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शिक्षकों की ट्रांसफर पॉलिसी का गांवों में विरोध, ग्रामीण बोले, बंद हो जाएंगे स्कूल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 25 Aug 2022 10:24 PM IST
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Villagers with children locked the school and demonstrated against the government
भिवानी। प्रदेश के सरकारी स्कूलों पढ़ा रहे अध्यापकों के लिए चल रही ट्रांसफर ड्राईव का विरोध अब ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ने लगा है। अध्यापकों के पंचकूला के विरोध के बावजूद भी बड़ी संख्या में अध्यापकों को ट्रांसफर किया जा रहा है। जिसके चलते बहुत से स्कूलों में विभिन्न विषय के अध्यापक उपलब्ध नहीं होंगे और बच्चों को अन्य स्कूलों का रूख करना पड़ेगा। इसी के विरोध में भिवानी जिला के गांव नाथुवास के ग्रामीणों ने स्कूलों के बाहर प्रदर्शन किया और स्कूल में पर्याप्त अध्यापकों की संख्या सुनिश्चित करने की मांग प्रदेश सरकार व शिक्षा मंत्री से की।
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गांव नाथुवास के वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के 400 के लगभग विद्यार्थी है, जहां पर ऑर्ट्स, कॉमर्स व विज्ञान संकाय की कक्षाओं में कालुवास, निनान, हरसुख ढाणी व नाथुवास के विद्यार्थी पढ़ते हैं। ट्रांसफर ड्राईव के तहत ट्रांसफर होने पर यहां पढ़ा रहे विज्ञान संकाय के सभी अध्यापकों की ट्रांसफर के अलावा हिंदी, संस्कृति, इंग्लिश व एसएस के अध्यापकों को भी ट्रांसफर ड्राईव में शामिल कर उन्हें यहां से अन्य स्कूलों में भेजा जाएगा। जिससेे यहां पर विज्ञान संकाय पूर्णतया खत्म हो जाएगा औरअन्य विषयों के अध्यापक भी नहीं होंगे। इसी का विरोध करते हुए गांव के बुजुर्ग मंगल सिंह, निवर्तमान सरपंच आजाद, ग्रामीण रोहताश, ग्रामीण महिला रोशनी ने बताया कि आठ वर्ष पहले उनके गांव के स्कूल को गांव के प्रयास से 12वीं तक का किया गया था, परंतु अब जिस प्रकार से ट्रांसफर ड्राईव में अध्यापकों के तबादले होंगे, उससे यहां 12वीं तक की पढ़ाई समाप्त हो जाएगी।
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उनके गांव के स्कूल का दर्जा अपने आप ही छोटा हो जाएगा। यहां चार गांवों के बच्चे पढ़ने आते हैं। अब उन्हें अध्यापक ना होने के कारण अन्य गांवों में जाना पड़ेगा। इसके अलावा कई परिवार ऐसे है, जो अपने बच्चों को गांव से बाहर नहीं भेज सकते, उन्हें मजबूरन बच्चों की पढ़ाई छुड़वानी पड़ेगी। ऐसे में इन बच्चों की शिक्षा को सीधा नुकसान सरकार पहुंचा रही हैं। हम मांग करते है कि गांव नाथुवास के स्कूल में पर्याप्त संख्या में अध्यापकों की संख्या की जाए और स्कूल के दर्जे को कम ना करते हुए यहां साइंस, आर्ट्स व कॉमर्स संकाय की कक्षाओं को फिर से बहाल किया जाए, ताकि बच्चें फिर से सुचारू रूप से अपनी कक्षाएं जारी कर देश के लिए बेहतर नागरिक बन सकें।
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ग्रामीणों ने स्कूल पर ताला लगा किया सरकार के खिलाफ प्रदर्शन
बवानी खेड़ा। गांव रामपुरा में गुरुवार को ग्रामीणों और स्कूली छात्राओं ने इकट्ठा होकर नई स्कूल शिक्षा नीति लागू होने का रोष प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और खंड शिक्षा अधिकारी को शिक्षा मंत्री के नाम का ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने ज्ञापन के माध्यम से गांव के राजकीय माध्यमिक विद्यालय में जल्द अध्यापकों की नियुक्ति की मांग की और स्कूल को भी ताला जड़ दिया।
ग्रामीणों ने बताया कि रामपुरा में एक ही राजकीय माध्यमिक विद्यालय है जिसमें करीबन 107 की संख्या में बच्चे पढ़ने आते हैं। स्कूल से अब 5 अध्यापकों का दूसरी जगह तबादला कर स्कूल को मर्ज किए जा रहा है। जिससे ग्रामीणों ने भारी रोष है। उन्होंने बताया कि नए फैसले के अनुसार स्कूल में विषय अनुसार अध्यापक को हटाया जा रहा हैं। जिस कारण सभी विषय के लिए एक ही अध्यापक पर बोझ हो जाएगा। ऐसे में एक ही अध्यापक छात्रों को कैसे सभी विषय की शिक्षा दे पाएगा। और ऐसे में बच्चे भी कैसे शिक्षित हों पाएंगे। स्कूल के मुख्य गेट को तालाबंदी कर ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने शिक्षा मंत्री से जल्द ही सभी विषय अध्यापक नियुक्ति की मांग की है।

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नई शिक्षा नीति की आड़ में स्कूलों को बंद कर देश का गला घोंट रही सरकार: कमल प्रधान
भिवानी। नई शिक्षा नीति लागू होने पर केंद्र सरकार पर कुछ बुद्धिजीवियों का भरोसा बढ़ा था, लेकिन यह सरकार किसी प्रकार के भरोसे के लायक नहीं है। अब प्रदेश सरकार हरियाणा के सरकारी स्कूलों को बंद कर शिक्षा का हनन कर देश का गला घोंट रही है। यह बात युवा कल्याण संगठन के संरक्षक कमल सिंह प्रधान ने कही। कमल प्रधान ने कहा कि अनेकों शिक्षाविदों, महानुभावों तथा समझदार नेताओं की सूझबूझ के कारण देश शिक्षा के क्षेत्र में उन्नति के पथ पर अग्रसर हुआ था लेकिन वर्तमान सरकार को देश का विकास किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं है। प्रदेश सरकार अध्यापकों की नियुक्ति तो करती नहीं है और फिर शिक्षकों की कमी दिखा कर सरकारी स्कूलों को बंद करना चाहती है । बचे हुए विद्यालयों का निजीकरण कर उन्हें अपने निजी उद्योगपतियों के हाथों में सौंपना चाहती है। जनता को चाहिए की सड़कों पर उतरकर आंदोलन करें तथा इस तानाशाही सरकार का पुरजोर विरोध करे। इस अवसर पर संगठन के प्रवक्ता अनिल शेषमा, महासचिव सुभाष यादव, संगठन की छात्र इकाई के प्रदेशाध्यक्ष अपूर्व यादव, अमित अत्री, हरदीप टाला आदि मौजूद रहे।
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