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Bhiwani News: सुपर ब्रेन योग से बढ़ेगी एकाग्रता, माइंड फॉग से बचाव के बताए उपाय
Thu, 05 Nov 2026 10:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Thu, 05 Nov 2026 10:37 PM IST
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सीबीएलयू में आयोजित सेमिनार के दौरान मंच पर योग करते विद्यार्थी।
भिवानी। चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय (सीबीएलयू) में आयोजित विशेष सेमिनार में सुपर ब्रेन योग के जरिए एकाग्रता बढ़ाने और माइंड फॉग से बचाव के उपाय बताए गए। वीरवार को पुराने परिसर के राधाकृष्णन सभागार में योग एवं नेचुरोपैथी विभाग की ओर से आयोजित सेमिनार में आंध्र प्रदेश से पहुंचे वक्ता जीवन राव ने विद्यार्थियों और शैक्षणिक स्टाफ को प्राचीन एवं आधुनिक योग तकनीकों की जानकारी दी।
सेमिनार में विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सवाल पूछे। एमएससी योग प्रथम सत्र की छात्रा कल्पना ने माइंड फॉग (मानसिक धुंधलापन) के कारणों और समाधान को लेकर सवाल किया। जीवन राव ने बताया कि मानसिक तनाव, अनियमित खानपान, असंतुलित जीवनशैली, अत्यधिक स्क्रीन टाइम और पर्याप्त नींद न लेना इसके प्रमुख कारण हैं। इससे एकाग्रता, याददाश्त और मानसिक स्पष्टता प्रभावित होती है।
सुपर ब्रेन योग और नाड़ी शोधन के बताए फायदे
जीवन राव ने बताया कि सुपर ब्रेन योग में कानों के निचले हिस्सों को पकड़कर उठक-बैठक की जाती है। उनके अनुसार यह तकनीक मस्तिष्क के दोनों गोलार्धों को सक्रिय और संतुलित करने में सहायक है। नाड़ी शोधन प्राणायाम से मस्तिष्क की कोशिकाओं तक ऑक्सीजन का संचार बेहतर होता है और विचारों में स्पष्टता आती है। सेमिनार के अंत में विद्यार्थियों और स्टाफ सदस्यों ने सामूहिक रूप से सुपर ब्रेन पावर योग का अभ्यास किया। इस अवसर पर डीन यूथ वेलफेयर डॉ. सुरेश मलिक, डॉ. सुनील भारद्वाज, डॉ. शारदा कालरा और डॉ. नवीन मौजूद रहे।
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सेमिनार में विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सवाल पूछे। एमएससी योग प्रथम सत्र की छात्रा कल्पना ने माइंड फॉग (मानसिक धुंधलापन) के कारणों और समाधान को लेकर सवाल किया। जीवन राव ने बताया कि मानसिक तनाव, अनियमित खानपान, असंतुलित जीवनशैली, अत्यधिक स्क्रीन टाइम और पर्याप्त नींद न लेना इसके प्रमुख कारण हैं। इससे एकाग्रता, याददाश्त और मानसिक स्पष्टता प्रभावित होती है।
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सुपर ब्रेन योग और नाड़ी शोधन के बताए फायदे
जीवन राव ने बताया कि सुपर ब्रेन योग में कानों के निचले हिस्सों को पकड़कर उठक-बैठक की जाती है। उनके अनुसार यह तकनीक मस्तिष्क के दोनों गोलार्धों को सक्रिय और संतुलित करने में सहायक है। नाड़ी शोधन प्राणायाम से मस्तिष्क की कोशिकाओं तक ऑक्सीजन का संचार बेहतर होता है और विचारों में स्पष्टता आती है। सेमिनार के अंत में विद्यार्थियों और स्टाफ सदस्यों ने सामूहिक रूप से सुपर ब्रेन पावर योग का अभ्यास किया। इस अवसर पर डीन यूथ वेलफेयर डॉ. सुरेश मलिक, डॉ. सुनील भारद्वाज, डॉ. शारदा कालरा और डॉ. नवीन मौजूद रहे।
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