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सरसों की बिजाई का सही समय 30 सितंबर से 25 अक्तूबर
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भिवानी। जिले में सरसों रबी सीजन की मुख्य फसल तिलहन फसलों में हैं। खाद्य तेलों की आपूर्ति को पूरा करने के लिए सरसों की पैदावार को बढ़ाया जाना अति आवश्यक है। सरसों की बिजाई का सही समय 23 सितंबर से 25 अक्तूबर तक है। सरसों की बिजाई के समय किसान सिंगल सुपर फास्फेट खाद का प्रयोग करें।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डॉ. आत्माराम गोदारा ने बताया कि किसान को सरसों फसल की अधिक पैदावार लेने के लिए संतुलित मात्रा में खाद का प्रयोग करना चाहिए। सरसों में कुल 70 किलोग्राम यूरिया, 25 किलोग्राम डीएपी या 75 किलोग्राम एसएसपी, 14 किलोग्राम एमओपी, 10 किलोग्राम जिंक सल्फेट की आवश्यकता होती है। सरसों की बिजाई के समय सिंचित अवस्था में सारी फास्फोरस, पोटेशियम सल्फेट, नाइट्रोजन बिजाई से तुरंत पहले डालें और शेष नाइट्रोजन की मात्रा पहले पानी के साथ डाले। उन्होंने बताया कि फसल में भासोर व गंदगी आवश्यकता पूर्ति करने के लिए सिंगल सुपर फास्ट फेड का प्रयोग करें, क्योंकि इसमें 12 प्रतिशत गंधक होती है। यदि फास्फोरस की पूर्ति के लिए डीएपी का प्रयोग करना है, तो उसमें दो कटे जिप्सम प्रति एकड़ की दर से बिजाई से पहले डाले या सिंचाई के समय दें। इससे सरसों की फसल में तेल की मात्रा बढ़ाई जा सके। उन्होंने बताया कि नाइट्रोजन फास्फोरस पोटाश की पूर्ति करने के लिए एनपीके का प्रयोग करें ताकि फसल को आवश्यक तीनों तत्वों की पूर्ति होती जिससे कि सरसों के उत्पादन को बढ़ाया जा सके।
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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डॉ. आत्माराम गोदारा ने बताया कि किसान को सरसों फसल की अधिक पैदावार लेने के लिए संतुलित मात्रा में खाद का प्रयोग करना चाहिए। सरसों में कुल 70 किलोग्राम यूरिया, 25 किलोग्राम डीएपी या 75 किलोग्राम एसएसपी, 14 किलोग्राम एमओपी, 10 किलोग्राम जिंक सल्फेट की आवश्यकता होती है। सरसों की बिजाई के समय सिंचित अवस्था में सारी फास्फोरस, पोटेशियम सल्फेट, नाइट्रोजन बिजाई से तुरंत पहले डालें और शेष नाइट्रोजन की मात्रा पहले पानी के साथ डाले। उन्होंने बताया कि फसल में भासोर व गंदगी आवश्यकता पूर्ति करने के लिए सिंगल सुपर फास्ट फेड का प्रयोग करें, क्योंकि इसमें 12 प्रतिशत गंधक होती है। यदि फास्फोरस की पूर्ति के लिए डीएपी का प्रयोग करना है, तो उसमें दो कटे जिप्सम प्रति एकड़ की दर से बिजाई से पहले डाले या सिंचाई के समय दें। इससे सरसों की फसल में तेल की मात्रा बढ़ाई जा सके। उन्होंने बताया कि नाइट्रोजन फास्फोरस पोटाश की पूर्ति करने के लिए एनपीके का प्रयोग करें ताकि फसल को आवश्यक तीनों तत्वों की पूर्ति होती जिससे कि सरसों के उत्पादन को बढ़ाया जा सके।
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