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Bhiwani News: पेंशन की बाट जोह रहे देवराला के 250 से 400 वर्ष तक पुराने ‘प्राण वायु देवता’

Thu, 04 Jun 2026 11:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Thu, 04 Jun 2026 11:32 PM IST
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The 'Life Air Deity' that is 250 to 400 years old of the brother-in-law waiting for the pension
देवराला के खेत में लगा पीपल का पेड़। 
गुलशन देवराला
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कैरू। धार्मिक और सामाजिक आस्था के केंद्र के रूप में विख्यात देवताओं के गांव देवराला में प्रकृति और इतिहास का एक अनूठा संगम मौजूद है। आधुनिक दौर में जहां लोग एयर कंडीशनर और कूलरों पर निर्भर हैं। वहीं इस गांव के लोग आज भी सदियों पुराने पेड़ों की छांव में सुकून पाते हैं। वर्तमान में गांव में पीपल के दो पेड़ 250 से 400 साल पुराने हैं।
लंबी आयु के कारण सरकारी संरक्षण के हकदार हैं लेकिन ग्रामीणों और ग्राम पंचायत की अज्ञानता व कम रुझान के चलते इन्हें अभी तक सरकार की प्राण वायु देवता पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल सका है। गांव में करीब 50 से अधिक ऐसे पेड़ हैं जिनकी उम्र 70 वर्ष से अधिक है।
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राहगीरों को सुकून दे रही सदियों पुरानी शीतल छांव
बहल-भिवानी मार्ग पर खेतों के कच्चे रास्ते के किनारे स्थित पीपल का पेड़ लगभग 400 वर्ष पुराना है। गांव के 99 वर्षीय बुजुर्ग फूला राम डांगी इस पेड़ की कहानी बताते हुए भावुक हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि जब से हमने होश संभाला है इस पेड़ को इसी विशाल रूप में देख रहे हैं। जब गांव में बिजली नहीं होती थी तब दोपहर की भीषण गर्मी में यही पेड़ ग्रामीणों का सहारा बनता था। दिनभर यहां किसानों और राहगीरों का जमावड़ा लगा रहता था। यह पेड़ हर मौसम की मार झेलकर आज भी अडिग खड़ा है।
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मुंगीपा मंदिर परिसर में 250 वर्ष पुराना पीपल आस्था का प्रतीक
एक पीपल का पेड़ गांव के बीचो-बीच स्थित बाबा मुंगीपा मंदिर के पास है जो करीब 250 वर्ष पुराना है। गांव के 81 वर्षीय सूबेदार परमानंद नंबरदार बताते हैं कि यह पेड़ हिंदू धर्म और ग्रामीण संस्कृति की गहरी आस्था से जुड़ा है। महिलाएं यहां आकर मन्नतें मांगती हैं और मंगल कामना के लिए सूत का धागा बांधती हैं। बाबा मुंगीपा मंदिर आने वाले श्रद्धालु इस वृक्ष के आगे भी शीश नवाते हैं। इस वृक्ष की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि गर्मी जितनी भीषण होती है इसके नीचे की छांव उतनी ही शीतल हो जाती है। बुजुर्गों का कहना है कि बचपन में वे इसके नीचे खूब खेला करते थे। हालांकि अब इस पेड़ पर बंदरों का राज हो चुका है।


यह है प्राण वायु देवता योजना?

हरियाणा सरकार की प्राण वायु देवता योजना के तहत 75 वर्ष या उससे अधिक आयु के पेड़ों को प्राण वायु देवता के रूप में संरक्षित किया जाता है। इसके तहत पेड़ के रख-रखाव के लिए पंचायत या संबंधित मालिक को सालाना पेंशन (सरकारी आर्थिक सहायता) दी जाती है। देवराला के ये ऐतिहासिक पेड़ पात्रता रखने के बावजूद सिर्फ प्रशासनिक जागरूकता की कमी के कारण इस लाभ से वंचित हैं।
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