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Bhiwani News: नमी का कहर...त्वचा संक्रमण में उलझी सेहत, मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में दाद, खाज, खुजली, रैशेज और एलर्जी के मरीजों की संख्या बढ़ी
Fri, 24 Jul 2026 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Fri, 24 Jul 2026 01:26 AM IST
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भिवानी। बारिश भले ही गर्मी से राहत ले आई हो लेकिन अब वातावरण में बढ़ी नमी त्वचा के लिए मुसीबत बन गई है। शहर और आसपास के क्षेत्रों में त्वचा रोगियों की संख्या में अचानक भारी उछाल आया है। अस्पतालों और निजी क्लीनिकों में दाद, खाज, खुजली, रैशेज और एलर्जी के मरीजों की कतारें लग रही हैं।
चिकित्सकों के मुताबिक बारिश के बाद त्वचा संबंधी मामलों में 30 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज में त्वचा रोग विशेषज्ञ के पास पहले जहां प्रतिदिन 80 से 90 मरीज आते थे वहीं अब यह संख्या 150 के पार पहुंच गई है।
पसीना और नमी बनी मुख्य वजह
त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. जनश्रुति ने बताया कि हवा में आर्द्रता (ह्यूमिडिटी) अधिक होने से शरीर का पसीना आसानी से नहीं सूखता। कपड़ों के भीतर नमी बनी रहने से फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन तेजी से पनपते हैं। इसके अलावा बारिश के दूषित पानी के संपर्क में आने से त्वचा पर लाल चकत्ते, दाने और जलन के साथ तेज खुजली की समस्या हो रही है।
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बचाव के मुख्य उपाय
त्वचा पर पसीना न जमने दें, संभव हो तो दिन में दो बार स्नान करें।
तौलिया, रुमाल या कपड़े परिवार के अन्य सदस्यों के साथ साझा न करें।
ढीले और सूती कपड़े पहनें ताकि त्वचा को हवा मिलती रहे।
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चिकित्सकों के मुताबिक बारिश के बाद त्वचा संबंधी मामलों में 30 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज में त्वचा रोग विशेषज्ञ के पास पहले जहां प्रतिदिन 80 से 90 मरीज आते थे वहीं अब यह संख्या 150 के पार पहुंच गई है।
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पसीना और नमी बनी मुख्य वजह
त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. जनश्रुति ने बताया कि हवा में आर्द्रता (ह्यूमिडिटी) अधिक होने से शरीर का पसीना आसानी से नहीं सूखता। कपड़ों के भीतर नमी बनी रहने से फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन तेजी से पनपते हैं। इसके अलावा बारिश के दूषित पानी के संपर्क में आने से त्वचा पर लाल चकत्ते, दाने और जलन के साथ तेज खुजली की समस्या हो रही है।
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बचाव के मुख्य उपाय
त्वचा पर पसीना न जमने दें, संभव हो तो दिन में दो बार स्नान करें।
तौलिया, रुमाल या कपड़े परिवार के अन्य सदस्यों के साथ साझा न करें।
ढीले और सूती कपड़े पहनें ताकि त्वचा को हवा मिलती रहे।