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पुराने जलघर के टैंकों में मरीं बतखें, अफसर अनजान

Sun, 28 Feb 2021 01:02 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 28 Feb 2021 01:02 AM IST
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water tank, duck die, water supply
मुख्य जलघर के टैंक में मृत पड़ीं बतखें। संवाद - फोटो : Bhiwani
संजय वर्मा
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भिवानी। महम रोड के पुराने जलघर के टैंकों में सैकड़ों बतखें (छोटी जलमुर्गी) मरी पड़ी हैं। जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अभी तक इससे अनजाने हैं। पहले ही नहरी पानी की कमी की वजह से पूरा शहर जल संकट से जूझ रहा है। ऐसे में जो पानी वाटर टैंकों के अंदर है वो भी जनस्वास्थ्य विभाग अधिकारियों की लापरवाही से प्रदूषित हो रहा है।
इतना ही नहीं जनस्वास्थ्य विभाग अधिकारियों की लापरवाही की वजह से गर्मी के मौसम की शुरुआत में ही लोगों पर भी जलजनित बीमारियों के संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। पुराने जलघर के टैंकों से सरकुलर रोड के अंदर की सभी कॉलोनियों में करीब 60 हजार लोगों की आबादी को पानी की आपूर्ति दी जा रही है।
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बता दें कि यमुना का जलस्तर काफी नीचा होने की वजह से इस बार जलघरों को नहरी पानी की आपूर्ति काफी कम हुई है। इस वजह से महम रोड के जलघरों में केवल 50 फीसदी पानी का ही भंडारण हो पाया है। ऐसे में एक बड़ी मुसीबत यह आ गई है कि अज्ञात कारणों से इन पानी के टैंकों में बतखें मरी पड़ी हैं। (संवाद)
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हर साल टैंकों के पानी में प्रवास के लिए आते हैं प्रवासी पक्षी
वाटर टैंकों के पानी में हर साल प्रवासी परिंदे विचरण एवं प्रवास के लिए आते हैं। इन प्रवासी पक्षियों के लिए टैंकों व आसपास के इलाके का क्षेत्र प्रजनन और प्रवास के लिए काफी उपयुक्त होता है। फिलहाल यहां से प्रवासी पक्षी वापस लौट चुके हैं, केवल स्थानीय बतख व बगुले ही पानी में विचरण कर रहे हैं।
दो टैंकों का चल रहा है निर्माण का काम
पुराना जलघर में दो पुराने टैंकों को तोड़कर नए टैंक बनाने का काम चल रहा है। जलघर में मुख्य तौर पर नौ टैंक बने हुए थे, दो पुराने टैंक तोड़े जाने के बाद सिर्फ सात टैंक ही बचे हैं। मगर इन सात टैंकों की लंबे समय से साफ सफाई तक नहीं कराई गई हैं, इस वजह से इनकी भंडारण क्षमता काफी कम है। नहरों से कम पानी आने की वजह से फिलहाल इनमें 50 फीसदी ही पानी भंडारण हुआ है।
जिन टैंकों में बतखें मरी, उनमें फैली है गंदगी
जिन टैंकों के अंदर सैकड़ों बतखें मरी पड़ी हैं उनमें काफी गंदगी है। शहर के वर्जित क्षेत्र के दायरे में आने वाले जलघर के टैंकों में रोजाना ही लोग सैर सपाटा करने आते हैं और यहां पर मछलियों के लिए खाना डालते हैं। ऐसे में टैंकों के अंदर खाने पीने की चीजें डालना पानी की शुद्धता और सुरक्षा पर कई सवाल खड़े कर रहा है। यही पानी पूरे शहर के अंदर सप्लाई किया जाता है। जिससे लोगों की सेहत बिगड़ने का भी अंदेशा बना है।
पिछले माह आए थे प्रदेश में बर्ड फ्लू के मामले
इतनी संख्या में एक साथ बतखों के मरने को बर्ड फ्लू की बीमारी से भी जोड़कर देखा जा रहा है। प्रदेश में पिछले माह बर्ड फ्लू के मामले सामने आए थे, जिसके कारण लाखों की संख्या में मुर्गियों को मारना पड़ा था। हालांकि अभी तक इस बात की किसी ने पुष्टि नहीं की है कि इन बतखों की मौत बर्ड फ्लू से हुई है।
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मेरी जानकारी में अभी तक ऐसा कोई मामला नहीं हैं, मैं पता कराता हूं। टैंकों में नहरी पानी चैनल के माध्यम से आता है। इस पानी को डबल फिल्टर के बाद ही आपूर्ति में दिया जाता है। बतख मरीं हैं तो उसकी वजह का भी पता लगाया जाएगा।
- बलविंदर नैन, कार्यकारी अभियंता, शहरी पेयजल शाखा भिवानी।
पानी में जीव के मरने से पानी विषैला हो जाता है, जो पीने लायक नहीं होता। ऐसे में संबंधित विभाग उसकी जांच कर जीव के मरने की कारणों का पता करता है। साथ ही अधिक मात्रा में जीवों के मरने से बर्ड फ्लू जैसी बीमारी होने का खतरा भी होता है। ऐसे में ध्यान रखना और जागरूक रहना आवश्यक है।

- डॉ. रघुबीर शांडिल्य, सीनियर फिजिशियन, जिला सामान्य अस्पताल
मुझे इस घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं है। लक्षण देखकर ही यह बताया जा सकता है कि बतखों की मौत किस कारण से हो रही है। हालांकि बर्ड फ्लू की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।
- डॉ. नरेश जिंदल, वरिष्ठ वैज्ञानिक, लुवास, हिसार

जलघर के एक टैंक में विचरण करतीं बतखें। संवाद

जलघर के एक टैंक में विचरण करतीं बतखें। संवाद- फोटो : Bhiwani

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