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अब पुराने तरीके से आएंगे पानी के बिल

Tue, 29 Oct 2019 11:54 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 29 Oct 2019 11:54 PM IST
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water bill, publice health department
4 फोटो जनस्वास्थ्य विभाग का मुख्य जलघर । - फोटो : Bhiwani
हुडा की तर्ज पर बिलिंग सिस्टम और पानी के अधिक बिल वसूलने का जन स्वास्थ्य विभाग का स्लैब सिस्टम प्लान फेल हो गया। अब जन स्वास्थ्य विभाग ने वापस पुराने सिस्टम को ही अपनाने का निर्णय लिया है। जिसके तहत नवंबर माह में पुराने सिस्टम के अनुसार ही पानी के बिल भेजे जाएंगे।
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इसी साल अप्रैल माह में जन स्वास्थ्य विभाग ने हुडा विभाग की तर्ज पर शहरी पेयजल उपभोक्ताओं पर स्लैब सिस्टम लागू किया था। नए सिस्टम में यूनिट अनुसार और घर के दायरे के अनुसार पानी का बिल दिया गया। किसी का चार हजार रुपये बिल रहा तो कुछ ऐसे भी थे, जिनका 10 हजार तक था। पानी के अत्यधिक बिलों के कारण लोग परेशान रहे। लोगों ने इसका विरोध भी किया। मगर जन स्वास्थ्य विभाग ने सभी तरह के विरोधों को नजर अंदाज किया। इस कारण उपभोक्ताओं को मजबूरी में बिल भरने पड़े।
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अब लोगों के विरोध के चलते जन स्वास्थ्य विभाग ने इस स्लैब सिस्टम से हाथ पीछे खींच लिए हैं। स्लैब सिस्टम को समाप्त कर पुराने रेट पर ही शहरी उपभोक्ताओं को पेयजल उपलब्ध कराने का फैसला लिया। अब नवंबर माह में पुराने रेट के हिसाब से ही शहरी पेयजल उपभोक्ताओं के घरों में पानी के बिल भेजे जाएंगे। जिन उपभोक्ताओं ने अब तक स्लैब सिस्टम के तहत अपने बकाया बिलों का भुगतान किया था, उनकी राशि भी उनके खाते में एडजस्ट की जाएगी। पुराने रेट के हिसाब से घरेलू पेयजल कनेक्शन पर मीटर वाले उपभोक्ताओं को छह माह के हिसाब से 360 रुपये के बिल का भुगतान करना होगा, जबकि बिना मीटर लगे पेयजल कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को 720 रुपये के हिसाब से पानी के बिल का भुगतान करना होगा। इससे पहले विभाग ने अप्रैल माह में हुडा विभाग की तर्ज पर स्लैब सिस्टम बना दिया था। जिसमें मीटर वाले उपभोक्ता को प्रति हजार लीटर दस रुपये रेट के हिसाब से पानी के बिल का भुगतान करना निर्धारित किया गया था। कॉमर्शियल में दो हजार रुपये न्यूनतम रेट लागू किया गया था। स्लैब सिस्टम में प्लाट के साइज के हिसाब से पेयजल उपभोक्ताओं के घरों में पानी का बिल भेजा गया था। जिसमें एक घरेलू उपभोक्ता के पास भी दस से 15 हजार रुपये का बिल आया था।
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भिवानी शहर में करीबन 35 हजार से अधिक शहरी पेयजल उपभोक्ता हैं। इन शहरी उपभोक्ताओं को साल में दो बार पब्लिक हेल्थ छह माही बिलिंग कराता है। जिसका भुगतान के लिए भी विभाग करीबन एक माह की अवधि निर्धारित करता है। मगर बिलिंग के प्रति लोगों का रुझान काफी घटता हुआ देख विभाग को भी काफी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो पब्लिक हेल्थ विभाग का सालाना बिलिंग का टर्न ओवर करीबन एक करोड़ रुपये है। जबकि छमाही बिलिंग में एक साथ विभाग को 35 से 40 लाख रुपये की आमदनी होती है। जबकि इस साल अब तक विभाग के पास केवल पानी के बिलों की 20 से 25 लाख रुपये की राशि ही जमा हो पाई है। पहले से ही अवैध पेयजल कनेक्शनों की वजह से दूषित पेयजल आपूर्ति में पब्लिक हेल्थ विभाग की काफी फजीहत हो चुकी है। अब स्लैब सिस्टम के विरोध ने भी बिलिंग नहीं होने से विभाग को आर्थिक नुकसान की तरफ धकेलना शुरू किया था। यही वजह रही कि लोगों को राहत देने के लिए पब्लिक हेल्थ विभाग ने स्लैब सिस्टम को समाप्त कर पुराने रेट पर ही लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने का निर्णय लिया।
इस तरह आएगा उपभोक्ताओं के पास पानी का बिल : छमाही पानी भुगतान के लिए पब्लिक हेल्थ विभाग द्वारा नवंबर माह में बिल उपभोक्ताओं के पास बिल भेजे जाएंगे ये बिल एक रुपये प्रति हजार लीटर के हिसाब से तय किए गए हैं। यानी एक हजार लीटर पानी इस्तेमाल करने पर एक यूनिट खर्च आंकी जाती है। इस लिहाज से 280 यूनिट तक पानी इस्तेमाल करने वाले मीटर लगे पानी उपभोक्ताओं को छह माह का 360 रुपये पानी का बिल भुगतान करना होगा। जबकि बिना मीटर लगे उपभोक्ताओं को एक मुश्त 720 रुपये का पानी बिल भेजा जाएगा। जबकि कॉमर्शियल पेयजल उपभोक्ताओं को मीटर लगे कनेक्शनों पर साढ़े सात सौ रुपये बिल भेजा जाएगा। जबकि बिना मीटर लगे कनेक्शनों पर साढ़े सात हजार रुपये पानी का बिल भेजा जाएगा।

पानी के बिल नवंबर माह में उपभोक्ताओं के पास भेजे जाएंगे, जिसकी प्रक्रिया अभी चल रही है। पब्लिक हेल्थ विभाग ने स्लैब रेट रिवाइज किए हैं। इस लिहाज से पुराने रेट पर ही उपभोक्ताओं को अब पानी के बिलों का भुगतान करना होगा, जबकि हुडा स्लैब के हिसाब से उपभोक्ताओं पर बिल का बोझ ज्यादा बढ़ गया था।
- कुनाल जेई, इंचार्ज बिल ब्रांच, पब्लिक हेल्थ शहरी डिविजन
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