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Bhiwani News: परीक्षा के दौरान विद्यार्थी करें पाठ्यक्रम की दोहराई, तनाव मुक्त करने के लिए अभिभावक बनाए पर्याप्त माहौल
Sat, 02 Mar 2024 10:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sat, 02 Mar 2024 10:58 PM IST
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भिवानी। परीक्षाओं के समय विद्यार्थियों को सबसे अधिक तनाव होता है। इस समय सीबीएसई और हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की 10वीं व 12वीं कक्षा की परीक्षाएं चल रही हैं। बोर्ड की परीक्षाओं में विद्यार्थी सबसे अधिक परेशान होते हैं। अभिभावक भी बच्चों पर पढ़ने के लिए बार-बार जोर देते रहते हैं। कुछ विद्यार्थी अपने खानपान में भी लापरवाही बरतने लगते हैं। विद्यार्थियों के मोबाइल, टीवी, खेल पर भी प्रतिबंध लगा दिया जाता है।
शिक्षा विभाग से जुड़े प्रबुद्ध लोगों का कहना है कि परीक्षा के दौरान विद्यार्थी पाठ्यक्रम की दोहराई करें। विद्यार्थियों को तनाव मुक्त करने के लिए अभिभावक पर्याप्त माहौल बनाएं। अक्सर देखने में आता है कि बच्चे देर रात तक पढ़ाई करते हैं और सुबह भी पढ़ने के लिए जल्दी उठ जाते हैं। इसका परिणाम ये होता है कि बच्चे पर्याप्त नींद से वंचित रह जाते हैं।
नि:संदेह परीक्षा के दिनों में विद्यार्थियों पर बहुत अधिक तनाव होता है और वे अपने आप को काफी असहज भी महसूस करते हैं। ऐसी स्थिति में बच्चों को तनाव से बचाने में अभिभावकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अभिभावकों को चाहिए कि परीक्षा के दिनों में अपने बच्चों पर अधिक अंक लाने और पूरा समय पढ़ाई में ही लगाने का दबाव न बनाएं बल्कि बच्चों का आत्मविश्वास और मनोबल बढ़ाने की तरफ ध्यान दें। लगातार तीन घंटे की पढ़ाई के बाद कम से कम एक घंटे के लिए अपने बच्चों को अपनी मनपसंद का खेल या टीवी देखने की अनुमति अवश्य प्रदान करें ताकि बच्चों में नई स्फूर्ति और उत्साह का संचार हो सके। इसके साथ-साथ अभिभावकों को चाहिए कि परीक्षा के दिनों में अपने बच्चों के खान पान का अवश्य ध्यान रखें और उनको पौष्टिक आहार दें।
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-रमेश बूरा, शिक्षाविद् एवं पूर्व प्राचार्य।
विद्यार्थी अपने जीवन में परीक्षाओं के समय हमेशा तनाव में आ जाता है और सबसे ज्यादा परेशानी उनके बोर्ड के पेपरों में देखी जा सकती है। कुछ बच्चे तो पेपरों के समय खाना पीना तक छोड़ देते हैं जो उचित नहीं है। बच्चों को चाहिए कि अपने परीक्षा की तैयारी समय से पूर्व ही कर लें ताकि परीक्षा के समय तो बस वो मुख्य मुख्य बिंदुओं की ही दोहराई करें। अपने खान-पान, सोने का विशेष ध्यान रखें। ज्यादा तनाव ग्रस्त रहने पर उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है। इससे उनका पेपर भी अच्छा नहीं हो पाता। बच्चों को चाहिए कि तनाव मुक्त रहने के लिए परीक्षा पूर्व अपनी मनपसंद के गाने, पुस्तक, कोई मनोरंजक वीडियो आदि देखें, जिससे उनका तनाव काफी हद तक दूर होगा। बच्चों को चाहिए अपने मनपसंद शिक्षक से भी परीक्षा पर चर्चा करते रहें उनका मार्ग दर्शन उनको तनाव मुक्त करने में काफी मददगार साबित होगा।
