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6 लोकल रूटों पर थमा रोडवेज बसों का पहिया, 16 बसें बंद
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03 फोटो नागरिक अस्पताल में खड़ी मोबाइल एंबूलेंस बस जिसे अब रोडवेज के चालक चलाएगें। संवाद
- फोटो : Bhiwani
भिवानी। कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन से निपटने की तैयारी में रोडवेज विभाग ने चालक उधार क्या दिए, रूटों पर यात्री सेवाएं बहाल रख पाना भी भारी हो गया। रोडवेज के 31 चालक स्वास्थ्य विभाग में चले गए हैं, जिनकी वजह से छह लोकल रूटों पर रोडवेज बसों का पहिया थम गया। वहीं 16 बसें भी खड़ी हो गईं।
पहले से ही रोडवेज विभाग चालक-परिचालकों की कमी झेल रहा था, लेकिन चालक स्वास्थ्य विभाग को दिए जाने के बाद बस सेवा प्रभावित हो गई है। करीब 10 ग्रामीण रूटों पर केवल एक ही बस सुबह शाम चल रही है, अब इन रूटों पर भी चालकों की कमी से बसें बंद हो सकती हैं।
ओमिक्रॉन संक्रमित महामारी ने निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग अपनी कमर कस चुका है। इसी के चलते स्वास्थ्य विभाग ने दूसरे विभागों से भी संसाधनों की मदद जुटाई है। रोडवेज विभाग ने भी स्वास्थ्य विभाग को दो माह के लिए 31 चालक दिए हैं। रोडवेज के ये चालक अब रोडवेज की बसें नहीं बल्कि स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस चलाएंगे। ऐसे में पहले से ही लड़खड़ा रहीं यात्री सेवाएं भी हासिये पर आ गई हैं।
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भिवानी डिपो में 154 परिचालक और 159 रोडवेज चालक हैं, लेकिन 31 चालक स्वास्थ्य विभाग में चले जाने के बाद अब डिपो में केवल 128 चालक बचे हैं, यानी परिचालक ज्यादा और चालक कम हो गए हैं। किसी भी बस को रूट पर उतारने के लिए चालक की जरूरत है। मगर चालकों की कमी की वजह से बसें एक-एक कर कर्मशाला में ही खड़ी हो रही हैं।
28 बसें कंडम, 16 बसें चालक के इंतजार में खड़ीं
रोडवेज बेड़ा लगातार बुरे दौर से गुजर रहा है। दिसंबर तक डिपो की 28 बसें अपने दस साल की मियाद व तय किलोमीटर चलने के बाद कंडम हो गई हैं। इसी के साथ चालकों की कमी से अब 16 बसें कर्मशाला में ठीकठाक होने के बावजूद खड़ी हो गई हैं। फिलहाल यात्री सेवाओं का दारोमदार केवल 105 बसों और 128 चालकों के कंधों पर आ टिका है। रोडवेज विभाग ने ओवरटाइम भी बंद कर दिया है। इसकी वजह से अपनी शिफ्ट खत्म होने के बाद कर्मचारी सेवाएं नहीं दे पा रहे हैं।
ये लोकल रूट प्रभावित
चालक नहीं होने की वजह से रोडवेज के करीब छह लोकल रूट प्रभावित हो गए हैं। इनमें भिवानी-जींद, भिवानी-हिसार, भिवानी-लोहारू, भिवानी-चरखी दादरी, भिवानी-बहल, भिवानी-बवानीखेड़ा रूट शामिल हैं। इन रूटों पर अब रोडवेज बसों के काफी टाइम मिस होंगे, जिसका फायदा प्राइवेट बस चालकों को मिलेगा और वे इस आपदा में भी अवसर तलाशने की नीति पर खूब चांदी कूटेंगे।
इन रूटों पर भी चलेगी कैंची
फिलहाल रोडवेज की वाया ग्रामीण रूटों पर बसों की भारी कमी है। दस रूट तो ऐसे हैं, जहां सिर्फ एक ही रोडवेज बस जा रही है। इनमें सूई-बलियाली, भिवानी-बौंद, भिवानी- कुुंगड़, भैणी, भिवानी-बडेसरा, भिवानी-कलिंगा के रूट मुख्य तौर पर शामिल हैं। इन वाया ग्रामीण रूटों पर भी चालकों की कमी से कैंची चल सकती हैं, जिसके बाद इनमें से कुछ रूट तो रोडवेज बसों से ही महरूम हो जाएंगे।
तीन शिफ्टों में रोडवेज चालक चलाएंगे एंबुलेंस
ओमिक्रॉन से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अतिरिक्त एंबुलेंस का इंतजाम कर दिया है। मगर एंबुलेंस की स्टीयरिंग रोडवेज चालकों के हाथों में रहेगी। तीन शिफ्टों में रोडवेज कर्मचारी आपात ड्यूटी देते हुए एंबुलेंस चलाएंगे। इसमें आठ-आठ घंटे की तीन शिफ्ट बनाई हैं। शुरुआत में नौ एंबुलेंस रोडवेज कर्मचारी चलाएंगे। इसके अलावा सीएमओ व पीएमओ की गाड़ी भी रोडवेज चालक ही चलाएंगे। (संवाद)
परिस्थिति के अनुसार निपटेंगे
