोषणा
फरवरी 2020 में मुख्यमंत्री मनोहर लाल के कैरू दौरे के दौरान भी भिवानी-लोहारू रेलवे लाइन का मुद्दा उठा था। उस समय भी सीएम ने इस परियोजना को सिरे चढ़ाने का आश्वासन दिया था। क्षेत्र के लोगों के साथ साथ दैनिक रेल यात्री जनकल्याण संघ पदाधिकारियों ने भी सीएम को इस मांग से जुड़ा मांगपत्र सौंपा था।
करीब 1200 करोड़ संभावित बजट से तैयार होनी थी परियोजना, अब नहीं बनी डीपीआर
भिवानी-लोहारू रेललाइन बिछाने पर करीब 1200 करोड़ के संभावित बजट की योजना तैयार की जानी थी। जिस पर अब तक डीपीआर भी तैयार नहीं हुई है।
25 साल से मांग
25 साल से भिवानी-लोहारू रेललाइन की मांग उठाई जा रही है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल, सांसद धर्मबीर, कृषि मंत्री जेपी दलाल के समक्ष भी यह मुद्दा काफी बार उठाया जा चुका है। रेल परियोजना के सिरे चढ़ने से लोहारू के पिछड़े इलाके में व्यापार व रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। वहीं राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र तक का सीधा रेल रूट भी मिलेगा। जिससे रेलवे को भी काफी फायदा होगा।
-महाबीर डालमिया, अध्यक्ष, दैनिक रेल यात्री एवं जनकल्याण संघ भिवानी।
मैं मामले को लेकर गंभीर हूं
भिवानी-लोहारू रेल लाइन का मामला मेरे संज्ञान में हैं और मैं काफी गंभीरता से इस मामले को संसद के साथ-साथ हरियाणा सरकार के समक्ष भी उठाता आ रहा हूं।
-धर्मबीर सिंह, सांसद, भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र।
सरकार ने आश्वासन के अलावा कुछ नहीं किया
भिवानी-लोहारू रेललाइन का मामला मैंने संसद में भी उठाया था और इसके बाद हरियाणा सरकार ने स्वीकृति देकर निर्माण की योजना तैयार की थी, लेकिन पिछले साल सात से सरकार ने इस मामले में केवल कोरे आश्वासनों के अलावा कुछ नहीं किया। यही वजह है कि क्षेत्र के लोगों की मांग अधूरी रह गई।
-श्रुति चौधरी, पूर्व सांसद, भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र।
हरियाणा सरकार ने नहीं भेजा मसौदा
भिवानी-लोहारू रेललाइन को लेकर हरियाणा सरकार की तरफ से अब तक कोई मसौदा नहीं आया है। रेलवे के समक्ष हरियाणा सरकार से इस तरह का कोई भी प्रस्ताव आता है तो उस पर आगे गंभीरता से संज्ञान लिया जाएगा।
-अनिल कुमार रैना, सीनियर डीसीएम, बीकानेर रेल मंडल।