-संदीप वधवा, विज्ञान अध्यापक, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, पालवास भिवानी
परीक्षा के समय में विद्यार्थियों को शांत माहौल की जरूरत है। अक्सर घरों में होता है कि विद्यार्थियों को वो माहौल नहीं मिल पाता जो उन्हें मिलना चाहिए। अभिभावकों को इसका विशेष ध्यान देना चाहिए। विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए ज्यादा न कहे। पढ़ाई के साथ खेलना और खाना पीना भी बहुत जरूरी है। साथ ही एक ही बार में ज्यादा खाने से परहेज करना चाहिए। अधिकतर विद्यार्थी पढ़ाई में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि खाने-पीने पर उनका ध्यान ही नहीं जाता जबकि इस समय उन्हें पोषण की अत्यधिक जरूरत होती है। बच्चों को ज्यादा मिर्च मसाले वाले भोजन और फास्ट फूड से दूर रहना चाहिए। उन्हें हरी सब्जियां, दूध, जूस इत्यादि का सेवन करना चाहिए। इसी के साथ विद्यार्थियों को शारीरिक व्यायाम पर भी ध्यान देना चाहिए।
-धर्मबीर सिंह आर्य, समाजसेवी व पूर्व सैन्य अधिकारी।
परीक्षा के दौरान विद्यार्थी पाठ्यक्रम की दोहराई करें। मानसिक स्वास्थ्य के लिए शरीर को ठीक रखना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए सुबह की सैर, योग या फिर पार्क या घर में कोई भी व्यायाम किया जा सकता है। यदि दिमाग में सही मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचती है तो रक्त संचार अच्छा होता है और दिमाग तेजी से काम करता है। दिमाग को रिफ्रेश करने के लिए मनोरंजन भी बहुत जरूरी है। विद्यार्थियों को परीक्षाओं के दौरान पढ़ाई नहीं रिवीजन करना चाहिए। क्योंकि परीक्षाओं की तैयारी एक दिन में नहीं होती। वहीं विद्यार्थियों को परीक्षाओं के दौरान मेंटल हेल्थ का ज्यादा ध्यान देना चाहिए। केवल पढ़ाई करते रहने से दिमाग बोझिल हो सकता है। इसलिए चाहे तो घर पर ही कुछ फनी करें या फिर कुछ देर दोस्तों के साथ जाकर खेलकर या अन्य कार्य करके मूड को रिफ्रेश कर सकते हैं।
- तकदीर सिंह ग्रेवाल, पूर्व खंड शिक्षा अधिकारी भिवानी।
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शिक्षा विभाग से जुड़े प्रबुद्ध लोगों का कहना है कि परीक्षा के दौरान विद्यार्थी पाठ्यक्रम की दोहराई करें। विद्यार्थियों को तनाव मुक्त करने के लिए अभिभावक पर्याप्त माहौल बनाएं। अक्सर देखने में आता है कि बच्चे देर रात तक पढ़ाई करते हैं और सुबह भी पढ़ने के लिए जल्दी उठ जाते हैं। इसका परिणाम ये होता है कि बच्चे पर्याप्त नींद से वंचित रह जाते हैं।
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नि:संदेह परीक्षा के दिनों में विद्यार्थियों पर बहुत अधिक तनाव होता है और वे अपने आप को काफी असहज भी महसूस करते हैं। ऐसी स्थिति में बच्चों को तनाव से बचाने में अभिभावकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अभिभावकों को चाहिए कि परीक्षा के दिनों में अपने बच्चों पर अधिक अंक लाने और पूरा समय पढ़ाई में ही लगाने का दबाव न बनाएं बल्कि बच्चों का आत्मविश्वास और मनोबल बढ़ाने की तरफ ध्यान दें। लगातार तीन घंटे की पढ़ाई के बाद कम से कम एक घंटे के लिए अपने बच्चों को अपनी मनपसंद का खेल या टीवी देखने की अनुमति अवश्य प्रदान करें ताकि बच्चों में नई स्फूर्ति और उत्साह का संचार हो सके। इसके साथ-साथ अभिभावकों को चाहिए कि परीक्षा के दिनों में अपने बच्चों के खान पान का अवश्य ध्यान रखें और उनको पौष्टिक आहार दें।
