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Bhiwani News: जूई नहर के घाट पर होगा छठ पूजा का जमघट, आज से नहाय-खाय से होगी चार दिन के महापर्व की शुरूआत

Thu, 16 Nov 2023 11:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Thu, 16 Nov 2023 11:31 PM IST
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There will be a gathering of Chhath Puja at the ghat of Jui Canal, the four-day festival will begin with Nahay-Khay from today
भिवानी।
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पूर्वांचल में प्रमुखता से बनाए जाने वाला महापर्व छठ पूजा का शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ आगाज होगा। चार दिन तक चलने वाले इस महापर्व की घरों में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। वहीं भिवानी के तोशाम बाईपास स्थित छठ पूजा घाट की अभी तक किसी ने सुध नहीं ली है। घाट पर बनी बेदियों के आसपास काफी झाडियां खड़ी हैं, जहां छठ पूजा के दौरान परिवार छठ माता की पूजा करते हैं।
बता दें कि भिवानी में करीब 15 हजार से अधिक प्रवासी परिवार हैं, जो यहां छठ पर्व अपने परिवार के साथ मानाएंगे। छठ पूजा घाट पर करीब 25 हजार से अधिक लोगों की भीड़ भी जुटती है और यहां मेले का भी हर साल छठ पूजा पर आयोजन होता है।
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छठ पूजा की शुरुआत 17 नवंबर को नहाय खास से होगी। हिंदू धर्म में इसका विशेष महत्व है। पंचांग के अनुसार छठ पूजा का यह पर्व हर साल कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाता है। इसे साल के सबसे बड़े त्योहार के रूप में भी देखा जाता है। इसकी शुरुआत नहाय-खाय के साथ होती है। तोशाम बाईपास जूई नहर पर बने छठ पूजा घाट पर काफी छोटे-छोटे पूजा स्थल मनाए गए हैं। इनमें विधि विधान से महिलाएं छठ पूजा कर परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। इस बार 17 नवंबर को नहाय-खाय होगा। 18 नवंबर को सांध्य अर्घ्य दिया जाएगा। 20 नवंबर को उगले सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत संकल्प पूरा होगा। इस दौरान जिला पुलिस प्रशासन की तरफ से भी कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किए जाएंगे। छठ पूजा घाट मेले में पुलिस पीसीआर और रायडर भी गश्त पर रहेंगे।
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यह है छठ पूजा की पौराणिक मान्यता
छठ पूजा को लेकर कई मान्यताएं व परंपराएं हैं, जो इस व्रत को और भी खास बनाती है। यह व्रत संतान की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और उनके उज्जवल भविष्य की कामना के लिए रखा जाता है। इसे सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। ये व्रत 36 घंटों तक चलता है। इस दौरान कई नियमों का पालन करना जरूरी होता है। इसी वजह से इस व्रत को परिवार के बहुत सीमित लोग ही रखते हैं।

ये रखें ध्यान
छठ पूजा में सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। साथ ही पूरे विधि-विधान से उनकी पूजा की जाती है। इस दौरान भूलकर भी चांदी, स्टील और प्लास्टिक के बर्तनों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इस पूजा में मिट्टी के चूल्हे और बर्तनों का ही इस्तेमाल करना चाहिए।








इन चीजों का सेवन न करें
छठ पर्व के शुभ दिनों में भूलकर भी मांसाहारी भोजन का सेवन न करें। साथ ही इसे घर में भी न बनाएं। छठ पूजा के दिनों में लहसुन व प्याज का सेवन भी नहीं करना चाहिए।



सूर्य देव को अर्घ्य दिए बिना कुछ न खाएं

इस दौरान व्रत रख रही महिलाएं सूर्य देव को अर्घ्य दिए बिना किसी भी चीज का सेवन न करें। साथ ही व्रत रखने वाली महिलाएं जमीन पर सोएं।


सेंधा नमक का इस्तेमाल
छठ पूजा का व्रत कठिन उपवास में से एक है। इस दौरान व्रत रह रही महिलाएं इससे जुड़ें सभी नियमों का पालन करती हैं। छठ पूजा से करीब 10 दिन पहले से ही लोगों को अरवा चावल, सेंधा नमक का इस्तेमाल करना चाहिए।



प्रसाद बनाते समय चखने की भूल न करें
छठ पूजा का प्रसाद बेहद पवित्र होता है। इसे बनाते समय भूलकर भी इसे जूठा न करें। साथ ही इसे बनाने से पहले भी कुछ भी न खाएं। अपने हाथों को भी साफ रखें। याद रखें कि, प्रसाद बनाने वाली जगह एक दम स्वच्छ हों।
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