स्वास्थ्य विभाग को 31 चालक रिलीव कर सौंप दिए हैं। बड़ी संख्या में चालक दूसरे विभाग में भेजे जाने के बाद निश्चित तौर पर रोडवेज सेवा प्रभावित होगी, कुछ रूट बंद भी हो सकते हैं। फिलहाल इस व्यवस्था के परिणाम धीरे-धीरे हमारे सामने आएंगे, जिस पर परिस्थिति के अनुसार ही निपटने का प्रयास किया जाएगा।
-मनोज कुमार, महाप्रबंधक, भिवानी डिपो।
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पहले से ही रोडवेज विभाग चालक-परिचालकों की कमी झेल रहा था, लेकिन चालक स्वास्थ्य विभाग को दिए जाने के बाद बस सेवा प्रभावित हो गई है। करीब 10 ग्रामीण रूटों पर केवल एक ही बस सुबह शाम चल रही है, अब इन रूटों पर भी चालकों की कमी से बसें बंद हो सकती हैं।
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ओमिक्रॉन संक्रमित महामारी ने निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग अपनी कमर कस चुका है। इसी के चलते स्वास्थ्य विभाग ने दूसरे विभागों से भी संसाधनों की मदद जुटाई है। रोडवेज विभाग ने भी स्वास्थ्य विभाग को दो माह के लिए 31 चालक दिए हैं। रोडवेज के ये चालक अब रोडवेज की बसें नहीं बल्कि स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस चलाएंगे। ऐसे में पहले से ही लड़खड़ा रहीं यात्री सेवाएं भी हासिये पर आ गई हैं।
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भिवानी डिपो में 154 परिचालक और 159 रोडवेज चालक हैं, लेकिन 31 चालक स्वास्थ्य विभाग में चले जाने के बाद अब डिपो में केवल 128 चालक बचे हैं, यानी परिचालक ज्यादा और चालक कम हो गए हैं। किसी भी बस को रूट पर उतारने के लिए चालक की जरूरत है। मगर चालकों की कमी की वजह से बसें एक-एक कर कर्मशाला में ही खड़ी हो रही हैं।
28 बसें कंडम, 16 बसें चालक के इंतजार में खड़ीं
रोडवेज बेड़ा लगातार बुरे दौर से गुजर रहा है। दिसंबर तक डिपो की 28 बसें अपने दस साल की मियाद व तय किलोमीटर चलने के बाद कंडम हो गई हैं। इसी के साथ चालकों की कमी से अब 16 बसें कर्मशाला में ठीकठाक होने के बावजूद खड़ी हो गई हैं। फिलहाल यात्री सेवाओं का दारोमदार केवल 105 बसों और 128 चालकों के कंधों पर आ टिका है। रोडवेज विभाग ने ओवरटाइम भी बंद कर दिया है। इसकी वजह से अपनी शिफ्ट खत्म होने के बाद कर्मचारी सेवाएं नहीं दे पा रहे हैं।
ये लोकल रूट प्रभावित
चालक नहीं होने की वजह से रोडवेज के करीब छह लोकल रूट प्रभावित हो गए हैं। इनमें भिवानी-जींद, भिवानी-हिसार, भिवानी-लोहारू, भिवानी-चरखी दादरी, भिवानी-बहल, भिवानी-बवानीखेड़ा रूट शामिल हैं। इन रूटों पर अब रोडवेज बसों के काफी टाइम मिस होंगे, जिसका फायदा प्राइवेट बस चालकों को मिलेगा और वे इस आपदा में भी अवसर तलाशने की नीति पर खूब चांदी कूटेंगे।
इन रूटों पर भी चलेगी कैंची
फिलहाल रोडवेज की वाया ग्रामीण रूटों पर बसों की भारी कमी है। दस रूट तो ऐसे हैं, जहां सिर्फ एक ही रोडवेज बस जा रही है। इनमें सूई-बलियाली, भिवानी-बौंद, भिवानी- कुुंगड़, भैणी, भिवानी-बडेसरा, भिवानी-कलिंगा के रूट मुख्य तौर पर शामिल हैं। इन वाया ग्रामीण रूटों पर भी चालकों की कमी से कैंची चल सकती हैं, जिसके बाद इनमें से कुछ रूट तो रोडवेज बसों से ही महरूम हो जाएंगे।
तीन शिफ्टों में रोडवेज चालक चलाएंगे एंबुलेंस
ओमिक्रॉन से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अतिरिक्त एंबुलेंस का इंतजाम कर दिया है। मगर एंबुलेंस की स्टीयरिंग रोडवेज चालकों के हाथों में रहेगी। तीन शिफ्टों में रोडवेज कर्मचारी आपात ड्यूटी देते हुए एंबुलेंस चलाएंगे। इसमें आठ-आठ घंटे की तीन शिफ्ट बनाई हैं। शुरुआत में नौ एंबुलेंस रोडवेज कर्मचारी चलाएंगे। इसके अलावा सीएमओ व पीएमओ की गाड़ी भी रोडवेज चालक ही चलाएंगे। (संवाद)
परिस्थिति के अनुसार निपटेंगे
स्वास्थ्य विभाग को 31 चालक रिलीव कर सौंप दिए हैं। बड़ी संख्या में चालक दूसरे विभाग में भेजे जाने के बाद निश्चित तौर पर रोडवेज सेवा प्रभावित होगी, कुछ रूट बंद भी हो सकते हैं। फिलहाल इस व्यवस्था के परिणाम धीरे-धीरे हमारे सामने आएंगे, जिस पर परिस्थिति के अनुसार ही निपटने का प्रयास किया जाएगा।
-मनोज कुमार, महाप्रबंधक, भिवानी डिपो।