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10 सरकारी स्कूलों के सैंपल फेल, बच्चे पी रहे हैं दूषित पानी
ब्यूरो/ अमर उजाला, भिवानी
Updated Sun, 30 Aug 2015 01:14 AM IST
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सरकारी स्कूलों में बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। बच्चे दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। स्वास्थ्य विभाग ने पानी की क्वालिटी जानने के लिए शहर के 12 सरकारी स्कूलों के सैंपल लिये, इनमें से 10 सैंपल फेल पाए गए।
सवाल है कि जब शहर के स्कूलों का ये हाल है तो ग्रामीण अंचल के स्कूलों की स्थिति कितनी भयावह होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। जांच रिपोर्ट को आधार बनाते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जनस्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा तो उन्होंने अपना पल्ला साफ झाड़ते हुए कहा कि हमारी जिम्मेवारी शुद्ध पेयजल सप्लाई की है।
स्टोरेज पानी शुद्ध है या नहीं इसकी नहीं। इसकी जिम्मेवारी पानी स्टोरेज करने वाले स्वयं संभाले।
स्वास्थ्य मंत्री ने सामान्य अस्पताल की टंकियों का निरीक्षण किया तो स्वास्थ्य विभाग के जिला अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए।
निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शहर में सेंपलिंग के लिए अभियान चलाया। लगभग सभी सरकारी स्कूलों व कुछ प्राइवेट स्कूलों में पीने के पानी के सेंपल लिए गए।
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करीब 12 सरकारी स्कूलों के सैंपलों में 10 की रिपोर्ट फेल पाई गई है। यानी पानी पीने लायक नहीं है और इसमें स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बैक्ट्रिया तत्व है। इन सरकारी स्कूलों में करीब आठ हजार बच्चे पढ़ रहे है यानी आठ हजार बच्चों के स्वास्थ्य के साथ सीधे तौर पर खिलवाड़ हो रहा है।
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टंकियों में जमा है काई कैसे मिले शुद्ध पानी
शहर के सरकारी स्कूलों में पीने के पानी की व्यवस्था कैसी है यह बताने के लिए इतना ही कहना काफी होगा कि अधिक टंकियों के अंदर व बाहर काई जमा है। अरसे से इनकी सफाई नहीं हुई। शिक्षक व स्टाफ सदस्य तो अपने साथ आरओ का पानी बोतल में लाते हैं, मगर बच्चों को इन्हीं गंदी टंकियों का दूषित पानी पीना पड़ता है।
जिम्मेवार कौन
शहर के स्कूलों में बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है मगर जिम्मेवारी से सभी अपना पल्ला झाड़ रहे है। जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की दलील है कि हम क्लोरिन से पानी शुद्ध करके भेजते हैं। उसका प्रभाव दो घंटे तक रहता है और स्टोरेज पानी की जिम्मेवारी उनकी नहीं है। इसके लिए स्कूल अधिकारियों को ही कोई कदम उठाना होगा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने जनस्वास्थ्य विभाग को साफ व शुद्ध पेयजल के लिए पत्र लिखा है। शुद्ध पानी सप्लाई करना उनकी जिम्मेवारी है।
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ये हो रहे नुकसान
दूषित पानी पीने से बच्चों के स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। बच्चों में उल्टी-दस्त व बुखार के साथ पेट में इंफेक्शन के केस बढ़ रहे हैं। पेट की बीमारियों से पीड़ितों की संख्या में दिन ब दिन बढ़ोतरी हो रही है। सामान्य अस्पताल ही नहीं प्राइवेट अस्पतालों में भी पेट से संबंधित मरीजों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है।
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बचाव के लिए अपनाएं ये तरीके
बचाव के लिए लोगों को स्वयं ही जागरूक होना होगा। उन्हें पीने के पानी में क्लोरिन टेबलेट मिलानी चाहिए। सप्लाई के पानी को मटके में भरने के बाद उसमें एक क्लोरिन टेबलेट डालें। करीब आधे घंटे के बाद ही उस पानी का पीने में प्रयोग करें इसके लिए अलावा पीने के पानी को गर्म करके ठंडा करें और फिर पीने में प्रयोग करें। बच्चों को घर से ही बोतल में पीने का साफ पानी डाल कर दें।
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स्कूलों में पीने के पानी की टंकियों के सेंपल लिए गए थे। अनेक सेंपल फेल रहे हैं। इसके लिए जनस्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा है। अब संबंधित स्कूलों को भी पत्र लिखकर इस बारे में अलर्ट किया जाएगा।
रमेश धनखड़, सिविल सर्जन
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स्वास्थ्य विभाग से स्कूलों की सैंपलिंग की रिपोर्ट आई है। करीब 90 फीसदी सैंपल फेल दिखाए गए हैं। मगर हमारी जिम्मेवारी शुद्ध पानी सप्लाई की है। स्टोरेज पानी की नहीं। स्टोर किए गए पानी से क्लोरिन खत्म हो जाता है। ऐसे में स्कूल संचालकों की ही जिम्मेवारी बनती है कि वे अपने यहां स्टोर पानी में क्लोरिन टेबलेट डालें या आरओ लगवाए।
संजीव त्यागी, एक्सईएन
जनस्वास्थ्य विभाग
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दूषित पानी से पेट से संबंधित बीमारियां उल्टी-दस्त, हैजा, पेट में इंफेक्शन होता है। इससे बचाव के लिए पानी के मटके में क्लोरिन दवा डाले या पानी को उबालकर पीये। दूषित पानी से होने वाली पेट संबंधित बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
