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Bhiwani News: बापोड़ा में प्रति व्यक्ति 155 लीटर शुद्ध जलापूर्ति का लक्ष्य, दिसंबर तक चालू होगा एसटीपी
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बापोड़ा में निर्माणाधीन बूस्टिंग स्टेशन।
भिवानी। गांव बापोड़ा में महाग्राम योजना के तहत प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन 155 लीटर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। अप्रैल 2027 तक पूरी होने वाली इस परियोजना को इसी वर्ष दिसंबर तक चालू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। योजना के तहत गांव में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के साथ गंदे पानी के शोधन का भी प्रबंध किया जा रहा है।
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 10 हजार से अधिक आबादी वाले गांव में नए जल भंडारण टैंक, क्लियर वाटर टैंक, पंप चैंबर और मोटर मशीनरी स्थापित की जा रही हैं। पानी की आपूर्ति सुचारु रखने के लिए दो बूस्टिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं। पुरानी और लीकेज वाली पाइपलाइनें बदली जा रही हैं जबकि जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन नहीं है वहां नई लाइनें बिछाई जा रही हैं।
कनिष्ठ अभियंता बिजेश कुमार जावाला ने बताया कि पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है। उच्च अधिकारियों के मार्गदर्शन में कार्यकारी एजेंसी और ग्रामीणों के सहयोग से परियोजना को जल्द पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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प्रतिदिन 30 लाख लीटर दूषित पानी का होगा शोधन
देवसर-बापोड़ा रोड पर तीन एमएलडी क्षमता का मलजल शोधन संयंत्र (एसटीपी) बनाया जा रहा है। इसमें प्रतिदिन 30 लाख लीटर दूषित पानी को शोधित किया जा सकेगा। गांव से सीवरेज का पानी दो मध्यवर्ती पंपिंग स्टेशनों के जरिए संयंत्र तक पहुंचाया जाएगा। शोधन के बाद पानी घग्गर ड्रेन में छोड़ा जाएगा।
संयंत्र परिसर में लगेंगे एक हजार से अधिक पौधे
संयंत्र परिसर में पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से एक हजार से अधिक छायादार, फलदार, फूलदार और औषधीय पौधे लगाए जा रहे हैं। इनमें त्रिवेणी, एरीका पाम, नीम, अर्जुन, आम, अमरूद और आंवला शामिल हैं। परिसर में तुलसी, एलोवेरा, सहजन और अश्वगंधा जैसे औषधीय पौधों का हर्बल गार्डन भी विकसित किया जा रहा है।
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वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 10 हजार से अधिक आबादी वाले गांव में नए जल भंडारण टैंक, क्लियर वाटर टैंक, पंप चैंबर और मोटर मशीनरी स्थापित की जा रही हैं। पानी की आपूर्ति सुचारु रखने के लिए दो बूस्टिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं। पुरानी और लीकेज वाली पाइपलाइनें बदली जा रही हैं जबकि जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन नहीं है वहां नई लाइनें बिछाई जा रही हैं।
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कनिष्ठ अभियंता बिजेश कुमार जावाला ने बताया कि पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है। उच्च अधिकारियों के मार्गदर्शन में कार्यकारी एजेंसी और ग्रामीणों के सहयोग से परियोजना को जल्द पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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प्रतिदिन 30 लाख लीटर दूषित पानी का होगा शोधन
देवसर-बापोड़ा रोड पर तीन एमएलडी क्षमता का मलजल शोधन संयंत्र (एसटीपी) बनाया जा रहा है। इसमें प्रतिदिन 30 लाख लीटर दूषित पानी को शोधित किया जा सकेगा। गांव से सीवरेज का पानी दो मध्यवर्ती पंपिंग स्टेशनों के जरिए संयंत्र तक पहुंचाया जाएगा। शोधन के बाद पानी घग्गर ड्रेन में छोड़ा जाएगा।
संयंत्र परिसर में लगेंगे एक हजार से अधिक पौधे
संयंत्र परिसर में पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से एक हजार से अधिक छायादार, फलदार, फूलदार और औषधीय पौधे लगाए जा रहे हैं। इनमें त्रिवेणी, एरीका पाम, नीम, अर्जुन, आम, अमरूद और आंवला शामिल हैं। परिसर में तुलसी, एलोवेरा, सहजन और अश्वगंधा जैसे औषधीय पौधों का हर्बल गार्डन भी विकसित किया जा रहा है।