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-रमेश बूरा, शिक्षाविद् एवं पूर्व प्राचार्य।
विद्यार्थी अपने जीवन में परीक्षाओं के समय हमेशा तनाव में आ जाता है और सबसे ज्यादा परेशानी उनके बोर्ड के पेपरों में देखी जा सकती है। कुछ बच्चे तो पेपरों के समय खाना पीना तक छोड़ देते हैं जो उचित नहीं है। बच्चों को चाहिए कि अपने परीक्षा की तैयारी समय से पूर्व ही कर लें ताकि परीक्षा के समय तो बस वो मुख्य मुख्य बिंदुओं की ही दोहराई करें। अपने खान-पान, सोने का विशेष ध्यान रखें। ज्यादा तनाव ग्रस्त रहने पर उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है। इससे उनका पेपर भी अच्छा नहीं हो पाता। बच्चों को चाहिए कि तनाव मुक्त रहने के लिए परीक्षा पूर्व अपनी मनपसंद के गाने, पुस्तक, कोई मनोरंजक वीडियो आदि देखें, जिससे उनका तनाव काफी हद तक दूर होगा। बच्चों को चाहिए अपने मनपसंद शिक्षक से भी परीक्षा पर चर्चा करते रहें उनका मार्ग दर्शन उनको तनाव मुक्त करने में काफी मददगार साबित होगा।
-संदीप वधवा, विज्ञान अध्यापक, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, पालवास भिवानी
परीक्षा के समय में विद्यार्थियों को शांत माहौल की जरूरत है। अक्सर घरों में होता है कि विद्यार्थियों को वो माहौल नहीं मिल पाता जो उन्हें मिलना चाहिए। अभिभावकों को इसका विशेष ध्यान देना चाहिए। विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए ज्यादा न कहे। पढ़ाई के साथ खेलना और खाना पीना भी बहुत जरूरी है। साथ ही एक ही बार में ज्यादा खाने से परहेज करना चाहिए। अधिकतर विद्यार्थी पढ़ाई में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि खाने-पीने पर उनका ध्यान ही नहीं जाता जबकि इस समय उन्हें पोषण की अत्यधिक जरूरत होती है। बच्चों को ज्यादा मिर्च मसाले वाले भोजन और फास्ट फूड से दूर रहना चाहिए। उन्हें हरी सब्जियां, दूध, जूस इत्यादि का सेवन करना चाहिए। इसी के साथ विद्यार्थियों को शारीरिक व्यायाम पर भी ध्यान देना चाहिए।
-धर्मबीर सिंह आर्य, समाजसेवी व पूर्व सैन्य अधिकारी।
परीक्षा के दौरान विद्यार्थी पाठ्यक्रम की दोहराई करें। मानसिक स्वास्थ्य के लिए शरीर को ठीक रखना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए सुबह की सैर, योग या फिर पार्क या घर में कोई भी व्यायाम किया जा सकता है। यदि दिमाग में सही मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचती है तो रक्त संचार अच्छा होता है और दिमाग तेजी से काम करता है। दिमाग को रिफ्रेश करने के लिए मनोरंजन भी बहुत जरूरी है। विद्यार्थियों को परीक्षाओं के दौरान पढ़ाई नहीं रिवीजन करना चाहिए। क्योंकि परीक्षाओं की तैयारी एक दिन में नहीं होती। वहीं विद्यार्थियों को परीक्षाओं के दौरान मेंटल हेल्थ का ज्यादा ध्यान देना चाहिए। केवल पढ़ाई करते रहने से दिमाग बोझिल हो सकता है। इसलिए चाहे तो घर पर ही कुछ फनी करें या फिर कुछ देर दोस्तों के साथ जाकर खेलकर या अन्य कार्य करके मूड को रिफ्रेश कर सकते हैं।
- तकदीर सिंह ग्रेवाल, पूर्व खंड शिक्षा अधिकारी भिवानी।