रघुवीर शांडिल्य, फिजिशियन,
कार्यकारी प्रधान चिकित्सा अधिकार, सामान्य अस्पताल
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सवाल है कि जब शहर के स्कूलों का ये हाल है तो ग्रामीण अंचल के स्कूलों की स्थिति कितनी भयावह होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। जांच रिपोर्ट को आधार बनाते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जनस्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा तो उन्होंने अपना पल्ला साफ झाड़ते हुए कहा कि हमारी जिम्मेवारी शुद्ध पेयजल सप्लाई की है।
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स्टोरेज पानी शुद्ध है या नहीं इसकी नहीं। इसकी जिम्मेवारी पानी स्टोरेज करने वाले स्वयं संभाले।
स्वास्थ्य मंत्री ने सामान्य अस्पताल की टंकियों का निरीक्षण किया तो स्वास्थ्य विभाग के जिला अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए।
निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शहर में सेंपलिंग के लिए अभियान चलाया। लगभग सभी सरकारी स्कूलों व कुछ प्राइवेट स्कूलों में पीने के पानी के सेंपल लिए गए।
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करीब 12 सरकारी स्कूलों के सैंपलों में 10 की रिपोर्ट फेल पाई गई है। यानी पानी पीने लायक नहीं है और इसमें स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बैक्ट्रिया तत्व है। इन सरकारी स्कूलों में करीब आठ हजार बच्चे पढ़ रहे है यानी आठ हजार बच्चों के स्वास्थ्य के साथ सीधे तौर पर खिलवाड़ हो रहा है।
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टंकियों में जमा है काई कैसे मिले शुद्ध पानी
शहर के सरकारी स्कूलों में पीने के पानी की व्यवस्था कैसी है यह बताने के लिए इतना ही कहना काफी होगा कि अधिक टंकियों के अंदर व बाहर काई जमा है। अरसे से इनकी सफाई नहीं हुई। शिक्षक व स्टाफ सदस्य तो अपने साथ आरओ का पानी बोतल में लाते हैं, मगर बच्चों को इन्हीं गंदी टंकियों का दूषित पानी पीना पड़ता है।
जिम्मेवार कौन
शहर के स्कूलों में बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है मगर जिम्मेवारी से सभी अपना पल्ला झाड़ रहे है। जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की दलील है कि हम क्लोरिन से पानी शुद्ध करके भेजते हैं। उसका प्रभाव दो घंटे तक रहता है और स्टोरेज पानी की जिम्मेवारी उनकी नहीं है। इसके लिए स्कूल अधिकारियों को ही कोई कदम उठाना होगा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने जनस्वास्थ्य विभाग को साफ व शुद्ध पेयजल के लिए पत्र लिखा है। शुद्ध पानी सप्लाई करना उनकी जिम्मेवारी है।
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ये हो रहे नुकसान
दूषित पानी पीने से बच्चों के स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। बच्चों में उल्टी-दस्त व बुखार के साथ पेट में इंफेक्शन के केस बढ़ रहे हैं। पेट की बीमारियों से पीड़ितों की संख्या में दिन ब दिन बढ़ोतरी हो रही है। सामान्य अस्पताल ही नहीं प्राइवेट अस्पतालों में भी पेट से संबंधित मरीजों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है।
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बचाव के लिए अपनाएं ये तरीके
बचाव के लिए लोगों को स्वयं ही जागरूक होना होगा। उन्हें पीने के पानी में क्लोरिन टेबलेट मिलानी चाहिए। सप्लाई के पानी को मटके में भरने के बाद उसमें एक क्लोरिन टेबलेट डालें। करीब आधे घंटे के बाद ही उस पानी का पीने में प्रयोग करें इसके लिए अलावा पीने के पानी को गर्म करके ठंडा करें और फिर पीने में प्रयोग करें। बच्चों को घर से ही बोतल में पीने का साफ पानी डाल कर दें।
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स्कूलों में पीने के पानी की टंकियों के सेंपल लिए गए थे। अनेक सेंपल फेल रहे हैं। इसके लिए जनस्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा है। अब संबंधित स्कूलों को भी पत्र लिखकर इस बारे में अलर्ट किया जाएगा।
रमेश धनखड़, सिविल सर्जन
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स्वास्थ्य विभाग से स्कूलों की सैंपलिंग की रिपोर्ट आई है। करीब 90 फीसदी सैंपल फेल दिखाए गए हैं। मगर हमारी जिम्मेवारी शुद्ध पानी सप्लाई की है। स्टोरेज पानी की नहीं। स्टोर किए गए पानी से क्लोरिन खत्म हो जाता है। ऐसे में स्कूल संचालकों की ही जिम्मेवारी बनती है कि वे अपने यहां स्टोर पानी में क्लोरिन टेबलेट डालें या आरओ लगवाए।
संजीव त्यागी, एक्सईएन
जनस्वास्थ्य विभाग
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दूषित पानी से पेट से संबंधित बीमारियां उल्टी-दस्त, हैजा, पेट में इंफेक्शन होता है। इससे बचाव के लिए पानी के मटके में क्लोरिन दवा डाले या पानी को उबालकर पीये। दूषित पानी से होने वाली पेट संबंधित बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
रघुवीर शांडिल्य, फिजिशियन,
कार्यकारी प्रधान चिकित्सा अधिकार, सामान्य अस्पताल