फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Bhiwani News ›   Time has added a new color of taste to the bag of Sawan

Bhiwani News: सावन की कोथली में समय ने घोला स्वाद का नया रंग, पर रिश्तों की मिठास अब भी वही

Thu, 17 Jul 2025 12:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Thu, 17 Jul 2025 12:08 AM IST
विज्ञापन
Time has added a new color of taste to the bag of Sawan
दुकान में रखी मिठाई दिखाते विक्रेता।
शुभम कौशिक
विज्ञापन

भिवानी। सावन की कोथली- एक बहन के मायके से मिलने वाली प्रेम और अपनत्व की वह पिटारी जो अब वक्त के साथ अपने रूप-स्वरूप में बदलती जा रही है। कभी मां के हाथों की बनी पापड़ी, गुजिया, शक्करपारे और शृंगार का साधारण सामान इस कोथली की जान हुआ करता था लेकिन अब उसमें रेडिमेड मिठाइयों, डिजाइनर ज्वैलरी और ऑनलाइन ट्रांसफर की आधुनिक झलक दिखने लगी है।
सावन में जब भाई अपनी बहन के लिए कोथली लेकर जाता था तो वह न केवल पकवानों और कपड़ों से भरी एक गठरी होती थी बल्कि अपने साथ लाता था मायके की यादें, रिश्तों की महक और स्नेह का संदेश। लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में यह परंपरा कहीं न कहीं डिजिटल जुड़ाव तक सिमटने लगी है।
विज्ञापन


बुजुर्ग महिलाओं की जुबानी कोथली की बदली तस्वीर
संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने सावन की कोथली को लेकर बुधवार को कुछ बुजुर्ग महिलाओं से बातचीत की। उन्होंने बताया कि समय के साथ इस परंपरा में बड़ा बदलाव आया है, लेकिन इसकी आत्मा आज भी जिंदा है।
विज्ञापन
विज्ञापन



पहले की कोथली व आज की कोथली में बहुत बदलाव है। पहले मां घर पर खाने का सामान बना कर भेजती थी। लेकिन आजकल लोग बाजारों से मिठाई खरीद कर ला रहे हैं। पहले कोथली में घेवर, बिस्किट व बताशे आते थे। आस-पास के घरों में खुशी से बांटा जाता था। लेकिन अब नए जमाने में आधुनिक मिठाई कोथली में आ रही हैं। कोथली में अब रसगुल्ला व बर्फी जैसी मिठाई आ रही हैं। बेटियों के लिए पहनने के लिए आने वाले सूटों की जगह रेडिमेड गारमेंट्स ने ले ली है। समय के अनुसार भारतीय संस्कृति बदल रही है। लेकिन खुशी है कि सावन माह में कोथली की परंपरा आज भी निभाई जा रही है। - राजेश देवी


हमारे जमाने में कोथली में गुजिया, चने के आटे की पापड़ी, शक्कर पारा, सुवाली आती थी। अब तो बहुत समय बदल गया। बहुओं की कोथली में बिस्किट, घेवर आ रहे हैं। श्रृंगार का सामान भी बदल गया है। पहले काजल, बिंदी, हरी चूड़ी, आती थी। अब आधुनिक जमाने का सामान आ रहा है। पहले महिलाएं सूखी मेहंदी भीगों कर हाथों पर सावन के माह में लगाती थी। लेकिन अब बनी बनाई मेहंदी की कूप की परंपरा है। महिलाएं डिजाइनदार मेहंदी लगाना पसंद कर रही हैं। - ज्ञान देवी


सावन की कोथली में काफी बदलाव है। पहले सावन माह में भाई कोथली लेकर अपने बहन के घर जरूर आता था। लेकिन अब बैंक खातों में ही भाई पैसे डाल देता है। बहन अपनी मर्जी की पसंद का सामान खरीद लेती है। सावन के माह में एक भाई को अपनी बहन के घर जरूर जाना चाहिए, ताकि भाई-बहन का प्यार व भारतीय संस्कृति बनी रहे। - शीला देव


सावन की कोथली में अब रसगुल्ला, बर्फी, बच्चों के लिए चॉकलेट व चिप्स आने लगे हैं। लेकिन पहले के जमाने में घेवर, बिस्किट, गुजिया आती थी। समय के साथ सावन की कोथली में काफी बदलाव आया है। इसके अलावा कपड़ों में भी रेडिमेड गारमेंट्स को पसंद किया जाने लगा है। वहीं कोथली में आने वाला शृंगार का सामान भी डिजाइनदार आभूषण में बदल गया है। अब कंगन, परफ्यूम, ज्वैलरी कोथली में आने लगी है। पहले सिंपल बिंदी, हरी चूड़ी, काजल, मेहंदी कोथली में बेटी के लिए भेजी जाती थी। लेकिन ये खुशी की बात है कि बदलते जमाने के साथ भी सावन की कोथली की परंपरा आज भी निभाई जा रही है।- सुंदर देवी


ये है कोथली की परंपरा
सावन माह में मायके से बहन या बेटी को भेजी जाने वाली भेंट को कोथली कहा जाता है। इसमें पारंपरिक रूप से घर की बनी मिठाइयां, शृंगार सामग्री, वस्त्र व नगद शगुन शामिल होते हैं। इसका उद्देश्य बेटी को यह महसूस कराना होता है कि उसका मायका उसके सुख-दुख में हमेशा उसके साथ है। कोथली न केवल रिश्तों की डोर को मजबूत करती है बल्कि भाई-बहन के प्रेम, आत्मीयता और संस्कृति की धरोहर भी सहेजती है। आधुनिकता के इस दौर में चाहे स्वरूप बदल गया हो लेकिन कोथली अब भी भारतीय परिवारों में रिश्तों के उत्सव की एक जीवंत परंपरा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed