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Bhiwani News: बाल संतों के भक्ति-भाव से गूंजा परिसर
Mon, 30 Jun 2025 01:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Mon, 30 Jun 2025 01:15 AM IST
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भिवानी। प्रेक्षा विहार में संत निरंकारी मिशन द्वारा जोन स्तरीय बाल संत समागम का भव्य आयोजन किया गया। समागम के दौरान बाल संतों की भक्ति-भाव से भरी प्रस्तुतियों से पूरा परिसर आध्यात्मिक उल्लास से गूंज उठा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संत निरंकारी मिशन के कर्मयोगी एवं विद्वान महात्मा प्रदीप अरोड़ा (रोहिणी, दिल्ली) ने की। उन्होंने अपने प्रवचनों में कहा कि सत्गुरु हमें आत्मज्ञान देकर एक अच्छा इंसान बनाते हैं। जीवन में चाहे जो भी बनो—डॉक्टर, इंजीनियर या कलाकार—सब स्वीकार्य है, लेकिन सबसे जरूरी है इंसान बनना। उन्होंने कहा कि मानव जीवन प्रभु प्राप्ति का माध्यम है और सत्गुरु वह दृष्टि प्रदान करते हैं जिससे हर घट में परमात्मा के दर्शन हो सके। महात्मा अरोड़ा ने बच्चों को ‘मैं’ और ‘मेरी’ के अहंकार से दूर रहने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि सत्गुरु बाल मन में मानवीय मूल्यों के बीज बो रहे हैं, जो जीवन को सार्थक बनाते हैं। सीखने की कोई आयु नहीं होती, और बच्चे इस मंच के माध्यम से जो कुछ सीख रहे हैं, वह हम सभी के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। संगत को सेवा, सुमिरन और सत्संग के मार्ग पर चलने का संदेश भी दिया गया।
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जोनल इंचार्ज महात्मा बलदेव राज नागपाल ने इस आयोजन को भावी पीढ़ी को आध्यात्मिक दिशा देने वाला एक पवित्र प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि बच्चों ने सहज और सरल भाषा में निरंकार की भक्ति को सजीव रूप से प्रस्तुत किया।
यह समागम बाल संतों को सेवा और सत्संग से जोड़ने का एक जीवंत माध्यम है, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन की नींव रखी जा सकती है। इस अवसर पर विधायक घनश्याम सर्राफ, प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की प्रतिनिधि सुमित्रा व महंत चरण दास महाराज भी उपस्थित रहे।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता संत निरंकारी मिशन के कर्मयोगी एवं विद्वान महात्मा प्रदीप अरोड़ा (रोहिणी, दिल्ली) ने की। उन्होंने अपने प्रवचनों में कहा कि सत्गुरु हमें आत्मज्ञान देकर एक अच्छा इंसान बनाते हैं। जीवन में चाहे जो भी बनो—डॉक्टर, इंजीनियर या कलाकार—सब स्वीकार्य है, लेकिन सबसे जरूरी है इंसान बनना। उन्होंने कहा कि मानव जीवन प्रभु प्राप्ति का माध्यम है और सत्गुरु वह दृष्टि प्रदान करते हैं जिससे हर घट में परमात्मा के दर्शन हो सके। महात्मा अरोड़ा ने बच्चों को ‘मैं’ और ‘मेरी’ के अहंकार से दूर रहने की प्रेरणा दी।
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उन्होंने कहा कि सत्गुरु बाल मन में मानवीय मूल्यों के बीज बो रहे हैं, जो जीवन को सार्थक बनाते हैं। सीखने की कोई आयु नहीं होती, और बच्चे इस मंच के माध्यम से जो कुछ सीख रहे हैं, वह हम सभी के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। संगत को सेवा, सुमिरन और सत्संग के मार्ग पर चलने का संदेश भी दिया गया।
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जोनल इंचार्ज महात्मा बलदेव राज नागपाल ने इस आयोजन को भावी पीढ़ी को आध्यात्मिक दिशा देने वाला एक पवित्र प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि बच्चों ने सहज और सरल भाषा में निरंकार की भक्ति को सजीव रूप से प्रस्तुत किया।
यह समागम बाल संतों को सेवा और सत्संग से जोड़ने का एक जीवंत माध्यम है, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन की नींव रखी जा सकती है। इस अवसर पर विधायक घनश्याम सर्राफ, प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की प्रतिनिधि सुमित्रा व महंत चरण दास महाराज भी उपस्थित रहे।