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Bhiwani News: शहरी दायरा तो बढ़ा, अधिकृत कॉलोनियों में जनसुविधाओं का इंतजार

Tue, 10 Sep 2024 05:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Tue, 10 Sep 2024 05:40 AM IST
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Waiting for public facilities in authorized colonies
भिवानी। पिछले पांच साल में शहर का दायरा भी काफी बढ़ा, लेकिन अधिकृत कॉलोनियों के फेर में उलझे लोग जनसुविधाओं का इंतजार करते ही रह गए। नगर परिषद की हद में करीब 54 अनधिकृत कॉलोनियों की पहचान की गई। लेकिन मुख्यालय पहुंचते-पहुंचते ये घटकर 35 अनधिकृत कॉलोनियां ही रह गई।
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इनका मसौदा भी मुख्यालय में अब अटका है। बाहरी कॉलोनियों के अंदर कच्ची गलियां हैं तो पीने के पानी का भी गंभीर संकट बना है। अनधिकृत कॉलोनियों के अंदर पानी और सीवर लाइन जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं है। यहां तक की स्ट्रीट लाइट का भी कोई प्रबंध नहीं है। चुनाव के दौरान अब नेता भी यहां फिर से वोट मांगने पहुंचेगे, लेकिन लोगों की सुध पांच साल तक किसी ने नहीं ली।
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भिवानी शहर का दायरा हांसी रोड पर तिगड़ाना मोड़ तक, रोहतक रोड पर गांव निनान और कोंट रोड पर गांव कोंट तक पहुंच गया है। इसी तरह महम रोड पर गोशाला से आगे तक शहर पहुंच गया है। लोहारू रोड पर ये गांव देवसर मोड़ तक शामिल है।
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इस दायरे में छोटी-छोटी कॉलोनियों को मिलाकर कुल 54 से अधिक कॉलोनियां बन चुकी हैं। लेकिन नगर परिषद ने अधिकृत होने के लिए केवल 35 अनधिकृत कॉलोनियों को ही चुना है। इसमें शहर की बाहरी कॉलोनियों का काफी दायरा शामिल है। शहर की कई कॉलोनियां तो तीन दशक से अधिक पुरानी हो चुकी हैं, जिन्हें अभी तक अधिकृत नहीं किया गया। ऐसे में शहरी दायरे में भी रहकर लोग गांव से भी बदतर हालातों में रह रहे हैं।


रुद्रा कॉलोनी सिर्फ नाम की ही शहरी कॉलोनी है, लेकिन यहां हालात गांव से भी बदतर बने हैं। पिछले पांच साल तक हमारे हालातों को देखने के लिए कोई राजनेता नहीं आया। अधिकारियों के समक्ष भी जनसुविधाओं की गुहार लगाई, लेकिन किसी ने कोई सुनवाई नहीं की। अब फिर से चुनाव है तो नेताओं का यहां फिर से आना-जाना लग जाएगा। वादे भी किए जाएंगे, लेकिन चुनाव के बाद फिर कोई यहां दिखाई नहीं देगा। लाखों रुपये खर्च कर यहां घर सिर्फ इसलिए मनाया कि यहां शहर में रहेंगे। मगर सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं मिला
-जितेंद्र, रुद्रा कॉलोनी।

शहर में 30 साल से भी अधिक पुरानी कॉलोनी आज तक अधिकृत दायरे में नहीं आई हैं, जिसकी वजह से यहां न सड़क बनी हैं न पीने के पानी की लाइन डाली गई है। सीवर की भी सुविधा नहीं है। यहां के हालात इतने खराब है कि यहां कोई अधिकारी और राजनेता भी सुध लेने नहीं आता। कॉलोनी को अधिकृत कराने के लिए भी काफी प्रयास किया, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। अगर कॉलोनी अधिकृत होगी तो यहां तक सुविधाएं भी पहुंचेगी।
- सतीश।

शहर की हद आसपास के गांवों की सीमाओं को छू चुकी है। गांव और शहर में अब अंतर कर पाना भी मुश्किल हो गया है। लेकिन जनसुविधाओं में कोई विस्तार नहीं हुआ है। गांव और शहर की कॉलोनियों में गांव की सूरत ही अच्छी हैं, जबकि शहरी दायरे की हालात अब भी बदतर है। यहां की कच्ची गलियों के अंदर गर्मी में धूल उड़ती है तो बारिश में कीचड़ फैला रहता है। वोट मांगने तो सब आते हैं फिर कोई सूध नहीं लेता है। कॉलोनियों में लोगों ने अपने घर तो बना लिए हैं, लेकिन उनके आगे सुविधाओं का टोटा है।

- संतोष।

शहर में प्रॉपर्टी के दाम काफी बढ़ गए हैं, लेकिन यहां सुविधाएं नहीं बढ़ी हैं। लोगों को अवैध कॉलोनाइजर भी ऊंचे सब्जबाग दिखाकर प्लाट बेच रहे हैं, लेकिन इन्हें जनसुविधाएं कई दशकों बाद भी नहीं मिली हैं। राजनेता और कॉलोनाइजरों की भी सांठगांठ है। ऐसे में हर बार वोट देकर उनके झांसे में ही आ रहे हैं। शहर में अधिकांश लोग यह सोचकर ही अपना घर बनाते हैं कि यहां सुविधाएं ज्यादा मिलेंगी, लेकिन यहां आने के बाद तो लोग सुविधाओं को ही तरस रहे हैं।
- ओमपाल।
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